9 January 2014

मुश्किल नही हैं कुछ भी अगर.......

                      मुश्किल नही हैं कुछ भी अगर.......

            मेढकों की दुनिया का बड़ा महत्वपूर्ण दिन था |देश भर के मेढक उस विशालकाय टावर को देख रहें थे ,जो कुम्भ मेला परिक्षेत्र में निगरानी हेतु सेना द्वारा लगाया जा रहा था |टर्र ...टर्र की आवाज से पूरा क्षेत्र गूंज रहा था ,कुछ पत्रकार मेढक भी आ गये थे ,जो वरिष्ठ नेता मेढको का साक्षात्कार कर रहें थे |
    कुछ मेढकों ने टावर को अंगारे भरे आँखों से घूरा ,कुछ ने बताया की ऐसे सैकड़ो टावर पर वे पहले भी चढ़ चुंके है ,एक ही चीज अलग हैं  वे सब टावर इस टावर की तरह लाल नही थे ,बल्कि काले थे,पीले या नीले थे ...बस्स लाल को छोड़कर सब रंग के टावर थे|
     पहलवान मेढको ने अपने गुरु के निर्देशन में टॉवर पर चढ़ाई शुरू की .....| ये क्या? सब फिसले  जा रहें हैं,कोई थोडा चढ़ भी जा रहा हैं तो भी फिसल पड़ रहा हैं |मेढको में तीस-मार मेढ़क भी फिसले ...फिर मेढको के प्रोफेसर्स और शिक्षको ने ,जो युवा मेढको को 'चिकित्सा विज्ञान' ,'कला',और 'सामाजिक विज्ञान' ,'मेढकत्व और कूप-मण्डूकता' पढ़ाते थे ,और इन्टरनल तथा वायबा के मार्क्स निर्धारित करते थे ,उन्होंने कैलकुलेट किया की लाल रंग के कारण मेढक नही चढ़ सकते |मेढको के लीडर ने प्रेसवार्ता में  इस नाकामयाबी के लिए इंसानों को जिम्मेदार माना |
     अभी यह कार्यक्रम चल ही रहा था ,की एक दुबला पतला युवा मेढ़क ,भीड़ से निकला और चढ़ने लगा ...और मेढक चिल्ला कर बोले -अबे !तू नही कर सकता ,इस टावर पर कोई भी मेढक कभी भी नही चढ़ सकता ,नही चढ़ सकता ...नही चढ़ सकता..भयानक शोर मचने लगा ,मेढको के पत्रकारों ने कैमरे का रुख घुमा दिया उस युवा मेढक का पुरे शहर में प्रसारण होने लगा ,वह थोडा फिसलता जरूर था ,किन्तु उससे ज्यादा चढ़ता था .....थोड़े ही समय बाद वह टावर के शीर्ष पर था|
        थोड़े समय बाद जब वह नीचे उतरा तो पत्रकार मेढको ने उसे घेर लिया |पता चला की यह मेढक 'बहरा' हैं |लोगो के शोर को {जिसमे मेढक लोग चिल्ला कर असम्भव कह रहे थे} को उसने हौंसला अफजाई समझ लिया था ,जितना ज्यादा ऊपर चढ़ता ,उतना ही ज्यादा शोर सुनता ...उतना ही ज्यादा प्रोत्साहन समझता जाता था |
      दोस्तों !हमे भी उस मेढक की तरह बनना हैं,लोग चारो और से हमारी सीमा रेखा  निर्धारित करने की कोशिश करेंगे ,पर असल बात हमारे हौंसलों में हैं,दुनिया सलाह देंगी की 'हम ये नही कर सकते ,वो नही कर सकते' पर आपका दिल क्या कहता हैं ?अगर दिल कहता हैं की कर सकतें हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको नही रोक सकती|कोई आपको रोक सकता हैं तो वो सिर्फ आप खुद हैं |
         टावर के शीर्ष पर उस मेढक के साथ एक खास बात हुयी,वहा उसे एक भौरा मिला |वायुगतिकी के सिद्धांत के अनुसार भौरा उड़ नही सकता,पर भौरा स्कूल तो जाता नही ,वह तो सिर्फ फूल खिलाता हैं {आपने सुना होंगा -'भौरे ने खिलाया फूल...'},उसे वायुगतिकी के सिद्धांत की जानकारी तो हैं नही इसलिए वह इस ज्ञान से भौरे ने अपनी सीमाए भी निर्धारित नही किया हैं ,और उड़ता ही रहता हैं |
लेखन-{डॉ.}अजय यादव

5 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (10.01.2014) को " चली लांघने सप्त सिन्धु मैं (चर्चा -1488)" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है,नव वर्ष कि मंगलकामनाएँ,धन्यबाद।

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  2. उत्कृष्ट प्रस्तुति
    नव वर्ष की मंगलकामनाएँ

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  3. बहुत प्रेरक प्रस्तुति...

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