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10 May 2020

सोशल मीडिया,दुरुपयोग और सतर्कता से जुड़े रिसेंट मुद्दे


सामाजिक नेटवर्किंग सेवा एक ऑनलाइन जरिया हैं जिससे लोगों के बीच सामाजिक नेटवर्किंग अथवा सामाजिक संबंधों को स्थापित किया जा सकता हैं |उदाहरण के लिए ऐसे व्यक्ति जिनकी रुचियां अथवा गतिविधियां समान होती हैं।  यह एक अपरंपरागत मीडिया (nontraditional media) है|
अभी जल्द ही BPRD; Bureau of police research and development ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए स्टेप टू स्टेप गाइड प्रकाशित किए Jiska uddeshy फेक news (येलो जर्नलिज़्म) aur video ko पहचानना Jo घृणा  aur communal hinsa ko failate Hain॥जिसका परिणाम दिल्ली दंगों के रूप में देखा जा सकता है |हाल में हुई पालघर मे साधुओ की हत्या की घटना इसका उदाहरण है, कुछ दिनों से फेक न्यूज़ चल रही है कि देश के गृहमंत्री गंभीर रूप से बीमार है जबकि वह स्वस्थ है |आर्थिक राजनीतिक लाभ लेने पहुँच को बढ़ाने के लिए अक्सर कुछलोग सनसनीखेज खबर फैलाते हैं ।
कई देशों ने सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए बेहतर नियंत्रण तंत्र विकसित किया है यदि कोई सोशल मीडिया या अन्य साधनों के जरिए झूठी खबर फैलाता है तो उसे तुरंत पकड़ लिया जाता है|
इस मामले में वहां का समाज भी अधिक जागरूक है वहां का समाज फर्जी खबर फैलाने वाले लोगों का बहिष्कार कर देता है और कुछ नजर से देखता जाता है लेकिन भारत में इस प्रकार की जागरूकता नहीं है, सोशल मीडिया के नियमन की मांग नहीं huyi है ,जब-जब इसका दुरुपयोग हुआ है  तभी इसकी मांग हुई है|
व्हाट्सएप और फेसबुक द्वारा फेक न्यूज़ के खिलाफ दिए जा रहे विज्ञापन इसी सतर्कता ka hissa हैं। साइबर विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि अपनी पोस्ट या अकाउंट पर आप जो कुछ शेयर करते हैं उसके लिए आप ही जिम्मेदार है
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय दिन में तीन बातो को ध्यान में रखाना चाहिए
1) किसी भी खबर को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले उसके स्रोत की पड़ताल जरूर कीजिए।

2) किसी भी समाचार इतिहास से जुड़ी जानकारी और गंभीर मसले से संबंधित सूचना को आगे बढ़ाते समय अन्य कई सारे प्रमाणित स्रोतों से भी मिला लेना चाहिए कोशिश
3)कीजिए कि किसी मुद्दे पर हर तरफ को विचारों को जानने की।
जांच के लिए वेबसाइटो को एसेस किया जा सकता है जैसे हिंदू डॉट कॉम ,पीआईबी gov.in, रिपोर्टर लैब डॉट कॉम और भी अन्य कई शामिल है।
सरकार द्वारा जारी मैनुअल में संप्रदायिक कोन की पहचान के लिए गाइडलाइन में एक फेक वीडियो का स्क्रीनशॉट लगाया है जिसमें मुसलमानों पर साफ प्लेटो और चमचों से बड़े पैमाने पर लोगों को वायरस स्थानांतरित करने का आरोप लगाया गया है।
एक क्लिप को भी लगाया गया है जहां उपद्रवियों ने नकली यूआरएल यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर के जरिए उन लोगों को गुमराह करने की कोशिश किया जो पीएम केयर फंड में दान देना चाहते थे Google reverse image search ka istemal करके  videos ke liye police aur Anya agency जांच kar sakte हैं।
भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत बताते हैं की बाहरी ताकतों का चुनाव में हस्तक्षेप चिंताजनक है इसके लिए सोशल मीडिया को हथियार बनाया गया है यह किसी देश को खत्म करने का एक नया तरीका है।
दुश्मन राष्ट्र सोचते हैं कि वर्तमान समय में लड़ाई करने का कोई मतलब नहीं है ।
उससे कहीं बेहतर है वहां असक्षम सरकार खड़ी कर दी जाए जिससे वह देश स्वयं खत्म हो जाएगा ।
सोशल मीडिया के जरिए मतदाता को प्रभावित किया जाता है ताकि वह किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष में मतदान करें ,यह काम विदेशी शक्तियां करती हैं जो सोशल मीडिया के माध्यम से देश और समाज को जाति धर्म संप्रदाय आदि के आधार पर बांटने की साजिश करती हैं।
जिससे आवाम एक असक्षम सरकार को चुनाव कर लेती है इसके बारे में ना तो जनता को जानकारी होती है नहीं राजनीतिज्ञों को उन्हें अंदाजा होता है कि यह कितना बड़ा खतरा है। भारत के चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल और नियमन के लिए अक्टूबर 2013 में दिशा निर्देश जारी किए थे इन नियमों के अनुसार सोशल मीडिया को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कानूनी परिभाषा के दायरे में लाया गया.
इन नियमों के बाद चुनाव के आखिरी 48 घंटों में पार्टियां प्रत्याशियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकता|

