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31 December 2013

इलाहाबादनामा {छठी क़िस्त}

                   इलाहाबादनामा

मेरे शहर के विद्वानों...{वर्ष का लेखा जोखा}

              "तुम जब पैदा हुए तो तुम रोये,जबकि पूरी दुनिया ने जश्न मनाया |अपना जीवन ऐसे जियो की,तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोये जबकि तुम जश्न मनाओ"उपयुक्त पंक्तिया एक सफ़ेद कागज पर लिखी हुयी मेरी खुबसुरत मोटरसाईकिल की हेड्लाइट पर फड़-फड़ कर उड़ रही थी, CMP डिग्री कालेज के सामने एम्.जी.मार्ग पर मैं अपनी 350CC की मोटरसाईकिल को गियर में डालने ही वाला था |मेरा हाथ इग्निशन तक गया और इंजन को खामोश होना पड़ा ,क्यूंकि इन लाईनों का मतलब खोजने मेरी आँखे कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट द्वारा निर्मित ,उसी मार्ग पर स्थित इंटर और डिग्री कालेजो में अतीत के कुछ पन्ने पलटने लग चुकी थी |
      एशिया का सबसे बड़ा शैक्षिक ट्रस्ट कायस्थ पाठशाला {के पी.}की स्थापना 1872 ईश्वी में मुंशी काली प्रसाद कुलभाष्कार ने की थी |29249 सदस्य और 8500 महिला सदस्य वाले के.पी.ट्रस्ट ने बालिका शिक्षा में हमेशा महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं |संस्थापक काली प्रसाद जी ने अपना सब कुछ समाज ,देश के उत्थान के लिए अर्पित कर दिया,यहाँ तक की अपने दाह संस्कार तक के लिए कुछ भी नही रखा ,दान की इसी परम्परा को कायम रखते हुए ,शिक्षा की लौ को जलाये रखने के लिए अन्य कई दान-वीरो ने अपनी संपतियां दान की जिसके फलस्वरूप भारत के बिभिन्न भागो में इस ट्रस्ट के पास अकूत सम्पत्ति हैं |
  राजनैतिक{इलाहाबाद ने देश को छह प्रधानमन्त्री दियें हैं },धार्मिक,सांस्कृतिक,बौद्धिक नगरी प्रयाग ने देश को महान कलाकार और साहित्यकार दियें हैं |हिंदी साहित्य सम्मेलन,हिन्दुस्तानी अकेडमी,इलाहाबाद संग्रहालय,अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के इलाहाबाद केंद्र व् इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में अनेक कार्यक्रम होते ही रहते हैं |इस वर्ष यहाँ पाकिस्तानी लेखिका फहमीदा रियाज भी इलाहाबाद आई,और यहाँ के लोगो के मन  की खूबसूरती उन्हें बहुत भायी|गुफ्तगू के सम्पादक श्री इम्तियाज अहमद गाजी ने उर्दू की मिठास और गजल विधा को व्याकरण सहित आमजन मानस के दिलो में ही नही वल्कि विश्व भर के उर्दू प्रेमिओ तक पहुँचाया |हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर श्री के.के.यादव एवं कवियत्री ,गध विधा की लेखिका ब्लोगर श्रीमती आकांक्षा यादव को ब्लॉग साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए काठमांडू में 'परिकल्पना सम्मान' से नवाजा गया | वही इलाहाबाद में 'साहित्य का बैरोमीटर' कहें जाने वाले ए जी आफिस में सन्नाटा छाया रहा,इस बार यहाँ  हिंदी पखवाड़ा मनाया गया |
  इलाहाबाद के रचनाकारों ने इस वर्ष साहित्य जगत में सर्वोच्चता के  ताज पर अपनी दमदार दावेदारी दिखाई |प्रेमकथायुक्त ,लम्बीकहानियो वाली पुस्तक  "आप बहुत बहुत सुंदर हैं"एवं लघुकथा संकलन"एक टुकड़ा रौशनी" काफी सराही गयी ,इन पुस्तको के लेखक डॉ कीर्ति कुमार जी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पी जी कालेज में दर्शन शास्त्र के विभागाध्यक्ष हैं|
      इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्नातक दृतीय वर्ष की खूबसूरत छात्रा 'लीमा धर' ने तो अपनी रचनात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाया ही ,मुख्यमंत्री जी भी उनकी लेखनी के प्रशंसक निकले ,'द गर्ल्स हू किस्ड द स्नेक'...'टिल वी मीट अगेन'....'माम एंड आई लव ए टेरेरिस्ट' और सबसे लेटेस्ट उपन्यास 'यू टच्ड माई हर्ट'....सचमुच लीमा तुमने तो इलाहाबाद वालो का हर्ट टच कर लिया |तुम्हारा हिंदी कविताओं का संकलन 'कुछ लफ्ज नकाब में' प्रकाशित हो चुका हैं |
      श्रीमती यासमीन सुल्ताना ,वरिष्ठ साहित्यकार हैं ,१९७२ से लेखन में सक्रीय हैं ,कविता ,संस्मरण,साक्षात्कार ,नाटक,समीक्षा,आलोचना विज्ञान आदि विषयों पर दो दर्जन से भी अधिक पुस्तको की लेखिका हैं |आपने जापान विश्वविद्यालय में ५ साल तक हिंदी भी पढाया हैं |उनकी उर्दू जापानी पत्रिका 'साकूरा की बयारे' मन भायी ,उन्हें इस वर्ष का "विश्व हिंदी सेवा सम्मान २०१३" प्रदान किया गया हैं |वर्तमान में वें के के विरला फाउनडेशन में सरस्वती पुरस्कार चयन परिषद और चयन समिति की सदस्य होने के साथ साथ 'अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन'की महासचिव भी हैं |
    इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ही प्रो.राजेन्द्र कुमार जी की साहित्यिक गतिविधियों के लिए इस वर्ष का 'गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान'...'मीरा स्मृति सम्मान'...साहित्य शिरोमणि सम्मान-२०१३... से नवाजा गया |
     समाज में महिलाओं की स्थिति पर पेंटिंग्स प्रदर्शनी लगाने वाली डॉ जूही शुक्ला प्रयाग विद्यापीठ डिग्री कालेज की शिक्षिका हैं ,उनकी पुस्तक 'जीवन मूल्य और कला'  सराहनीय रही |उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी सस्थान का 'विद्यानिवास मिश्र संस्कृत एवार्ड' प्रदान किया गया |
 पद्मश्री शम्सुर्रहमान फारुकी जी को 'मीरा स्मृति सम्मान २०१३'.कवि  श्लेष गौतम जी को उनकी काव्य-संग्रह"चाँद सुलगता हैं "के लिए 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' दिया गया |आधुनिक कविता की कवियत्री श्रीमती अनीता वर्मा को 'केदारनाथ सम्मान२०१३ 'से नवाजा गया |डॉ.कृष्णा मुखर्जी को विज्ञान भूषण तो...तश्ना कानपुरी जी को 'चेतना श्री पुरस्कार' से सम्मानित किया गया |
     इस वर्ष हिंदी साहित्य के कई नए सितारे चमके तो कई सितारे हमारे जद से दूर भी हो गये |कहानीकार शिवकुटी लाल वर्मा ,प्रो.रघुवंश,श्री ओम प्रसाद बाल्मीकि और विरहा सम्राट हैदर अली 'जुगनू' को प्रयाग ने खोया|आप सब को हम विनम्र श्रृद्धांजलि अर्पित करते हैं | "इलाहाबाद...जिंदाबाद"!
-अजय यादव की कलम से

