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1 September 2013

सबसे बड़ा रोग ! क्या कहेंगे लोग ?



रीना ने आज खुद के मुताबिक सफलता की सबसे ऊँचे पायदान को छुवा था,जिस चीज को उसने पाना चाहा था आज उसने पा लिया|पर इन सब में सबसे खास बात यह थी कि रीना ने अपनी जिंदगी में कभी मेहनत नही करना सीखा,उसकी फिलोसिफी थी कि मेहनत स्मार्ट थिंकर्स नही करते ..भगवान ने इंसान को इतना अक्ल दिया हैं,फिर मेहनत करने कि जरूरत क्या हैं?मेहनत के बजाय यदि किसी चीज कि जरूरत हैं तो वो हैं अपने कार्य कों पसंद और इंजॉय करना|जिन चीजों को आप पसंद करते हैं अगर उनको इंजॉय करना सीख जाते हैं तो हर चीज बहुत सरल हों जाती हैं |दसवी की परीक्षा में उसने बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया था ,फिर आज इंजीनियरिंग में उसने टॉप किया था फिर भी कहती हैं वो कभी मेहनत नही करती ..आखिर राज क्या हैं उसकी सफलता के पीछे आईये उसके जीवन का सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं
रीना हमेशा लाईट ट्रेवेल करती हैं अर्थात बिना फिजूल के इमोशंस ,गिल्ट ,इम्प्रेशन आदि के चक्कर में वह नही पड़ती न ही इन इमोशंस को अपने मष्तिष्क में रखती हैं | आप उसे पसंद करो या नापसंद करो ..वह इस चीज के पीछे कभी परेशान नही होती कि ….क्या कहेंगे लोग ??…अक्सर वह कहती भी हैं कि सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग”|अक्सर उसे मैं हवाओ से बातें करते खुले अम्बर तले खुले उड़ते बालो में साईकिल भागाते देखा हूँ | वह कहीं भी नुक्कड़ पर चाट खा सकती हैं ,किसी भी दूकान से स्टेशनरी खरीद सकती हैं ..इस मामले में उसे जो अच्छा लगता हैं करती हैं |बिना वजह के फेसबुक पर वक्त नही बिताती क्यूंकि उसको इसकी जरूरत नही लगतीइस विषय में रीना अक्सर कहती हैं हम लोगों को करना हैं ……पांच कार्य और करते पच्चीस हैं ,बिना वजह अपने जिंदगी में काम्प्लिकेसंस पैदा करते हैं|हमे जिंदगी में जो करना चाहिए सिर्फ वही करें तो हमारी जिंदगी यक़ीनन बड़ी सरल हों जाती हैं ,नही तो …………………हम स्वाद और चस्के लेने कि आदत के इतने गुलाम हों गए हैं, कि हम वो चीज भूलते जा रहें हैं जो यक़ीनन बहुत महत्वपूर्ण हैं हमारे लिए अक्सर हम लोग जीवन ऐसे जीते हैं जैसे कल कि तैयारी कर रहें हों लेकिन क्या कल किसी ने देखा हैं ?नही न….रीना का विश्वास हैं कि अपने लक्ष्य पर फोकस किया जाय तो रिजल्ट के रूप में जादू’{magical results]आते हैं |
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दोस्तों !जीवन में हमारी सोच के अनुसार हमे परिणाम मिलते हैं |आईये समझते हैं कैसे ?
ईश्वर के पास एक डिक्सनरी हैं, जिसमे सिर्फ एक ही शब्द हैं “तथास्तु”{granted}.
एक महिला कहती हैं “मुझे कोई नही चाहता”|
ऊपर से ईश्वर कहते हैं “तथास्तु”|
दूसरी महिला कहती हैं “मुझे !हर कोई चाहता हैं ,मेरा सम्मान करता हैं”|
ऊपर से ईश्वर कहते हैं “तथास्तु”
आप जैसी भी सोंच या भावना रखेंगे ,भगवान का तथास्तु{granted} हमेशा चलता रहता हैं |अब आप कहाँ कहाँ तथास्तु चाहते हैं ,ईश्वर से ??
चुनाव आपका हैं |