17 April 2020

कोरोना प्रसार एव बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव

पूरे विश्व में अपना भू राजनीतिक एवं व्यापारिक प्रभुत्व कायम करने के उद्देश्य 2013 ईस्वी में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने “वन बेल्ट वन रोड परियोजना” शुरू की जिसे 2016  से “बेल्ट एंड  रोड इनीशिएटिव" के नाम से जाना जाता है| यह एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका के बीच भूमि एवं समुद्री क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए चीन द्वारा संचालित परियोजनाओं का एक समूह है इसके अन्य नाम सिल्क रोड इकोनामिक बेल्ट  एव 21वीं सदी की   सामुद्रिक सिल्करोड है|

 बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव परियोजना से जुड़े देशों में कनेक्टिविटी  व लॉजिस्टिक्स की सुविधा बेहतर हुई, फलस्वरुप परियोजना के क्रियान्वयन से संबंधित कर्मचारियों के आवागमन से इटली ,पोलैंड, ग्रीस, ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल लक्जमबर्ग और स्विट्जरलैंड में भी  कोरोना वायरस का प्रसार द्रुतगति से हुआ |अमेरिका द्वारा आरोपित आर्थिक प्रतिबंधों से तंग ईरान ने भी 2019 में BRI परियोजना पर हस्ताक्षर किए ,ईरानी स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के कर्मचारियों यहां चीन से लौटने वाले व्यापारियों से कोरोना  ईरान में फैला| चीन के वुहान सीफूड मार्केट से दुर्लभ में पशु पक्षियों का मांस BRI परियोजना से जुड़े देशों में निर्यात हुआ जिससे अन्य देश बड़े स्तर पर प्रभावित हुए| भारत भले ही इस परियोजना का हिस्सा नहीं है पर प्रथम तीन कोरोना संक्रमित वुहान  से ही आए थे|
 कोरोना वायरस का प्रसार चीन की निर्माण और निवेश परियोजनाओं में देरी और व्यवधान उत्पन्न करने के साथ-साथ वर्षों के परिश्रम एवं  अरबो डालर की क्षति पहुंचा रहा है |यद्यपि विश्व की अन्य परियोजनाएं भी (CPEC,इंडोनेशिया में हाई स्पीड रेल योजना, श्रीलंका में बंदरगाह निर्माण योजना)  भी बाधित है |विभिन्न देश जो BRI पर प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं उनकी वजह से चीन आर्थिक रूप से तनाव में है जिन देशों को उसने ऋण जाल में फंसाया है उसने उनसे वह वसूली कर सकता है|
 यद्यपि भारत प्रत्यक्ष रूप से BRI परियोजना का हिस्सा नहीं है पर इस परियोजना के प्रतिबंध से भारत की सामरिक चिंताएं कम होंगी एवं भारत को घेरने की चीन की नीति को धक्का पहुंचेगा किंतु चिंता इस बात की भी है किस चीन द्वारा ऋण प्राप्त भारत के पड़ोसी (श्रीलंका ,पाकिस्तान ,बांग्लादेश ,नेपाल) ऋण चुकाने में विफल रहे तो चीन इन देशों को अपना उपनिवेश बना सकता है जो भारत के सामरिक एवं रणनीतिक हितों को चुनौती देगा|

 अतः संकट की इस घड़ी में विश्व की समस्त महा शक्तियों को मिलकर साधनों का अधिकतम प्रयास करके महामारी की हरसंभव रोकथाम करनी चाहिए| इनको अपने रिसर्च डब्ल्यूएचओ एवं अन्य देशों के साथ सहयोग करके वायरस के प्रसार रोकने का सामूहिक उपाय करना चाहिए|
-डॉ अजय यादव

16 April 2020

कोरोना बॉण्ड ||यूरोपीय संघ द्वारा घोषित किये गए आर्थिक उपाय ||

स आर्टिकल को पढ़के आप बता सकेंगे -
कोरोना बॉण्ड ,
यूरोपीय संघ द्वारा घोषित किये गए आर्थिक उपाय के प्रमुख प्रावधान ,
कोरोना बॉण्डस यूरोपीय संघ को किस प्रकार प्रभावित करेंगे
Bonds  ऐसे ऋण प्रपत्र होते हैं ,जिन्हें किसी देश की सरकार या कारपोरेट कंपनी बाजार (या निवेशकों को )मे बेचकर  मुद्रा ने इकट्ठा करती हैं |विश्व के देशों में लाकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप्प हैं, इससे अर्थव्यवस्था पर संकट है| लोगों के समक्ष खाद्य एवं रोजगार का संकट है, यूरोपीय देश अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए विभिन्न वैकल्पिक साधन अपना रहे हैं जिसमें कोरोना बॉण्ड  प्रमुख है ,यह यूरोपीय संघ के देशों का सामूहिक निर्णय प्रपत्र है, जिससे यूनियन के 9 देश सहमत हैं जबकि फ्रूगल फोर 4 देश जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड ,आस्ट्रिया असहमत है| 