24 December 2013

इलाहाबादनामा {पांचवी क़िस्त}




              पिछले पोस्ट में आप उस चौराहे पर पहुंचे थे जहाँ से झूंसी,संगम ,नैनी,और बैरहना की ओर मार्ग जाता हैं |आईये आपको नये यमुना ब्रिज की दिशा  से होते हुए औद्योगिक क्षेत्र नैनी ले चलते हैं |नया यमुना पुल परेड ग्राउंड के ठीक बगल में ,कीडगंज से लगा  हुआ बना हैं ,उसके नीचे इलाहाबाद डिग्री कालेज एवं सरस्वती घाट एवं पार्क तथा बोट क्लब हैं |सायंकाल आप नये पुल और सरस्वती घाट पर तफरी करने आ सकते हैं |पंक्तिबद्ध रौशनी करते लैम्प ,यमुना के शांत..धीर गम्भीर दामन  को अनगिनत झिलमिल सितारों से भर देते हैं |

                                  शाम के पांच बजे से ,जब यमुना पुल की रोशनियाँ जल जाती हैं ,तो पुल पर एक अलग ही एहसास होता हैं ,ऐसा लगता हैं जैसे हम किसी और दुनिया में आ गयें हो |पुल गाड़ियो की आवाजाही के साथ ,झूले की तरह ऊपर नीचे होता रहता हैं,पुल के नीचे की सीढियां यमुना के खूबसूरत घाटो तक लें जाती हैं |रूहानियत और रूमानियत भरा यह माहौल प्रेमी जोड़ो ,चोट खाए आशिको,कवियों ,शायरों को बेहद लुभाता हैं –
                                   