23 August 2013

जीवन हैं अनमोल रतन ! "change-change" & "win-win" {a motivational speech}

जीवन में हमेशा परिवर्तन होता ही रहता हैं |कभी हम उच्चतर शिखर पर होते हैं तो कभी विफलता के बिलकुल समीप |हमे अपने स्वप्नों की जिंदगी वाली सोंच कों हमेशा खुद पर हावी रखना हैं |हम अक्सर परिस्थितिजन्य सोंच एवं उनके दृश्यांकन में उलझे रहते हैं ,हमे बुरी दशाओं में भी अच्छी चीजों की कल्पना करने का साहस करना होंगा ,क्यूंकि हम मनुष्य हैं और अपनी खुद की दुनिया के निर्माता भी हैं |दस वर्ष की उम्र से ही हम अपने विचारों और कर्मो की वजह से भविष्य का निर्माण करने लगते हैं | 

     

               गाय दूध नही देती ,हमे उसके थन से दूध कों जिस तरह से निकलना पड़ता हैं ,उसी तरह से जीवन में से सुख,आनंद,प्रसन्नता सफलता कों निकालना पड़ता हैं | 

    "एक बार जंगल में कछुआ और खरगोश के बीच रेस तय हुयी |खरगोश ने साफ़ सुथरा ‘थल मार्ग’ चुना और कछुए कों सुझाव दिया |जिसे कछुए ने मान लिया ,दोनों दौड़े ..खरगोश जीत गया |कछुआ अपनी कमजोरी तो जानता था परन्तु वह अपनी मजबूती पर फोकस करते हुए उसने खरगोश कों दूसरी रेस के लिए आमंत्रित किया| दूसरी रेस के लिए उसने जो मार्ग चुना उसमे जंगल-दरिया –जंगल-दरिया –जंगल का क्रम था ,उससे खरगोश भी सहमत हुआ,क्यूंकि पहली रेस में कछुआ भी विना किसी आपति के सहमती दिया था |इस बार कछुआ जीत गया ,अब जंगल के सारे जानवर खरगोश कों चिढ़ाने लग पड़े ...अब खरगोश का जब जीना मुश्किल होने लगा तो वह दुबारा कछुए के पास आया बोला मित्र चलो एक रेस और हों जाए रेसिंग ट्रैक तो वही रहेंगा{ जंगल-दरिया –जंगल-दरिया –जंगल}..किन्तु स्ट्रेटेजी अलग आपकी बार स्थल पर तुम मेरे पीठ पर और जल में मैं तुम्हारे पीठ पर इस प्रकार से दोनों दौड़े दोनों विजेता रहे ,और जंगल के बाकी जानवरो ने दोनों के सम्मान में भोज का आयोजन किये |दोस्तों यह competetion विथ cooperation का जमाना हैं |मिलजुल कर बढ़ने का वक्त हैं |वों जमाना गया जब केवल कछुआ ही हारता था ,अब खरगोश कों कछुए से मिलजुल कर कार्य करना पड़ता हैं"|


         हमारी समस्त समस्याए अल्पकालिक हैं |वे हमारे विकास के लिए हैं |दर्द एक गुरु हैं |नाकामयाबी सफलता की एक चौड़ी सड़क |हमारे चरित्र का निर्माण हमारे जीवन के कठिन अनुभवों से होता हैं | 

