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3 September 2013

जिम्मेदारियाँ..................... हैं ! तेरी मेहरबानियाँ.....


||जिम्मेदारियाँ... हैं  ! तेरी मेहरबानियाँ..||

          इस ब्रम्हांड में संयोग जैसी कोई चीज नही होती ,हम एक सुव्यवस्थित ब्रम्हांड में रहते हैं |हमारे जीवन में होने वाला सब कुछ जिसे हम अच्छे या बुरे के आधार पर केटेगराईज्ड करते हैं |सब के लिए केवल और केवल हम,हमारी भावनाए या एहसास जिम्मेदार हैं |जरुरी हैं की , हमारा फोकस लेजर जैसा हों ,ताकि हमेशा मनचाही चीज के बारे में सोंचते व बात करते रहे | अक्सर लोग कहतें हैं “अजय जी !काम पर जाना पड़ता हैं”.बहुत कम कहते हैं की “काम पर जाता हूँ” ! दोस्तों ..जिम्मेदारी से सामर्थ्य बढ़ती हैं ,लेकिन उन लोगों का क्या ?जिनको जिम्मेदारी बोझ लगती हैं ,उन लोगों के मस्तिष्क के सोफ्टवेयर वाईरस{नकारात्मक विचार/भावनाएं } द्वारा प्रभावित हों चुके होते हैं |एक शेर याद आ रहा हैं

“एक  खता  ता-उम्र  हम ,   करते     रहें|

धूल चेहरे पर थीं,और आइना साफ़ करते रहें”||

दोस्तों हम सब आखिर क्यूँ जी रहें हैं ?

आप क्यूँ जी रहें हैं ?

हम सब जी रहें हैं क्यूंकि हम खुश रहना चाहतें हैं |

                हमे खुश रहने के लिए अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य हमेशा उत्तम रखना होंगा |शारीरिक स्वास्थ्य अर्थात कसरत जबकि मानसिक स्वास्थ्य से तात्पर्य नकारात्मक भावनाओं कों हटाकर सकारात्मक भावनाओं {Progressive Thought}कों स्थापित करना हैं |

यह कैसे होंगा ?

जैसे अंधेरे कों भगाने के लिए दीपक जलाते हैं, वैसे मन में सकारात्मकता कों लगातार स्थान देने पर नकारात्मकता का अंत हों जाता हैं |
अपने जीवन में अच्छे मित्रों,अच्छी पुस्तकों आदि कों समय देना होंगा |किसी व्यक्ति कों मैं उसके मित्रों कों देखकर ही पहचान जाता हूँ की यह किस स्वभाव का होंगा ,दोस्तों आपके जीवन का स्तर{दशा/दिशा }वैसे ही होंगी{औसतन} ,जैसे की आपके करीबी पांच मित्रों की होंती हैं |
परिवार {F.A.M.I.L.Y.=Father And Mother I Love You} की खुशी का ध्यान रखकर ही हम खुश हों सकतें हैं |हमारा देश वर्षों से पितृभक्ति वाला देश रहा हैं ,आप महर्षि परशुराम  के ज़माने से यह देख रहें हैं | 
माँ कभी कोई फरमाईश नही करतीं ,वे हमेशा बिना शर्त का प्रेम बांटती फिरती हैं ,दोस्तों उनको खुश रखियें |दुनिया के हर रिश्ते से ,माँ के साथ रिश्ता नौ महीने ज्यादा का होता हैं |माता खुश हैं तो पूरा परिवार खुश रहता हैं |
दोस्तों इस दुनिया में कोई सेल्फ मेड नही होता ,इस दुनिया में आने के लिए भी लोगों की जरूरत पड़ती हैं|हम अपने दिन के २४ घंटों में से ज्यादातर अपने काम के सिलसिले में खर्च करते हैं,हम जिस कंपनी में काम करते हैं,अगर उस कम्पनी कों खुद की कम्पनी मानकर  कार्य  करें तो आश्चर्यजनक तरक्की और इनकम से हमारी दुनिया आबाद हों जाएँ|
दोस्तों सारी दुनिया में ,यहाँ तक की घर-गृहस्थी में भी  तनाव का सबसे प्रमुख कारण “Lack Of Communication” हैं |घर पर होना अलग बात हैं ,घर वालों के साथ होना अलग बात  ! आप डिसाईड कीजिये की ज्यादा वक्त tv के साथ बिताते हैं ,या बीबी के साथ |
 दोस्तों !इस दुनिया में हमारा जो भी उद्दम/व्यवसाय/कृति  होती हैं ,उसके कुछ खरीददार होतें हैं,जिन्हें ग्राहक कहते हैं|ग्राहक मुर्गी नही हैं ,जो सोने का अंडा देती हैं ,मुर्गी कों तो कभी न कभी हलाक होना ही पड़ता हैं |दोस्तों !ग्राहक गाय की तरह हैं ,जो सेवा करने पर दूध देती हैं |
    दोस्तों ! दिल में ग्राहक का एक मंदिर बना लिजियें,रोज सुबह उनको नमन कीजिये ,क्यूंकि उन्ही से आपकी रोटी {R.O.T.I.=Return On Time Investment}चलती हैं,आपके बच्चों की फीस भरी जातीं हैं,आपकी बीबी के गहने खरीदे जाते हैं|

    “कावड़ लेकर बाबा गोरखनाथ हजारों किमी की यात्रा कर चुके थे ,उन्होंने सड़क के किनारे एक बहुत बीमार ..मरते हुए गधे कों देखा,जो जल के लिए तडप रहा था |बाबा ने अपने कावड़ का जल उस गधे कों पिलाया ,यह देखकर बाकी कावड़िये नाराज़ भी हुए|बाबा बोले “देखो भाईयो !भोलेनाथ के लिए कावड़ तो आप सब ले जा रहें हों और मेरे दो मटके न चढ़े,तो भी उनकी प्यास पर कोई फरक नही पड़ेंगा ,लेकिन अभी यह जल अभी मैंने इस गधे कों नही पिलाया तो इसके प्राण का अंत हों जायेंगा |किद्वंती  हैं की पानी पिलातें ही शिव जी प्रकट हुए और बोलें की “अगर किसी का जल मुझ तक पहुंचा तो गोरखनाथ तेरा”|