'न आँखों से कभी ढलें आंसू ,न चेहरे पे ,शिकस्ती के निशां उभरे|
मैं इस   सलीके   से    रोया हूँ ,पूरी   उम्र   हँस  हँस कर ||
मित्रो !जीवन में हम जो चाहते हैं ,वह प्राप्त होने के बजाय हमे वही मिलता हैं,जो ...........हम होते हैं |जिंदगी से निराश कुछ लोग ,मकसद तलाशते घूमते दिख जायेंगे ,कुछ 'गुनाहों के देवता' भी मिलेंगे -
"न गरज किसी से,न वास्ता ,मुझे काम अपने ही काम से |
तेरे   जिक्र  से ,तेरी  फ़िक्र से ,तेरी  याद से ,तेरे  नाम  से "||
आत्मविश्वास खोकर ,जीवन संघर्ष से भागे कुछ लोग ,यहाँ से सुसाईड करते हुए देखे गये हैं, -
साँसों के सिलसिले को.. न दों,जिंदगी का नाम |
जीने के बावजूद भी.. ,कुछ लोग... मर गये हैं ||
         मनुष्य होने का मतलब ही हैं की हम अपूर्ण हैं,लेकिन हम अपनी अपूर्णता में भी पूर्ण हैं |यह अपूर्णता हमे एक मूल लक्ष्य प्रदान करती हैं –वापस अपने मूल आत्म-स्वरुप तक पहुँच कर अपने यथार्थ को प्राप्त करने का लक्ष्य |यदि मनुष्य के रूप में हममे कोई कमी ही नही होंगी तो किसी भी तरह का आत्मिक-आध्यात्मिक कार्य ही नही होंगा -
"हादसे भी दिमाग रखते हैं ,ढूंढ लेते हैं ,उदास लोगो कों|
जो उतर गयें हैं ,दरियां में ,हौंसले भी उन्ही का साथ देते हैं ||
                    नैनी पुल पार करते ही सड़क दो भागो में बट जाती हैं |एक भाग रीवा की तरफ तो दूसरा मिर्जापुर की तरफ जाता हैं |मिर्जापुर वाली रोड से  नैनी स्टेशन की तरफ भी एक रोड निकलती हैं  |मिर्जापुर रोड पर आगे बढने पर प्रसिद्ध और विशाल  'नैनी जेल' हैं,जहाँ कुख्यात समाजसेवी {लुच्चे फसादी नेता },आतंकवादी और 'वक्त की मार खाए निर्दोष' कैदी बंद होते हैं | इतिहास गवाह हैं ,जब जब छापा पड़ा हैं, जेल में हर प्रतिबंधित चीज जरूर मिली हैं |
             अरैल वही जगह हैं ,जहाँ से "भारत का मानक समय" लिया जाता हैं |अरैल सनातन धर्म और आध्यात्मिक शिक्षा की  एक एतिहासिक प्राचीन नगरी रही हैं ,यहाँ के भवनावशेष यहाँ की गाथा गाते हैं ,प्राचीन मन्दिर और आश्रमो की नगरी अरैल ने विश्व को "महर्षि योगी "{महर्षि महेश योगी }जैसा संत दिया ,जिन्होंने इलाहाबाद से ही {भौतिकी में परास्नातक }शिक्षा-दीक्षा ग्रहण किया और आध्यात्म की अनुभूति भी ली ,उनकी यह कर्म स्थली रही थी |उन्होंने श्री श्री रविशंकर और डॉ दीपक चोपड़ा जैसे महान हस्तियों को TM ध्यान सिखाया |संस्कृत की शिक्षा देने वाले एवं गुरुकुलो वाली परम्परा के अनेक विद्यालय आज भी अपनी खुशबू विखेर रहें हैं |इसी साईड में 'दिल्ली पब्लिक स्कूल'..ओमेक्स सिटी और प्रसिद्ध ब्लोगर एवं कवियत्री श्रीमती वसुंधरा पाण्डेय "वाशु जी" का आवास भी है