     "एक ग्वाला था ,घूम घूम कर मोहल्ले-मोहल्ले दूध बेचता था |एक घर में दूध देने गया हुआ था ,तभी शरारती बच्चों ने हैप्पी सिंह और ट्रेजेडी किंग नामक दो मेढको कों उसके दूध के डब्बों में दाल दिया |हप्पी सिंह तो अवसर की तलाश में लग गया की कब ढक्कन खुले और वह बाहर छलांग लगाये, उसने सुंदर हरि घास पर टिड्डे खाने और मेढकी के साथ अपने रोमांस के सपने देखे जबकि ट्रेजेडी किंग तो सोच लिए की अब उनका अंतिम दिन आ गया हैं,उन्होंने यमराज का विजुलायिजेसन किया और उन्होंने प्रयास भी  नही किया बचने का..दूध में डूबते - उतराते भगवान कों प्यारे हों गए |दूधिया आया , पहला ढक्कन खोला,हैप्पी पहले से तैयार था कूद गया बाहर ,जब उसने दूसरा ढक्कन खोला तो उसमे उसे ट्रेजेडी किंग मरा हुआ मिला ,दूधिये ने उन्को निकाल फेका और दूध बेच दिया |दोस्तों दोनों के लिए एक सामान अवसर और परिस्थितयां थी ,पर सोच और नजरिया अलग अलग था |दोस्तों हैप्पी सिंह बनिये |हर विषम परिस्थिति एक शिक्षक हैं"| 

      मैंने देखा हैं की मेरे अस्पताल में कुछ लोग हमेशा रिएक्ट करते हैं ,सीनियर्स हैं इसलिए उनसे कह नही पाता की “बॉस ! रिएक्ट नही रिस्पोंड कीजिये” | मानव इतिहास में ईर्ष्या,क्रोध ,बदला लेने की भावना मानव के प्रबल शत्रु रहे हैं ,रामायण कों देखें  तो कैकेयी ईर्ष्या का प्रतीक,लक्ष्मण क्रोध के एवं रावण रिवेंज के प्रतीक हैं |सारा मामला क्रोध से शुरू हुआ ,जो हजारों जीवित जीवो कों काल के गाल में ले गया |सबसे बड़ी जिम्मेदारी और टाईम मैनेजमेंट वाले गुणों के कारण हनुमान आदर के सबसे बड़े पात्र रहे ,उन्होंने कर्मठता और बहादुरी से हर बात कों निश्चित समय पर पूरा किया व् जिम्मेदारी ली |रावण ने उनकी पूछ जलाई उन्होंने उसकी लंका |कारपोरेट जगत की भाषा में “ले पंगा ..दे पंगा”|

        अक्सर कुछ लोग बिना वजह इन्सल्ट करते हैं ,ह्युमिलेट करते हैं ,हम पर चिल्लाते हैं |पर दोस्तों हमारी इजाजत के बिना कोई हमारी बेइज्जत नही कर सकता,हम अपने बारे में क्या सोचते हैं, यह ज्यादा महत्वपूर्ण हैं इस बात की तुलना में की  दुनिया के लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं |यह भी महत्वपूर्ण हैं की हम अपनी क्षमताओं की तुलना में क्या कर रहे हैं ,दूसरों से अपनी तुलना हमे कदापि नही करना चाहिए हमारी दूसरी कापी इस दुनिया में हों हीं नही सकती,हम हरेक व्यक्ति का उदेश्य और धरती पर आने का परपज अलग हैं | 

       हमारे देश में PCR{पालिटिक्स,क्रिकेट और रेलिजन} पर सबसे ज्यादा वक्त खर्च किया जाता हैं |हम बाहरी दुनिया में इतना ज्यादा व्यस्त रहते हैं की खुद से ही नही जुड़ पाते ,जिससे हममे आध्यात्मिक खोखलापंन अंकुरित होना प्रारम्भ करने लगा हैं ,अपने मन और जीवन कों पोषित करने के लिए हमे मौन में बैठना होगा,थोडा बहुत योग और ध्यान में लगना होंगा, ध्यान से रक्त में लैक्टेज का स्तर घटता हैं |ज्यादा लैक्टेज से अनिद्रा व् चिंता होती हैं |ध्यान से DEHYDRO-EPI-ANDRO-STERONE का स्तर बढ़ता हैं जो की ब्रेन की VITALITY का सूचक हैं |ध्यान से ब्लड प्रेसर तथा कोलेस्ट्राल का स्तर कम होता हैं |आर्टेरियो-स्केलेरोसिस का खतरा भी कम होता हैं | 