दोस्तों ! जिस श्रृद्धा से आप मंदिर जाते हों ,अगर उसी श्रृद्धा से अपने काम पर जातें हों {चाहे जो करतें हों}तो समझ लीजिए की उस परमात्मा के दरबार में हाजिरी लग गयीं |

दोस्तों !
मैं आप सबके बीच का एक साधारण युवा हूँ ,कभी कभार पान की दूकान के पास खड़ा होकर लोंगो की बातें सुनता हूँ ,सिगरेट का कश खींचेंगे, और लम्बा धुँआ छोड़ेंगे ...और विश्व इकोनोमी व वकवास समाचारों की  की चर्चा करेंगे की देखों जी, चीन ने, जापान ने , अमेरिका ने कितनी तरक्की कर ली हैं, पर हमारा डाकटर मनमोहन सिंह कुछ करता हीं नही, क्रिकेट टीम बेकार हैं ...पूनम पांडे ....,विलायती हीरोईने ..इत्यादि इत्यादि |अब ये सब बातें करने से क्या स्थितियां सुधर रहीं हैं ?जब इनसे पूछो “जी ! भारत की इकोनोमी सुधारने के लिए आप क्या कर रहें हों ?..लो जी बात कर ली बस हों गयी पूरी जिम्मेदारी | ये ऐसे लोग हैं जिनको एक्सन बिलकुल नही लेना हैं और इनकी सोच पूरी तरह निगेटिव हों चुकी होती हैं |
       कुछ लोग तो बड़े सकारात्मक होतें हैं किन्तु एक्सन हीं नही लेते ,इसका भी कोई फायदा नही |इनसे तसल्ली तो मिल सकती हैं ,पर तरक्की नही|इस कैटेगरी के लोग OSTRICH SYNDROME से ग्रसित होते हैं अर्थात यथास्थिति का सामना नही करते ,भौकाल बनाते हैं बस |एडमंड बर्क कहतें हैं -

“बुराई के जड़ ज़माने के लिए इतना काफी हैं की अच्छे लोग कुछ न करें ,और बुराई जड़ पकड़ लेंगी”

“For evil to flourish,good people have to do nothing and evil shall flourish”-Edmond Burke

पर कुछ लोग ऐसे LEADER हैं जिनको बेहतर कार्य और हर कार्य की जिम्मेदारी के लिए कोई तमगा नही चाहिए होता हैं{Lead Without A title} |ये किसी का दोष नही देखते ,बहाने नही बनाते और स्थिति कों बेहतर करने की दिशा में निरंतर लगे रहते हैं |इनकी प्रकृति पहल करने वाली {INITIATIVE}होती हैं |दुनिया में होने वाले समस्त बेहतर कार्यों के पीछे इनका हाथ और उर्जा होती हैं |ऐसा ही व्यक्ति बनने की कोशिश में मैं लगा हूँ|

2 August 2013

“सफल होना कोई बडो का खेल नही बाबू मोशाय ! यह बच्चों का खेल हैं”!

एक कहावत हैं “लोग बूढ़े नही होते ,जब वे अपना विकास करना बंद करदेते हैं तो बूढ़े हों जाते हैं”..दोस्तों हमारी उम्र कितनी भी क्यूँ न हों ,जिंदगी में हमे कुछ भी बहुत बहुत बेहतरीन करना हैं तो एक बच्चे कि तरह विचार करना ही होंगा , डर का वास हमारे मस्तिष्क में होता हैं ,यदि हम अपने मस्तिष्क को डर से मुक्त कर दे तो अज्ञात में छलांग लगाने के काबिल हों जाते हैं ,|अक्सर आपने देखा होंगा बच्चे कहीं से भी कूद फांद सकते हैं क्यूंकि वे डर से मुक्त होते हैं |



 


 जीवन यकीनन बहुत सरल हैं ,यदि मन में रोमांच खुशी व उत्साह हों तो जीवन के रहस्य परत दर परत खुलने लगते हैं …इसलिए बच्चों की तरह उत्सुक बनना होंगा |



हमारा कार्य हमीं से शुरू होता हैं |हमारी दृष्टि खुशियो पर ही होनी चाहिए |आनंद ,उत्साह ,उमंग पर ही होनी चाहिए |हम जो खोंजेंगे वही पायेंगे |जैसा देखेंगे वों ही पायेंगे |सब कुछ हमारे हाथ में ही हैं |
दृष्टि कों सकारात्मक रखने के प्रयत्न से ,चीजों कों सही नजरिये से देखने के प्रयत्न से ..यह हमारे स्वाभाव का मूल गुण बन जायेंगा |फिर तो खुशियाँ ही रहेंगी ...आनंद ही रहेंगा |

बालपन की Empowering मान्यताओं को अपने भीतर हमे लगातार पोषित करते रहना चाहिए |क्यूंकि बड़े होने के साथ साथ अपने सपनो पर सीमाओं[LIMITATIONS] का कुहाशा बढ़ने लगता हैं ,विश्वास रखें हर लक्ष्य हम प् सकते हैं |
 

प्रार्थना जब खुद के लिए की जाती हैं तो बहुत सकारात्मक असर डालती हैं ,जब अपने लोगों के लिए की जाती हैं..तो और असरदार हों जाती हैं… यदि अज्ञात लोगों के लिए कि जाती हैं तो इसका असर बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली हों जाता हैं | 


हृदय से निकली एक साधारण प्रार्थना बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर कर सकती हैं ,आस्था रखिये |