         मिर्जापुर रोड पर आगे बढ़ते रहने पर काटन मिल चौराहा और मेवालाल बगिया जैसे तिराहे ,चौराहे आते हैं जो रिहायसी कालोनियों की तरफ मुड़ते हैं ,इलाहाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा बसाया गया "एडीए कालोनी'नामक खूबसूरत कालोनी भी हैं |मेवालाल बगिया पर हर रोड पर कईयों "ए टी एम्"मशीने हैं |इन रिहायसी कालोनियों में लगभग हर तीसरी गली में एक इंटर कालेज हैं |जहाँ की शिक्षा व्यवस्था का जायजा "इस पोस्ट "से ले सकतें हैं |
           यहाँ के स्कूलों में 95% पाने के लिए ,पढ़ाई की नही गुरूजी की सेवा की जरूरत पड़ती हैं {बेथनी कान्वेंट,रणजीत पंडित इ.कालेज,केन्द्रीय विद्यालय अपवाद हैं,जहाँ बोर्ड परीक्षा बच्चे अपनी स्किल पर देते हैं}|यहाँ के 'गड्ढे वाले स्कूल' में तो कोई बच्चा सेकण्ड डिविजन आता ही नही हैं ,माफ़ कीजिये यह पढ़ाई नही ..नकल की महत्ता हैं|अगर आप इन स्कूलों की हालात जानतें हो और गर्ल्स चाईल्ड/छोटे बच्चो के अभिभावक हों तो एडमिशन कराने की बात सोचकर ही सिहर उठेंगे |यहाँ "४२वी वाहिनी PAC" भी हैं पर उसकी भूमिका  हुक्मरानों के इशारो  पर ,जरूरत पड़ने पर दीखती  हैं |
            मिर्जापुर रोड पर आगे बढ़ते रहने पर,मेवालाल बगिया से आगे फैक्ट्रियो शुरू होती हैं ..ट्रांसफार्मर बनाने वाली "एलेस्त्रंम",नुरानी तेल ,बैधनाथ {दवा वाले},त्रिवेणी ,BPCL,टेलीफोन सेट निर्माता आईटीआई ,रेमंड से  रेक्रोन और अब उससे रिलायंस बनी धागों की फैक्ट्री ,पार्ले जी की फैक्ट्री एवं सैकड़ो छोटे मोटे उद्योग हैं |यहाँ के औद्योगीकरण में श्री हेमवती नंदन बहुगुणा का बहुत बड़ा योगदान मन जाता हैं ,किन्तु दुर्भाग्य से उनके नाम पर यहाँ सिर्फ एक डिग्री कालेज हैं| यहाँ के आधिकांश फैक्ट्रिया मृतपाय हैं ,अभी पिछले दिनों ही एक ट्रांसफोर्मर बनाने वाली फैक्ट्री,वर्कर्स को VRS देकर गुजरात भाग गयी हैं |
‘अपनी   बर्बादी से कुछ इतना घबरातें हैं लोग
खुद न जला सकें तो ,औरो के बुझातें हैं चिराग’
             उसी रोड पर यूनाईटेड इंजीनियरिंग कालेज,मैनेजमेंट कालेज,फार्मा कालेज व् BIT जैसे शिक्षण संस्थान हैं |पुराने नैनी पुल के पास विशाल ग्लैमरस छवि वाला लगभग १०० वर्ष पुराना  “इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट”डीम्ड विश्वविद्यालय भी हैं |बहुत ही खूबसूरत इंस्टीट्यूट हैं |लैंडस्केप,शिक्षा और बहुमुखी प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं |यहाँ ज्ञान कहता हैं की ‘प्यार’ पागलपन हैं..प्यार कहता हैं की ‘ज्ञान’ कुछ चीजो की गणना भर हैं बस्स...-
‘इल्म  ने  मुझसे  कहा –ईश्क  हैं, दीवानापन ,
ईश्क ने मुझसे कहा –इल्म हैं ,तखमीन-ओ-जान’
{जान एलिया}
- अजय यादव
{drakyadav@rediffmail.com}
यह लेखक के अपने विचार हैं ,पाठको का सहमत होना जरुरी नही हैं |
*{नोट-शेरो-शायरीया मेरी नही हैं ,ये मुझे अच्छी लगी और डायरी के पन्नो में दर्ज होती गयी ,दुर्भाग्य से श्रोत/रचनाकार  ज्ञात नही हैं }