           आपको अपने जीवन में सबसे ज्यादा संतुलित करने का कार्य आपकी जीवन-संगिनी करती हैं |कोई भी  पति/पत्नी 100/100{HUNDRED OUT OF HUNDRED} तब तक नही हों सकता जब तक आप उसकी छोटी छोटी बातों के लिए प्रसंशा करना नही शुरू कर देते,हर अच्छी बात पर उसका मान बढाईये,उनके मन की सुंदरता पर जाकर जरा देखिये |कभी पत्नी जी ने स्वादिष्ट भोजन पकाएं हों और आप उनकी आँखों में आँखे डाल कर उनकी प्रसंशा में चार शब्द कह कर देखा हैं ?नही न ..आज कह कर देखिये ,{हाँ !झूठी बातों के लिए प्रसंशा नही कीजियेगा }..चमत्कार होने लग पडेंगा ,उनसे इतना ज्यादा सहयोग मिलेंगा,की जिंदगी में आप अब ५००० फुट की बजाय १५००० फुट पर कांफिडेंस से उड़ान भर सकेंगे |{हालांकि मेरी शादी नही हुयी हैं ,यह मेरे बड़े भाईयों/शादीशुदा क्लायिन्ट्स का अनुभव हैं ,की मेरा यह फार्मूला उनके लिए सुपर हिट रहा  हैं ..आशा हैं ..आप सब अपने अनुभव मुझसे शेयर करेंगे }

       जिस तरह स्त्री का गहना उनका मान हैं ,उनका सम्मान हैं ,उनकी देवी रूप में पूजा हैं ,उसी तरह से पुरुष का गहना उनका काम {WORK}हैं |मेरे लिए GODका अर्थ {GO ON DUTY}भी वही हैं जो मेरे सर्वोच्च हित में हैं ,दोस्तों याद रखिये हमारे लिए ईश्वर का स्वरुप वैसा होना चाहिए जो हमारे विकास और आध्यात्मिक उन्नति में मदद करे,न की दकियानूसी भावनाए,व दिस-इम्पावरिंग विश्वासों एवं कटुता तथा आतंकवाद कों बढ़ाये | 

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एक अस्पताल में एक बोर्ड लगा था ,जिसपर लिखा था “यहाँ एक व्यक्ति आया था ,जिसे कुत्ते ने काट लिया था ,कुछ इंजेक्सन लगे वों ठीक होकर वापस गया”...यहाँ एक व्यक्ति आया था जिसे साप ने काट लिया था ,उसकी बोडी कों जहर से मुक्त किया ,एक हफ्ते में वापस गया ....यहाँ एक व्यक्ति आया जिसे आदमी ने काट लिया था ..वर्षों से उसका इलाज चल रहा हैं आज तक ठीक नही हुआ" ...

क्या आदमी आदमी कों काट सकता हैं ?

....हा ,बुरा बोलकर ,कटु बोलकर ..शब्दों के जरिये जख्म देकर |

इलाज क्या हैं ?

हम ने इसके लिए टीका खोजा हैं ..

.#१ टीका-करन प्रक्रिया


हर सुबह सोकर उठने के बाद और सोने से पहले कई बार मन में दुहराना हैं – 

“Day by Day in everyway i’m getting Better and Better”.

हर  दिन ,हर तरीके से मैं और बेहतर होता जा रहा हूँ ...   

                   एवं


 

मेरी दुनिया में सबकुछ श्रेष्ठ और कल्याणकारी हैं |


काटने वाली बिमारी का समूल नाश करने के लिए आईये संकल्प लें –

“मैं आज से जाने-अनजाने में किसी कों भी नही काटूँगा”..