 अपना एक मेमोरी अकाउंट खोल लीजिए |
खुशी के पलों कों लगातार जमा करते जाईये  |
परेशानी और कष्टों कों लगातार निकलते रहिये |
धीरे धीरे खुशिया बढती जायेंगी ........और दुःख घटते घटते कम होते जायेंगे |जब भी वक्त मिले हमे अपनी खूबसूरत जिंदगी की सौगातों कों याद कर लिया कीजिये ....
हमारा तो स्वाभाव हीं प्रेम हैं,दुखी होना,क्रोधित होना हमारा स्वाभाव नही हैं |जीवन में ऐसी बातें हों जाती हैं की क्रोध आ जाता हैं ,दुःख हों जाता हैं उस पर से अपना फोकस /ध्यान हटा देना हैं |जैसे क्रोध या दुःख आया हैं वैसे ही चला भी जायेंगा |आनंद ही स्थायी हैं |खुश रहना ही स्थायी भाव हैं |फिर हम दुखो में क्यों जिए???? ,,,आनंद उठाये |अपने हृदय के बंद दरवाजों, खिडकियोंको खोलिये…..उल्लास मनाएं तथा खुशियाँ बिखेरें …उत्सव मनाये |उत्सवधर्मी प्रकृति का होना आज के समय कि डिमांड हैं |अगर गाने का मन हैं तो गाईये  |जी भर गाइये ,गाने के सुर ताल-लय  ,ढंग पर न जाइये |नाचने का मन कर रहा हैं तो नाचिए|अरे !नाच ही लीजिए  |नाचने की स्टाईल पर मत जाइये  |हसने की इच्छा हैं तो खुलकर हँसिये |किसी की परवाह  न करिये|खुलकर जीयें |पूरी आज़ादी से विना किसी दबाव के जियें |
 पुरानी परिपाटियो और दकियानूसी विचारों को कायम रखना और उनका अनुसरण करना ठहराव हैं ….बदल डालिए जो आपके विकास में बाधक हों यहाँ तक की ईश्वर का स्वरुप भी ऐसा होना चाहिए जो हमारे हित में हों |




मिलेंगा जितना आप सोंच सकते हैं ,सब मिलेंगा |अपने पैर फैलाईये ,चादर खुद ब खुद फैलेंगी | ज्यादा की अपेक्षा लालच नही हैं ,यह दुनिया को अपने मुट्ठी में भर लेने कि आकांक्षा हैं ,चुनौती स्वीकार करे ,ज्यादा की अपेक्षा कीजिये |जिंदगी आसान हैं |
दूसरों कों खुशी देखकर हमे भी अपनी खुशियों कों बढ़ाना हैं |दूसरों के दुःख देखकर हमे अपना दुःख कम करना हैं |जीवन परिवर्तन शील हैं |जो कल था ,आज नही हैं |जो आज हैं ,कल नही रहेंगा |अपना कर्म ही समस्त सुखो का आधार हैं |अपने कर्तव्य के  पालन द्वारा ही हम शांत -चित्त बने रह सकेंगे |




सपने संजोये …क्यूंकि …..
सपने हर हाल में पुरे होंगे हीं…संकल्प कि नीव पर जो टिके हैं,मेहनत के विश्वास और असीम हिम्मत पर आधारित हैं जो  ………..अनंत तक पहुचने का प्रयास कीजिये |केवल एक बच्चा ही बेहिचक और अनजाने में कुछ भी कर सकता हैं,बच्चे जैसी डेयरिंग कीजिये  |


आप असीम हैं ,अनंत हैं |इस ब्रम्हांड की सीमा से भी बड़ी आपकी सीमा हैं ,झूठे विश्वास लिमिटेसंस कों तोडिये |आजाद होईये |

जीवन की कठोर सच्चाईयों में भी कोमलता देखें …अपने हृदय की आवाज सुनिए …आँखों को वह सब देखने दिया जाना चाहिए जो हृदय महसूस करता हैं |

आगे बढते रहना हैं, चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यूँ न हों ….चाहे जितने व्यवधान आये ,चाहे जितने संकट आये ……संघर्ष ही हमे मजबूत बनाएंगा…..रचना करें ऐसी परिस्थितियो का जो हौंसला दे किसी भी विषमता में …



बचपन में चंद पंक्तियाँ सुनी थी -
समर में घाव खाता हैं ,
उसी का मान होता हैं .
छिपी उस वेदना में …
अमर वरदान होता हैं |
सृजन में चोट खाता हैं
छेनी और हथौरी से
व्ही पाषाण कहीं मंदिर में ..
भगवान होता हैं ..

खुद पर विश्वास रखना हैं क्यूंकि ……………..

खुद पर विश्वास रखना हैं क्यूंकि ……………..

जीवन में हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती हैं  | हैं  न |
मुहम्मद अली बोक्सर के बारे में मैंने सुना हैं की ,वे अपने हर मुक्के के साथ बोलते थे "I'M GETTING BETTER AND BETTER".
कोई कार्य असम्भव {IMPOSSIBLE}सिर्फ इसलिए होता हैं की इससे पहले कोई उसपर कोशिश हीं नही किया होता |आप और हम... आईये ...हर असंभव कों संभव बनाये ,नई परिभाषाये गठित करें |



हर    विजेता ,   सिर्फ   जीत    पर   ध्यान रखते हैं ,और जिस चीज पर हम ध्यान रखते हैं उर्जा उसी की दिशा में बहती हैं |
मैं पहले ही लिख चूका हूँ ,और दुहरा रहा हूँ की  हम मानव लोग ,आत्मिक जीव हैं ,जो एक महान उद्देश्य के लिए इस पृथ्वी पर आये हुए  हैं|

जब आप योग्यता रखते हैं तो सफलता के शिखर को क्यूँ नही छूते ….क्या रोक रहा हैं? भीतर से….. ,पकड़िये और निकाल फेकियें …..क्यूंकि हम सभी सिर्फ सफल होने के लिए ही पैदा हुए हैं |उड़ान भरें |


किसी शायर ने ठीक ही कहा हैं-
  •     वही है जिन्दा ,जिसकी आस जिन्दा है,
                 वही है जिन्दा ,जिसकी प्यास जिन्दा है,
                 श्वास लेने का नाम ही जिंदगी नहीं,
                 जिन्दा वही है ,जिसका 'विश्वास'जिन्दा है!