17 December 2013

इलाहाबादनामा – 4



                          इलाहाबादनामा – 4  
          "If you live to be a hundred,i want to live to be a hundred minus one day so i never have to live without you".....A.A.Milne साहब की चंद पंक्तियाँ मेरे मस्तिष्क में उस 'युवा ज़माने और समय से  बेखबर जोड़े' को देखकर आ गयी ,जो पुल के उस पार खुद में खोये बैठे थे |ईश्क,मुहब्बत ,प्रेम ,बेहद बेपनाह ख़ुशी हैं ,किसी से भी करो ,कहीं भी करो ,पर शर्त एक हैं -न चाह हों ,न आरजू हों,न मांग हो कोई ....बस गरज इत्ती सी  हैं की तुम्हारा इश्क खालिस {PURE}हो |
                  अंग्रेजो के जमाने के इस पुल पर से  पैदल,साईकिल और मोटर साईकिल वाले ही आ जा सकते हैं|दूर से मेडिकल कालेज की लडकियों का फैशनेबल मस्त-मौला टोला गुजर रहा था |उसमे से भरे-पुरे चेहरे पर बड़ी बड़ी नीली आँखे और उनपर कमानीदार भौंहे वाली लड़की ने ,जो मेडिकल कालेज में मेरी सीनियर थी अपने सहेली को देखकर आँखे मारी और मुझे अकेला देखकर कुल्हे पर हाथ रखते हुए ,मेरे पास आई और बोली-"नमस्ते कौन करेंगा ?मैं हडबडा गया "न न ..नमस्ते मैम्म !" ...सब खिलखिला कर  हँस पड़ी |सबसे बारी बारी से मेडिकल कालेज के दस्तूर के हिसाब से सलाम किया|सब आगे बढ़ गयी ...और मुझे मोहसिन का वो शेर याद आया -

"लोगो ने यह सोचकर ,हमें नजरअंदाज कर  दिया 'मोहसिन'|

यह गरीब लोग हैं ,'मुहब्बत'के सिवा और क्या दें सकेंगे ?" || 

        जिंदगी में क्या मिलना हैं ?क्या नही मिलना हैं ?यह हमी से तय  होता हैं  |जिस विषय में आशावान होते हैं ,उसके साकार होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं |जो सिचुएशन चाहिए हमे  ...जैसे सफलता ,आनंद,पैसे,मान-सम्मान हमे उसको महसूस करने की आदत डालनी ही  होगी,जैसे वह सबकुछ अभी हमारे पास हैं   |
     पुल के नीचे उन लोगो की चिताये जल रहीं थी ,जिन्होंने दुनिया को अपना सबकुछ देकर ,अपना समय पूरा करके यमलोक की नागरिकता ले ली थी |चट्ट-चट्ट की लकड़ी और शव जलने की आवाजे पुल के ऊपर तक आ रही थी |जिनको देखकर फिल्म "मुक्कदर का सिकन्दर" का वो गाना याद आ रहा था जिसमे निम्न पंक्तियाँ थी -

"जिंदगी तो बेवफा हैं ,एक दिन ठुकारएँगी |

मौत महबूबा हैं , अपने पास ले के जाएँगी ||"