मान लीजिए .घर से निकलते ही,कुछ दूर चलते ही ..रस्ते में हैं काटने वाले का घर...................... और आपको काट ही लिया उस कमबख्त ने , तब ....

तब आपको रिस्पोंस नही देना हैं ,कोई आर्ग्युमेंट नही करना हैं ,बल्कि खुद के बारे में दो सकारात्मक कमांड मस्तिष्क कों देने हैं |जैसे कोई कहे “डॉ अजय तुम पागल हों “तो मैं कहता हूँ “मैं जानता हूँ की मैं विशिष्ट और सुंदर मस्तिष्क वाला व्यक्ति हूँ ““मैं सकारात्मक चिंतक हूँ ,मेरे विचार हमेशा उच्चतर होते हैं”


.............................................लेखन -डॉ अजय 


2 August 2013

“सफल होना कोई बडो का खेल नही बाबू मोशाय ! यह बच्चों का खेल हैं”!

एक कहावत हैं “लोग बूढ़े नही होते ,जब वे अपना विकास करना बंद करदेते हैं तो बूढ़े हों जाते हैं”..दोस्तों हमारी उम्र कितनी भी क्यूँ न हों ,जिंदगी में हमे कुछ भी बहुत बहुत बेहतरीन करना हैं तो एक बच्चे कि तरह विचार करना ही होंगा , डर का वास हमारे मस्तिष्क में होता हैं ,यदि हम अपने मस्तिष्क को डर से मुक्त कर दे तो अज्ञात में छलांग लगाने के काबिल हों जाते हैं ,|अक्सर आपने देखा होंगा बच्चे कहीं से भी कूद फांद सकते हैं क्यूंकि वे डर से मुक्त होते हैं |



 


 जीवन यकीनन बहुत सरल हैं ,यदि मन में रोमांच खुशी व उत्साह हों तो जीवन के रहस्य परत दर परत खुलने लगते हैं …इसलिए बच्चों की तरह उत्सुक बनना होंगा |



हमारा कार्य हमीं से शुरू होता हैं |हमारी दृष्टि खुशियो पर ही होनी चाहिए |आनंद ,उत्साह ,उमंग पर ही होनी चाहिए |हम जो खोंजेंगे वही पायेंगे |जैसा देखेंगे वों ही पायेंगे |सब कुछ हमारे हाथ में ही हैं |
दृष्टि कों सकारात्मक रखने के प्रयत्न से ,चीजों कों सही नजरिये से देखने के प्रयत्न से ..यह हमारे स्वाभाव का मूल गुण बन जायेंगा |फिर तो खुशियाँ ही रहेंगी ...आनंद ही रहेंगा |

बालपन की Empowering मान्यताओं को अपने भीतर हमे लगातार पोषित करते रहना चाहिए |क्यूंकि बड़े होने के साथ साथ अपने सपनो पर सीमाओं[LIMITATIONS] का कुहाशा बढ़ने लगता हैं ,विश्वास रखें हर लक्ष्य हम प् सकते हैं |
 

प्रार्थना जब खुद के लिए की जाती हैं तो बहुत सकारात्मक असर डालती हैं ,जब अपने लोगों के लिए की जाती हैं..तो और असरदार हों जाती हैं… यदि अज्ञात लोगों के लिए कि जाती हैं तो इसका असर बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली हों जाता हैं | 


हृदय से निकली एक साधारण प्रार्थना बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर कर सकती हैं ,आस्था रखिये |