मुस्कुराएं ! दुनियां में इसकी बराबरी करने वाली कोई चीज हैं क्या ????आओ खुश रहें ..जो भी करें उसमे खुशी खोजिये .आनंद खोजिये |
जरा महसूस कीजिये ..आपने बचपन कों,
बचपन के आनंद को|
एक कहावत  हैं "Happiness is more a state of health than of wealth"
प्रेम कोई सीमा नही बांधता ,कोई बंधन नही मानता ,जाति धर्म सम्प्रदाय …इंसान जानवर जैसी हर सीमा से मुक्त होता हैं …इसके साथ कोई शर्ते नही जुड़ी होती हैं |
 वैसे ..राम चरित मानस में तुलसी जी कहते हैं - "शुद्ध प्रेम ” ( अनन्य ) से मनुष्य के ऊपर जैसी कृपा ईश्वर की होती है , वैसी कृपा किसी भी प्रकार के योग ,जप , दान , तपस्या , विभिन्न प्रकार के यज्न /यग्य , व्रत और नियम करने से नहीं होती . ”

प्रेम-मय हों जाए-



जीवन में एक क्षण भी खुशियों का न जाने पाए …कल किसको जीना हैं भला ..बस आज आओ उत्सव मनाये …


कभी हार नही मानना हैं …….हम सब हैं विजेता ……SUCCESS का SOFTWARE सबके भीतर इंस्टाल हैं ,बस इस्तेमाल करना हैं ……




सभी का अभिवादन !

जय हिंद ,वन्देमातरम !
-डॉ अजय की प्रस्तुति |
{कुछ  चित्र -गूगल/फेसबुक  से साभार}

27 October 2012

रहस्य:व्यक्तिगत कायाकल्प का भाग –२

रहस्य:व्यक्तिगत कायाकल्प का भाग –२


बुल्गारिया के मनोवैज्ञानिक लोजनोव दुनिया भर से मिलने वाले super learning के उदाहरणों से हैरान थे,उन्होंने देखा की मुस्लिम विश्वविद्यालायो में प्रवेश से पहले मुस्लिम छात्रों को पूरा कुरान याद हों जाता था ,भारतीय गुरुकुलो के छात्रों को पूरी गीता और रामायण याद हों जाती थी |
भारत के कई धर्मों/पंथो में लिखित धर्मग्रन्थ या सामग्री नही हैं |इन पंथो के गुरू और अनुनायी अपना ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से पहुचाते रहें हैं ,
लोजनोव ने शोध किया की २ मस्तिष्क होते हैं दायां और बायां |
दांया मस्तिष्क तार्किक ,रेखीय ,व्यावहारिक हैं यह तर्कशक्ति ,विश्लेषण और गणनाकरता हैं ,यह तस्वीरों और कहानियो के संदर्भ में सोचता हैं |यह सम्पूर्णतावादी हैं और किसी विचार या स्थिति के सभी पहलुओ से एक साथ संपर्क रखता हैं |बांया मस्तिष्क तार्किक जानकारी से प्रेरित होता हैं |दांया मस्तिष्क शिथिल अवस्था में जानकारियों को ज्यादा अच्छी तरह से प्रोसेस करता हैं |लोजानोव ने पाया की जब दोनों मस्तिष्क साथ कार्य करतें हैं तो सीखने की गती तेज हों जाती हैं | लोजानोव ने ब्रेन वेव के विभिन्न स्तरों पर शोध किया ,उन्होंने जागृत अवस्था की बीटा वेव्स स्तर {१४ वेव /सेकंड से ज्यादा ],एल्फा अवस्था [८-१३वेव्स/सेकंड]और थीटा अवस्था [५से ७वेव्स/सेकंड ]पर शोध किया |उन्होंने पाया की अल्फ़ा अवस्था सीखने के लिए सबसे ज्यादा आदर्श अवस्था हैं |उन्होंने अपनी खोजो को मिलाकर एक ऐसी तकनीक इजाद की जिससे किसी भी प्रकार की जानकारी सीखी और संगृहीत की जा सकतीथी |इसे आज accelerated learning कहा जाता हैं |

लोजानोव की accelerated learning तकनीक :-

लोजानोव ने पाया की अगर आप किसी व्यक्ति को शिथिलता की गहरी अवस्था यानि अल्फ़ा अवस्था में रखकर नई जानकारी देतें हैं और पृष्ठभूमि में धीमा शास्त्रीय संगीत बज रहां हों ,तो दाया और बांया मस्तिष्क सामंजस्य में आ जातें हैं और सीखने की गति तेज हों जाती हैं |
उन्होंने अपने प्रयोंगो के दौरान व्ययस्को को क्लासो में गहरी शिथिलता में बैठाया ,जिनकी आँखे बंद थी और कमरे में मंद मंद संगीत बज रहा था उसके बाद विदेशी भाषाओ की सूचियां पढ़ी और उन्हें अलग अलग तरीको से दुहराया गया |फिर विद्यार्थियो को जागृत अवस्था में लाकर उनकी स्मृति की जाँच की गयी ,विद्यार्थियो को सीखी गयी ९७% बातें याद थी |लोजानोव ने शिथिलता के उन्नत तरीको का इस्तेमाल कर १९६९ में एक दिन में १००० शब्द छात्रों को याद कराएँ ,१९७४ में विद्यार्थियो की एक खास कक्षा में लोजानोव ने एक दिन में १८०० शब्द याद कराए |बाद में १९७९ में ३००० शब्द एक दिन में याद कराने में वे सफल रहें |उन्होंने सिद्धह किया की तीव्र गती से तथ्य ,जानकारी नये व्यवहार ,नयी मानसिक आदतें सीखना संभव हैं |दोस्तों भारत में भी कुछ ऐसे गुरू हैं जिनको मैं जानता हूँ जों की ऐसे शांत एल्फा मूजिक को बेचते हैं [विदेशो की तुलना में बहुत अल्प दरों पर]जिनसे हम लोजनोव के प्रयोग से भी ज्यादा लाभ ले सकतें हैं ,मैंने भी यह खुद करके देखा हैं |