       लग रहा था की औसतन हजार  महीने की {80-82 साल की } जिंदगी बहुत छोटी हैं ,जो कुछ भी करना हैं ,पाना हैं ...बस्स do it now !जरा सोचिये ,समय कितना तेज भाग रहा हैं ,दसियों बरस यूँ ही गुजर जाते हैं ,और हम लोगो को हवा तक नही लगती |फाफामऊ के श्मशान घाट पर ही "महराजिन बुआ "रहती थी ,जिनके विषय में कहा जाता हैं की वे दाह-संस्कार कराने वाली भारत की प्रथम महिला थी |"महराजिन बुआ"की पोती इलाहाबाद शहर की प्रसिद्ध गायिका ,रंगकर्मी और अभिनेत्री भी हैं |
       पुल के उस पार तेलियरगंज और प्रसिद्ध MNNIT कैम्पस हैं , तो दूसरी और फाफामऊ बाजार और रेलवे स्टेशन तथा शांतिपुरम हैं |गंगा-नदी से सटी हुयी एक झील हैं ,जिसे फाफामऊ झील कहते हैं ,कुछ समय पहले नगर निगम ने इसे शहर भर का कूड़ा निस्तारण केंद्र घोषित किया हैं |
      आईये शांतिपुरम से इलाहाबाद की और चलते हैं |शांतिपुरम में बस अड्डा हैं ,जहाँ से इलाहाबाद के कोने कोने तक जाने वाली बसें मिलती हैं |यही पर राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का मुख्यालय भी हैं |शांतिपुरम में इलाहाबाद का सरकारी विशाल होमिओपैथी हॉस्पिटल और मेडिकल कालेज भी हैं ,जहाँ पर असाध्य रोगों की सफल चिकित्सा होती हैं ..सर्जन की चाकू से बचे हर भूतपूर्व मरीज के लिए यह हॉस्पिटल ,किसी देवालय से कम नही हैं|
      शान्तिपुरम से आगे गंगा पुल की तरफ बढ़ते हुए सड़क दो भागो में बट जाती हैं ,एक भाग फाफामऊ बाजार की तरफ तो दूसरा भाग गंगा पुल की तरफ जाता हैं |रेलवे के पुल के ऊपर का पुल  पैदल ,साईकिल और मोटर साईकिल वालो के लिए ही हैं,जबकी दूसरे पुल से सभी गाड़िया निकलती हैं |तेलियरगंज साईड में बैठने के लिए ईटो के टीले भी बने हैं ,अफरा-तफरी भरी  जिंदगी में दो पल यहाँ सकूंन से काटा जा सकता हैं |
      फाफामऊ झील के पास सर्दियो में अमरूदो का बाजार लगता हैं |अमरुद ,गुणों की खान हैं |कब्ज को जड़ से दूर करने के साथ साथ ,हिमोग्लोबिन की मात्रा भी बढ़ाता हैं |तेलियरगंज की तरफ बढने पर सबसे पहले MNNIT का गेट मिलता हैं |यह कालेज इलाहाबाद को अभियांत्रिकी शिक्षा और अनुसन्धान की नई उच्च बुलन्दियो  की और ले जाता हैं |
             आगे यूनिवर्सिटी की तरफ बढने पर 'भारतीय सेना का क्षेत्र"ARMY AREA" मिलता हैं |इस क्षेत्र में हर जगह अनुशासन ,कर्तव्य और बहादुरी की अनुपम गाथाये हैं |एक बड़ा बोर्ड लगा हैं जिसमे लिखा हैं -'भारतीय सेना सबसे अच्छी दोस्त {रेगिस्तान में फटेहाल को पानी पिलाने की तस्वीर के साथ },और सबसे अच्छी दुश्मन {सियाचिन में दुश्मन की तरफ बंदूके किये सैनिक की छवि के साथ}|    'दिनकर जी'    की कुछ पंक्तिया सहसा स्मृति में आलोकित हो उठी  "त्याग,तप करुणा,क्षमा से भीगकर व्यक्ति का मन बली होता हैं ,मगर हिंसक पशु घेर लेते हैं कभी ,तो काम आता हैं बलिष्ठ शरीर हीं"|कैंट एरिया काफी बड़ा हैं ,इसके आलावा 'इलाहाबाद का किला' और 'COD नैनी' ,'बमरौली एयर बेस'भी सेना की सरपरस्ती में हैं |उत्तराखंड आपदा से लेकर पुरे देश भर में जब जब व्यवस्था फेल हुयी हैं ,ये जाबांज ईश्वरीय दूतो के रूप में अपने जान की परवाह तक न करते हुए ...लोगो की सुरक्षा को समर्पित रहें हैं |लोग कहते हैं ,जिंदगी इम्तेहान लेती हैं ,पर यहाँ तो इम्तेहानो ने जिंदगी दी हैं |
      आगे 'पूरब का आक्सफोर्ड'यानी इलाहाबाद विश्वविद्यालय हैं ,जिसके 'लोगो 'में लिखा हैं "क्वाट रामी तात"यानी एक वृक्ष हजार शाखाये.....| इलाहाबाद विश्विद्यालय ने देश को राजनीति,प्रशासन ,शिक्षा के क्षेत्र के बड़े बड़े सुरमा दिए हैं ,परम्परा आज भी कायम हैं ...पर पिछले दिनों एक विभागाध्यक्ष की पिटाई से गुरु-शिष्य परम्परा कलंकित हुयी हैं |इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ,सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजो में न केवल असभ्य विद्यार्थियो की ही बल्कि घमंडी  शिक्षको की भी  नई खेप हैं ,जो खुद को छात्रो का भाग्य -विधाता समझती हैं ,छात्रो को  बार बार ये शिक्षक समझाते हैं की तुम्हारे वायबा और इन्टरनल के मार्क्स मेरे हाथ में हैं }{अर्थात टैलेंट ,ज्ञान ,समझ गया तेल लेने ..}|गुरु जी 'फ़िराक' के जेहन में आप जैसे लोग आये होंगे तभी यह शेर फूटा होंगा -