 अपना एक मेमोरी अकाउंट खोल लीजिए |
खुशी के पलों कों लगातार जमा करते जाईये  |
परेशानी और कष्टों कों लगातार निकलते रहिये |
धीरे धीरे खुशिया बढती जायेंगी ........और दुःख घटते घटते कम होते जायेंगे |जब भी वक्त मिले हमे अपनी खूबसूरत जिंदगी की सौगातों कों याद कर लिया कीजिये ....
हमारा तो स्वाभाव हीं प्रेम हैं,दुखी होना,क्रोधित होना हमारा स्वाभाव नही हैं |जीवन में ऐसी बातें हों जाती हैं की क्रोध आ जाता हैं ,दुःख हों जाता हैं उस पर से अपना फोकस /ध्यान हटा देना हैं |जैसे क्रोध या दुःख आया हैं वैसे ही चला भी जायेंगा |आनंद ही स्थायी हैं |खुश रहना ही स्थायी भाव हैं |फिर हम दुखो में क्यों जिए???? ,,,आनंद उठाये |अपने हृदय के बंद दरवाजों, खिडकियोंको खोलिये…..उल्लास मनाएं तथा खुशियाँ बिखेरें …उत्सव मनाये |उत्सवधर्मी प्रकृति का होना आज के समय कि डिमांड हैं |अगर गाने का मन हैं तो गाईये  |जी भर गाइये ,गाने के सुर ताल-लय  ,ढंग पर न जाइये |नाचने का मन कर रहा हैं तो नाचिए|अरे !नाच ही लीजिए  |नाचने की स्टाईल पर मत जाइये  |हसने की इच्छा हैं तो खुलकर हँसिये |किसी की परवाह  न करिये|खुलकर जीयें |पूरी आज़ादी से विना किसी दबाव के जियें |
 पुरानी परिपाटियो और दकियानूसी विचारों को कायम रखना और उनका अनुसरण करना ठहराव हैं ….बदल डालिए जो आपके विकास में बाधक हों यहाँ तक की ईश्वर का स्वरुप भी ऐसा होना चाहिए जो हमारे हित में हों |




मिलेंगा जितना आप सोंच सकते हैं ,सब मिलेंगा |अपने पैर फैलाईये ,चादर खुद ब खुद फैलेंगी | ज्यादा की अपेक्षा लालच नही हैं ,यह दुनिया को अपने मुट्ठी में भर लेने कि आकांक्षा हैं ,चुनौती स्वीकार करे ,ज्यादा की अपेक्षा कीजिये |जिंदगी आसान हैं |
दूसरों कों खुशी देखकर हमे भी अपनी खुशियों कों बढ़ाना हैं |दूसरों के दुःख देखकर हमे अपना दुःख कम करना हैं |जीवन परिवर्तन शील हैं |जो कल था ,आज नही हैं |जो आज हैं ,कल नही रहेंगा |अपना कर्म ही समस्त सुखो का आधार हैं |अपने कर्तव्य के  पालन द्वारा ही हम शांत -चित्त बने रह सकेंगे |




सपने संजोये …क्यूंकि …..
सपने हर हाल में पुरे होंगे हीं…संकल्प कि नीव पर जो टिके हैं,मेहनत के विश्वास और असीम हिम्मत पर आधारित हैं जो  ………..अनंत तक पहुचने का प्रयास कीजिये |केवल एक बच्चा ही बेहिचक और अनजाने में कुछ भी कर सकता हैं,बच्चे जैसी डेयरिंग कीजिये  |


आप असीम हैं ,अनंत हैं |इस ब्रम्हांड की सीमा से भी बड़ी आपकी सीमा हैं ,झूठे विश्वास लिमिटेसंस कों तोडिये |आजाद होईये |

जीवन की कठोर सच्चाईयों में भी कोमलता देखें …अपने हृदय की आवाज सुनिए …आँखों को वह सब देखने दिया जाना चाहिए जो हृदय महसूस करता हैं |

आगे बढते रहना हैं, चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यूँ न हों ….चाहे जितने व्यवधान आये ,चाहे जितने संकट आये ……संघर्ष ही हमे मजबूत बनाएंगा…..रचना करें ऐसी परिस्थितियो का जो हौंसला दे किसी भी विषमता में …



बचपन में चंद पंक्तियाँ सुनी थी -
समर में घाव खाता हैं ,
उसी का मान होता हैं .
छिपी उस वेदना में …
अमर वरदान होता हैं |
सृजन में चोट खाता हैं
छेनी और हथौरी से
व्ही पाषाण कहीं मंदिर में ..
भगवान होता हैं ..