हेटरोजेनिक कंडीशनिंग :-

यह आपके बजाय किसी दूसरे द्वारा की गयी प्रोग्राम्मिंग या कंडिशनिंग हैं |ये वे चीजे हैं ,जों माता-पिता ,रिश्तेदारों,टीचर्स और कैन अन्य सम्मानित लोगों ने आपको बतायीं हैं |
जब भी आप दूसरों की कोई बात सुनते हैं ,खासकर उस व्यक्ति से जिसे आप पसंद करते हों …तो यह आपके अवचेतन मन को प्रभावित करता हैं |इसलिए आपको कभी भी किसी को ऐसी बात कहने की इजाजत नही देनी चाहिये ,जिसे आप सचमुच ना देखना चाहते हों|मान लीजिए कोईकह भी दिया तो आप खुद को कम से कम २ – सकारात्मक आत्म सुझाव दीजिए |आप मेरे[अजय यादव]के ब्लॉग को तब तक पढ़ चुके होंगे | आप एक बहुत ही सशक्त सिद्धांत के साथ काम कर रहें हैं और आपको इसका इस्तेमाल सकारात्मक तथा सृजनात्मक तरीके से करना चाहिये |
टेप के म्यूजिकल संकल्प :-

१] सब्लिमिनल टेप्स सुनना :-बाजार में ऐसे बहुत सारें सब्लिमिनल टेप्स हैं ..पर ज्यादातर बकवास हैं |भारत में माईंड पावर रिसर्च इंस्टिट्यूट और डॉ जितेन्द्र अधिया का एल्फा मूजिक का टेप्स हैं |माईंड पावर रिसर्च इंस्टिट्यूट के टेप्स मैंने अब तक सबसे उम्दा लाजवाब पाया हैं |
२]रिलेक्सेशन टेप्स :-संगीतमय संकल्प वाले टेप्स प्रयास हिन् और आसान हैं |अगर आप दिन भर में दो बार यानि सुबह शाम इनका अभ्यास करतें हैं तो आप ज्यादा सकारात्मक ,ज्यादा शांत ज्यादा रचनात्मक होंगे और अपनी भावनाओं पर ज्यादा नियंत्रण भी रख पायेंगे |आपकी कई छुटपुट बिमारियां भी खत्म होंगी |मैंने ऐसे भी लोंगो को देखा हैं ,जिन्होंने इन तकनीकों के इस्तेमाल से बड़ी बीमारियो को भी ठीक किया हैं |एक २० मिनट का रिलेक्सेशन टेप ४ घंटे की नींद के बराबर आराम देता हैं |भारत में ऐसे टेप्स आज उपलब्ध हैं हिन्दी भाषा में ट्रेनर हिमानी { http://www.clickabooks.com/index.php/relaxation-hindi-audio-cd-700.html} या डॉ जितेन्द्र अधिया के टेप्स उपलब्ध हैं { http://www.clickabooks.com/index.php/all-time-gujarai-cds-vcds-dvds/relaxation-hindi-audio-cd.html} डॉ अधिया के टेप्स शक्तिशाली हैं |इसी प्रकार का टेप माईंड पावर इंस्टिट्यूट द्वरा निर्मित जीनियस सीडी हैं |ये वास्तव में परम शक्तिशाली हैं |दोस्तों इन सबके अलावा सर्वोत्तम यह होंगा की अपना टेप हम खुद तैयार करें |उसमे अपना लक्ष्य खुद रिकार्ड करे जबकि पृष्ठभूमि में दूसरे टेप में आप अपने संकल्प को रिकार्ड कर लें जबकि पृष्ठभूमि में शांत संगीत बज रहा हों |घर पर बना कैसेट भी आपके लक्ष्यों को हांसिल करने की प्रोग्रम्मिंग में बहुत असरदार हों सकता हैं |

फटाफट संकल्प तकनीक :-

इस तकनीक का इस्तेमाल किसी महत्वपूर्ण घटना से पहले कर सकते हैं जैसे सेल्स काल या बॉस के साथ मीटिंग या मेडिकल सेमिनार्स |मानसिक प्रोग्रम्मिंग की इस विधि का इस्तेमाल प्रोफेशनल वक्ता ,अभिनेता,कलाकार और बड़े बिजिनेस मैंन करते हैं |इससे वे आने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए खुद को तैयार कर लेते हैं ,जब उनके सर्वश्रेष्ठ रूप में रहना उनके लिए महत्वपूर्ण होता हैं |
फटाफट संकल्प तकनीक में मानसिक तैयारी के पहले बताये गए कदमो की टेलिस्कोपिंग शामिल हैं |यह एक तरह से मानसिक वार्मअप हैं |आप इसे ३० सेकंड से भी कम समय में कर सकतें हैं |आप अपनी कार ,लिफ्ट या वाशरूम में भी इस तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं |
इस तकनीक का इस्तेमाल काफी आसान हैं आप अकेले होतें हैं ,अपनी आंखे बन करते हैं ,आदर्श परिणाम का संकल्प करते हैं ,उसकी मानसिक तस्वीर देखते हैं ,उसमे भावना भरते हैं और उसे मुक्त कर देते हैं |देखे और महसूस करें की वह घटना सफलता पूर्वक हों गया हैं |फिर उस मीटिंग या कार्यक्रम में शांतिपूर्वक और आत्मविश्वास के साथ जाईये |
अगर आपको कुछ दिनों में कोई महत्वपूर्ण प्रस्तुति देनी हों या इंटरव्यू देना हों तो उस बारे में सोचते समय आपको हर बार इस तकनीक का प्रयोग करना चाहिये |जब आप घटना वाले दिन और समय के ज्यादा करीब पहुँचते हैं तो आपको अपना आत्मविश्वास बढ़ता हुआ प्रतीत होंगा |और वास्तविक घटना के समय आप सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मानसिक रूप से तैयार हों चुन्केंगे |