'फ़रिश्ते    से         बेहतर         हैं ,       इंसान     बनना |

मगर     इसमें लगती      हैं ,   मेहनत            जियादा '||

   आर्मी एरिया,मोनिरबा आदि से आगे यूनिवर्सिटी की लाईब्रेरी से ठीक पहले गर्ल्स हॉस्टल हैं,बगल में प्रयाग रेलवे स्टेशन भी हैं  |अरे भईया पढ़ाकुओ की पूरी फ़ौज ही हैं इधर ,PCS-2011 का रिजल्ट ही देख लीजिये |इस सडक पर हमेशा खुसबू बिखरी रहती हैं -टैलेंट की खुसबू,स्टाईल/अदा  की खुसबू,मेहनत की खुसबू,सौन्दर्य और इंसानियत की खुसबू ...और खुसबू के दीवाने कुछ भौरें भी -

'हैं दिल में कोई राज ,कोई ख्वाब,कोई सूरत..

वो शख्स की जिसको मेरा होना भी नही हैं|

ए ईश्को मुहब्बत की रवायत भी अजब हैं ,

पाना भी उसे नही हैं,खोना भी उसे नही हैं | {शायरी-अज्ञात शायर  }

इसी रोड पर आगे आप बढ़ते रहेंगे तो पार्वती हॉस्पिटल के पास से होते हुए ,फोर्ड चौराहे पर पहुँच जायेंगे यहाँ से आप नैनी,संगम और झूसी जा सकते हैं |कुम्भ बस  लगने ही वाला हैं |कुम्भ नगरी करोड़ो पुत्रों के आगमन की प्रतीक्षा में श्रृंगाररत हैं |इलाहाबाद की हवाएँ हर आगन्तुक के कानो तक यह सन्देश ले जाती हैं -

नफरतें फना करों ,दिल से दरिया प्यार मुहब्बत का बहाओ यारों ,
कुछ जुगत करों,फासला आदमी   का,  आदमी से    मिटाओ  यारों ||
मंजिले  आसान  हो  हर   किसी की ,रौशनी दूर   दूर    तक  फैले ,
'दिया'   ऐसा   भी   कोई ,अपने  दिल    के  दरीचों में जलाओ यारों||



                    -अजय यादव
         {drakyadav@rediffmail.com}

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