खुद पर विश्वास रखना हैं क्यूंकि ……………..

खुद पर विश्वास रखना हैं क्यूंकि ……………..

जीवन में हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती हैं  | हैं  न |
मुहम्मद अली बोक्सर के बारे में मैंने सुना हैं की ,वे अपने हर मुक्के के साथ बोलते थे "I'M GETTING BETTER AND BETTER".
कोई कार्य असम्भव {IMPOSSIBLE}सिर्फ इसलिए होता हैं की इससे पहले कोई उसपर कोशिश हीं नही किया होता |आप और हम... आईये ...हर असंभव कों संभव बनाये ,नई परिभाषाये गठित करें |



हर    विजेता ,   सिर्फ   जीत    पर   ध्यान रखते हैं ,और जिस चीज पर हम ध्यान रखते हैं उर्जा उसी की दिशा में बहती हैं |
मैं पहले ही लिख चूका हूँ ,और दुहरा रहा हूँ की  हम मानव लोग ,आत्मिक जीव हैं ,जो एक महान उद्देश्य के लिए इस पृथ्वी पर आये हुए  हैं|

जब आप योग्यता रखते हैं तो सफलता के शिखर को क्यूँ नही छूते ….क्या रोक रहा हैं? भीतर से….. ,पकड़िये और निकाल फेकियें …..क्यूंकि हम सभी सिर्फ सफल होने के लिए ही पैदा हुए हैं |उड़ान भरें |


किसी शायर ने ठीक ही कहा हैं-
  •     वही है जिन्दा ,जिसकी आस जिन्दा है,
                 वही है जिन्दा ,जिसकी प्यास जिन्दा है,
                 श्वास लेने का नाम ही जिंदगी नहीं,
                 जिन्दा वही है ,जिसका 'विश्वास'जिन्दा है!






मुस्कुराएं ! दुनियां में इसकी बराबरी करने वाली कोई चीज हैं क्या ????आओ खुश रहें ..जो भी करें उसमे खुशी खोजिये .आनंद खोजिये |
जरा महसूस कीजिये ..आपने बचपन कों,
बचपन के आनंद को|
एक कहावत  हैं "Happiness is more a state of health than of wealth"
प्रेम कोई सीमा नही बांधता ,कोई बंधन नही मानता ,जाति धर्म सम्प्रदाय …इंसान जानवर जैसी हर सीमा से मुक्त होता हैं …इसके साथ कोई शर्ते नही जुड़ी होती हैं |
 वैसे ..राम चरित मानस में तुलसी जी कहते हैं - "शुद्ध प्रेम ” ( अनन्य ) से मनुष्य के ऊपर जैसी कृपा ईश्वर की होती है , वैसी कृपा किसी भी प्रकार के योग ,जप , दान , तपस्या , विभिन्न प्रकार के यज्न /यग्य , व्रत और नियम करने से नहीं होती . ”

प्रेम-मय हों जाए-



जीवन में एक क्षण भी खुशियों का न जाने पाए …कल किसको जीना हैं भला ..बस आज आओ उत्सव मनाये …


कभी हार नही मानना हैं …….हम सब हैं विजेता ……SUCCESS का SOFTWARE सबके भीतर इंस्टाल हैं ,बस इस्तेमाल करना हैं ……




सभी का अभिवादन !

जय हिंद ,वन्देमातरम !
-डॉ अजय की प्रस्तुति |
{कुछ  चित्र -गूगल/फेसबुक  से साभार}

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