ऑटोजेनिक कंडीशनिंग विधि या रिलेक्सेशन और विजुलायिजेसन :-

{विजुलायिजेसन के लिए एक मार्गदर्शक आडियो पेश हैं -

http://www.ziddu.com/download/20636671/11.mp3.html}

इस अभ्यास में आप संकल्प लेने ,मानसिक तस्वीर देखने ,भावना भरने और तस्वीर को मुक्त करने से पहले अपने पूरे शरीर को रिलेक्स करते हैं |
आरामदेह कुर्सी पर या विस्तर पर लेट जाईये ,अपने पूरे शरीर को रिलेक्स कीजिये …आँखे बंद कीजिये अपने शरीर के भागो से बातचीत किजीयें ..सब अंगों को रिलेक्स किजीयें
या
कोई शांत जगह पसंद कर लें जहां आपको १५-२० मिनट तक कोई विक्षेप ना हों |बिलकुल आरामदेय स्थिति में बैठें |
चेहरा सीधा करके ,अपनी नजरो को दूर के किसी काल्पनिक विन्दु पर स्थिर करें और विना पलक झपकाएं उस विन्दु को देखतें रहें |
पलके भारी होते ही आँखे बंद कर लें और अपना ध्यान साँसों पर रखें |सांस को देखिये की कैसे अंदर आती हैं ..बाहर निकलती हैं ,साँसों का निरीक्षण कीजिये |फिर १० से एक तक की गिनती करते जाईये |आपका शरीर धीरे धीरे शिथिल और शांत होता जायेंगा |१ गिनती के समय आप एल्फा अवस्था में होंगे …[ब्रेन वेव्स-७से १३]आपकी ब्रेन वेव्स चेतन और अवचेतन मस्तिष्क को समान स्तर पर रखती हैं इस समय आप खुद को जों भी सुझाव देंगे वह हर हाल में आपकी दुनिया में प्रकट होंगा ही |आपको जों चीज पाना हैं …उसकी आप मानसिक मूवी देखिये –मानसिक मूवी मात्र देखने के लिए नही हैं इसमें आपकी भागीदारी भी होनी चाहिये ,गतिमान चित्र होने चाहिये ,घटनाये वर्तमान काल की हों ,रंग /आकार की पहचान होनी चाहिये |इसमें स्थान [घर /आफिस /क्लिनिक]का उलेख कीजिये,समय का उल्लेख कीजिये[सुबह /शाम ],कौन कौन से पात्र हों ,सभी पात्र खुश दिखने चाहिये |लोगों की आवाजे ,वस्तुओ की आवाजे ,ट्रैफिक की आवाजे …गंध ,स्वाद का अनुभव …स्पर्श का अनुभव सब आपकी मानसिक मूवी की स्क्रिप्ट में शामिल होना चाहिये |बेहतर होंगा की आप अपनी मानसिक मूवी की स्क्रिप्ट पहले ही लिख लीजिए |
इस तकनीक का इस्तेमाल आप अपने संबंधो ,कार्यस्थल ,वित्तीय जीवन,सेहतअन्य गतिविधियों में डरो से उबरने में और आत्मविश्वास बढ़ाने में कर सकते हैं |यह किसी घटना का मानसिक रिहर्शल हैं |ओलम्पिक के स्वर्ण विजेता हों या मेरे जैसे छात्र लगभग सभी जागरूक लोग इस तकniक का इस्तेमाल कर अपने जीवन में क्रांति ला चूंके हैं |
http://www.divshare.com/download/23661574-0d6
[विस्तर पर लेट जाईये ,जहां कोई अआप्को डिस्टर्ब ना करे फिर इस आडियो को सुनिए ,या किसी आराम कुर्सी पर बैठकर ,जहां रीढ़ कि हड्डी सीधी रहे ….खुद को रिलैक्स कर सकते हैं,आप सदैव प्रसन्न रहे ,शुभकामनाओं सहित ……!जब भी दिक्कत महसूस कीजिये आडियो तुरन्त निकाल दीजिए ,मत सुनिए और हाँ हेडफोन से और अच्छा महसूस करेंगे }…–drakyadav@rediffmail.com

24 September 2012

"power of your subconcious mind" अवचेतन मन की शक्तियाँ


हमारा अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली हैं |यह हमारे मन का ९०% भाग हैं किन्तु यह उस गाड़ी की भाति कार्य करता हैं जिसका ड्राईवर चेतन मन [१०%]हैं |आईये आज हम अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में बात करतें हैं |

१]Riflex Action:-

मित्रों !अवचेतन मन की यह शक्ति हमे आपातकालीन स्थितियों से हमे बचाती हैं ,जैसे अग्नि पर पैर पड़ते ही अचानक हटा लेते हैं ,सांप को देखकर उलटे ही भाग खड़े होतें हैं |सीडी से गिरते गिरते संभल जातें हैं |पहले हम साईकिल सीखते हैं तो धीरे धीरे किन्तु जब हम पूरी तरह सीख जातें हैं तो लोगों से बात करते हुए भी सयिक्लिंग करते हैं |

२]टेलीपैथी :-

 ईश्वर ने हमारे मन मस्तिष्क में एक TRANSMITTER और एक RECIEVER फिट कर रखा हैं जों इतना शक्तिशाली हैं की पूरे ब्रम्हाण्ड में इतनी शक्तिशाली मशीन किसी इंसान ने नही बनायीं हैं |चूँकि हम इस मशीन को चलाना नही जानते इसलिए इसकी शक्तियों से अनजान हैं |

३]अंतरात्मा की आवाज़ [रडार –CONSCIENCENESS]:-

दोस्तों जब भी हम कोई गलत कार्य करतें हैं तो अंदर से आवाज़ आती हैं “ये गलत हैं”…भगवान ने इंसान को गलत कार्य से रोकने के लिए उसके भीतर यह रडार सेट कर रखा हैं जों अवचेतन मन के नियंत्रण में हैं |

४]यादशक्ति :-MEMORY के ३ स्टेप होते हैं :-

१]Ragister 2]Storage 3]Recalling
दोस्तों Ragister और Recalling चेतन मन की विषय वस्तु हैं |जबकि Storage अवचेतन मन से जुड़ा होता हैं |किन्तु यदि Storage सही से हुवा हैं तो रिकाल्लिंग आसान हों जाती हैं |

५]भावना का गुणांक [EMOTIONAL Quotient]:- दोस्तों भावना २ प्रकार की होती हैं –

१]सकारात्मक भावना :-प्रेम,दया ,क्षमा ,कृतज्ञता ,प्रफुल्लता ,Faith,Tolerance,करुणा |
२]नकारात्मक भावना :-डर,क्रोध,घृणा ,ईर्ष्या ,sadism,चिंता,निर्दयता आदि |
                                                
उच्च IQ ही सफलता का मानक नही हैं बल्कि EQव्यक्ति को सफल बनाता हैं |उच्च शिक्षित व्यक्ति कभी कभार कम EQ के कारण हमारे ORGANISATION को बड़ी हानि पहुंचाता हैं |मर्लिन मुनरो ,अभिनेत्री दिव्या भारती ,हिटलर ,गुरुदत्त सब बहुत उच्च IQ के थे पर इनमे EQ उच्च नही था |इन सबने आत्महत्या की थी|EQ बढ़ाने के लिए सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाना होंगा |

6]Treasure of Knowledge[त्रिकाल ज्ञान]:-

हमारे अवचेतन मन से बहुत ,भविष्य ,वर्तमान कुछ भी नही छुपा हैं |यह त्रिकालदर्शी हैं ,यह भविष्य की घटनाओं को भांप लेता हैं और कभी कभार हमे चेताता भी हैं |संजय ने महाभारत की भविष्यवाणी इसी आधार पर की |इसी के आधार पर NOSTRADOMUS इतना प्रसिद्द हुआ |

७]प्रज्ञा/समझदारी /WISDOM:-

सही समय पर सही निर्णय लेना ही अवचेतन मन की विशेषता हैं |जब भी आप किसी गफलत में पढ़ने वाले हों निर्णय आप अवचेतन मन पर छोड़ दें यह आपके विश्वासों के अनुरूप सबसे उत्तम रिजल्ट लाएंगा|

८]आयोजन कर [PLANNING]:-

ज्यादातर प्लानिंग हम चेतन मन से करते हैं ..इसको ह्यूमन प्लानिंग कहते हैं ,जिसमे हम अक्सर फेल हों जाते हैं तब हम कहते हैं “man proposes but god disproposes”.भगवान का तो कुछ बिगाड़ नही सकते ,बिगाड़ सकते हैं तो सिर्फ अपना हीं|
किन्तु जब हम अर्धजग्रित मन से प्लानिंग करते हैं तो यह devine planning
होती हैं जों हर हाल में पूरा होती ही हैं |अक्सर मेरे लक्ष्य अर्धजग्रित मन द्वारा planned होते हैं |

9]अवसर खड़े करना [creats opportunity]:-

हमारा अर्द्ध जागृत मन हमारे लिए अवसर क्रियेट करता हैं |इलाहाबाद में मैं पढ़ा लिखा ,उस दौरान एक ऐसा समय आया था , जब मेरे पास पाकेट मनी तक नही थी,बाहर ना घूमने वा अंतर्मुखी स्वभाव के होने के कारण लोगों से पहचान तक नही थी |मैंने यह समस्या अवचेतन मन को सौंप दी |मुझे एक दिन प्रेरणा प्राप्त हुयी की मैं एक पुस्तक लिखूं ,पढ़ाई तकनीकों पर |मैंने लिखा परिणाम ये हुवा की वह पुस्तक हांथो हाथ बिकी |कालेजो से लेक्चर के लिए रिक्वेस्ट आने लगी |सैकड़ों छात्र मेरी क्लासेज में पढ़ने के लिए इस तरह से उतावले होते की जैसे मैं कोई बड़ी सेलेब्रटी{फिल्मस्टार} हूँ |मैंने अपनी खुद की कोचिंग बनायीं और खुद को इतना मजबूत बना लिया आर्थिक रूप से की आज मैं अपनी मेडिकल की फ़ीस खुद भर सकता हूँ |

१०]mental clock:-

दोस्तों हमारे अवचेतन मन के पास एक नैशर्गिक घड़ी हैं |जों हमे एक सही समय पर उठा देती हैं |मैं कभी अलार्म घड़ी सेट नही करता बल्कि अपने मन को कमांड दे देता हूँ की मुझे अमुक समय पर उठाना हैं मन विना देरी किये उठा देता हैं |

११]मानसिक कैलेंडर :-

मित्रों आपको जीवन में जों भी पाना हैं उसकी एक निर्धारित समय सीमा का उल्लेख जरुर किजीयें |तभी अवचेतन मन उस पर सही से कार्य कर पाएंगा |आपको कोई गोल किस वर्ष प्राप्त करना हैं ?कौन सी गाड़ी कब खरीदनी हैं ?सबका लिखित लेखा जोखा होना चाहिये ,यदि आप दुनिया की सबसे शक्तिशाली शक्ति को [अवचेतन मन ] को काम पर लगा रहें हों |…

१२]इच्छा-मृत्यु [control over death]:-

डॉ दीपक चोपड़ा ने एक पुस्तक लिखी हैं :”Ageless Body,Timeless Mind”जिसका सारंश यह हैं की अपनी मृत्यु हम खुद चुन सकतें हैं की कहाँ मरना हैं?कब मरना हैं ?किस स्थिति में मरना हैं ?..PLACE,MODE AND TIME….
दोस्तों ऐसे केस शायद आपने देखे होंगे जब डॉ ने रोगी को मरणासन्न स्थिति में घर भेज दिया हों और रोगी बच गया हों या डॉ ने कह दिया हों की अब तू मरने वाला हैं पर रोगी बच गया हों |डॉ भगवान नही हैं |ना ही हमारे अवचेतन मन से उसका मुकाबला हैं,kyunki ज्यादातर डॉ चेतन मन से इलाज करते हैं  |

१३]HEALING POWER:-

मैंने एक ऐसा व्यक्ति देखा हैं जों लगातार सोच सोच कर अपने शरीर में कंसर उत्पन्न कर लिया था और कैंसर भी इतना भयानक की टाटा हास्पिटल मुम्बई के डाक्टरों ने जवाब दे दिया था |बाद में उसको लुईस हे की “YOU CAN HEAL YOUR LIFE” बुक मिली ,पढ़कर वह पूरी प्रोसेज समझ गया और अपने एहसास और भावनाओं को बदला ,फिर दो महीने बाद कैंसर जड़ से खत्म ही हों गया ,डॉ तो हैरान ही रह गयें |दुनिया की सबसे शक्तिशाली हीलिंग पावर हमारे अवचेतन मन के पास हैं यह कोई बीमारी उत्पन्न भी कर सकता हैं तथा प्रोसेज को रिवर्स कर ठीक भी कर सकता हैं |

१४]स्वास्थ्य :-

जब भी आप से कोई पूछता हैं -:कैसे हों”?आप क्या कहते हों “FINE”..यह कहने का तात्पर्य हैं आप अपने अवचेतन मन को कह रहें हैं की सब ठीक हैं कुछ करने की जरूरत नही हैं |अवचेतन मन हमारे AUTONOMOUS NERVOUS SYSTEM पर पूरा कंट्रोल रखता हैं ,जों की हमारे शरीर में पाचन ,श्रावण,हारमोन पैदा कर, नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होता हैं जब भी हम चेतन मन के माध्यम से कोई भी निगेटिव कमांड अवचेतन मन को देते हैं तो बीमारी पैदा होतीं हैं |
आप कहिये जवाब में “BETTER AND BETTER”…यानी कल जितना अच्छा था आज उससे भी और ज्यादा अच्छा हूँ |

१५]CONTROL OVER PAIN :-

दोस्तों आपने विपशयना केन्द्र के बारे में सुना ही होंगा |इसके जों हेड हैं गोयनका जी ,उनको माईग्रेन की बीमारी थी |विपश्ना करने के बाद उनकी बीमारी पूरी तरह ठीक ही हों गयी |और फिर उन्होंने अपना उद्योग धंधा छोड़कर अपना पूरा जीवन इसी को दे दिया |विपश्यना यानि “मन की रिप्रोग्रम्मिंग” |

१६]क्रिएटिव थिंकिंग [CREATIVE THINKING]:-

Ordinary thinking:-चेतन मन से |
creative thinking:-अवचेतन मन से |
दोस्तों वाल्ट डिज्नी ,पंडित रविशंकर,लिनार्दो दा विन्ची आदि सभी ने क्रिएटिव थिंकिंग कर दुनिया को अनमोल रत्न दिया |लिनार्दो दा विन्ची को Wisest man of world  कहा जाता हैं |

१७]Control over every part of body:-

महान महर्षि योगी जिन्होंने श्री श्री रविशंकर और डॉ दीपक चोपड़ा को tm meditation सिखाया, जब खुद ध्यान में होतें थे तो हवा में उपर उठ जातें थे |इसको yogic flying कहतें हैं |हमारा अवचेतन मन परम शक्तिशाली हैं |इसका हमारे शरीर के हर भाग पर काबू होता हैं |

१८]सारे विश्व के उपर असर [influence over universe]

मित्र जब तानसेन ने दीपक राग’ गया तो आग भड़क उठी ,ताना रे रे ने राग मल्हार गाया तो बारिश होने लगी |सीता मईया के एक कमांड से धरती फट गयी और् सिर्फ राम नाम लिखने से पत्थर तैरने लगे !कौन सा विज्ञान यह सब की व्याख्या करता हैं |यह सब अवचेतन मन की शक्तिया हैं |
मेरे गुरू श्री श्री रविशंकर जब बंगलौर में अंतर्राष्ट्रीय आश्रम में होते हैं तब उनकी  ध्यान-साधना बादल आते हैं ,बरसते हैं |आप कभी भी आश्राम में आकर यह देख सकते हों |वहाँ के साप,विछुओ,हिंसक जानवरों तक में से हिंसा खत्म हों गयी हैं |वहाँ हमेशा हरियाली रहती हैं यह मेरे गुरू की अवचेतन मन की शक्तियों का एक छोटा नमूना मात्र हैं |

१९]अपार सर्जन शक्ति :-दोस्तों ताजमहल ,एफिल टावर ,रिलायंस ,आदि अपर सृजन शक्ति के उदाहरण हैं |हम सभी अवचेतन मन का इस्तेमाल कर अपनी मन पसंद श्रृष्टि निर्मित कर सकतें हैं |

२०]निजी भगवान :-

दोस्तों हर धर्म में भगवान से हम क्या चाहतें हैं –प्रेरणा,उर्जा ,मार्गदर्शन |यह सब अवचेतन मन हमे देता हैं इसलिए इसे मैं हरेक व्यक्ति का निजी भगवान कहता हूँ |

21]SQ[आध्यात्मिकता का अंक]:-

दोस्तों आपके अनुसार आध्यात्मिकता क्या हैं ?कमेन्ट के माध्यम से जरूर बतायियेंगा !
मेरे अनुसार मन ,वचन ,कर्म की एकरूपता ,जों औरो को खुश करें वही आध्यात्मिकता हैं |
मेरे हिसाब से आध्यात्मिकता क्या हैं ??
१]To do job with honesty
2]To repay a loan in time
3]to keep a promise
4]to maintain a value in business
SQ>EQ>IQ

२२]चुम्बकीय शक्ति [मैग्नेटिक पावर]:-

दोस्तों हम सभी एक चुम्बक हैं और अपने जीवन में हर उस चीज को खीच सकते हैं जों हमे पसंद हों |किन्तु इस मैग्नेट को हमे हमेशा चार्ज करते रहना होंगा |इसके लिए “शबरी तकनीक” अपनाना पड़ेगा |जैसे राम ..राम हमेशा शबरी करती गयी और राम को जाना ही पड़ा वैसे ही आपको जों चाहिये बस उसी के बारे मे सोचे ,करें |पैसा चाहिये तो पैसा पैसा पैसा …..पावर चाहिये तो पावर पावर …..अनथक अविरत करते रहे ..यह हर हाल में आपकी दुनिया में प्रकट होंगा |यह हर हाल में होंगा हीं|

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