 कोरोना वायरस  की चुनौतियों से निपटने के लिए यूरोपीय संघ ने 540 बिलियन यूरो का आर्थिक पैकेज घोषित करने के साथ-साथ आपातकालीन क्रेडिटलाइन खोलने,यूरोपीय निवेश बैंक की उधार क्षमता बढ़ाने और यूरोपीय आयोग की 100 बिलियन यूरो की बेरोजगारी बीमा योजना लागू करने का निर्णय लिया है ,साथ ही यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने अगले 9 महीने में 750 बिलियन यूरो की राशि के साथ परिसंपत्तिया  खरीद कार्यक्रम का विस्तार करने का निर्णय लिया है|
 कोरोना बोण्ड्स  यूरोपीय देशों को आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त करने की सुविधा के साथ-साथ अत्यधिक प्रभावित देशों को बिना राष्ट्रीय ऋण का विस्तार  किए आर्थिक सहायता भी प्रदान करेंगे इस एकता के द्वारा यूरोप के सभी देशों के मध्य संकट से निकलने का विश्वास मजबूत होगा|
 कोरोना बोण्ड्स  का नुकसान यह है कि सदस्य राष्ट्रों की आवश्यक रूप से  ऋण वहनीयता की शक्ति में बृद्धि नहीं करेगा ,साथ ही सामूहिक ऋण  प्रपत्र के कार्यान्वयन में बहुत समय लगना भी तत्कालिक आर्थिक सहायता की जरूरत वाले देशों के लिए उचित नहीं है, फ्रूगल फोर देशों का विरोध संघ के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह है ,कहीं यूके की भांति यह भी संघ  से अलग होने का निर्णय न ले ले|

कोरोना बोण्ड्स  को लेकर उत्पन्न विवाद अधिकार व कर्तव्य के मध्य संघर्षों का परिणाम है|जहां  इटली जैसे राष्ट्र जो महामारी से अधिक संकटग्रस्त हैं तथा मदद हेतु आगे आ रहे हैं, वही कम प्रभावित जर्मनी जैसे अन्य देश देशों की आर्थिक सहायता हेतु आगे नहीं आना चाहते पूर्व में इस तरह की सामूहिक ऋण प्रक्रिया ब्रेक्ज़िट जैसे संकट को जन्म दे चुकी है| आवश्यक है कि इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी रखी जाए|

15 April 2020

आंतरिक सुरक्षा से क्या समझते हैं ?आंतरिक सुरक्षा की खामियो का उल्लेख करते हुये इस समस्या के समाधान का उपाय सुझाईए |


एक देश की अपनी सीमाओं के भीतर की सुरक्षा आंतरिक सुरक्षा है देश अपने अधिकार क्षेत्र में शांति कानून व्यवस्था तथा देश की प्रभुसत्ता को सुनिश्चित करता है आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस एवं सहयोगी रूप में राष्ट्रीय शासक बलों की होती है साथ ही गृह मंत्रालय आंतरिक मामलों का मंत्रालय होता है

आंतरिक सुरक्षा के कुछ अवयव निम्न हैं-1)      देश में आंतरिक शांति स्थापना

2)       कानून व्यवस्था बनाए रखना,


3)       देश की सीमाओं की अखंडता एवं आंतरिक प्रभुसत्ता का संरक्षण

4)       संविधान का पालन

5)      शांतिपूर्ण सह अस्तित्व सांप्रदायिक सद्भाव

6)       विधि का कानून और कानून के समक्ष एकरूपता 

स्वतंत्रता के बाद से ही भारत क्सलवाद, धार्मिक कट्टरता, एवं नृजातीय संघर्ष ,भ्रष्टाचार, मादक द्रव्य व्यापार मनी लांड्रिंग, आतंकवाद, संगठित अपराध ,भाषाई उपद्रव आदि से जूझ रहा है इन समस्याओं के लिए समाधान के लिए अपने सुरक्षा चक्र को निरंतर अपडेट करने की आवश्यकता बनी है ,इसी संदर्भ में आंतरिक सुरक्षा की कमियों को रेखांकित किया जा सकता है1)      आंतरिक सुरक्षा के मामले में पुलिस व्यवस्था सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है परंतु पुलिस सुधार उपेक्षित स्थिति में है साथ ही अलग राज्य अलग प्रावधान की समस्या अलग से है police Mein vyapt Bhrashtachar vah sangathit Apradh chunauti Bane hue hain .2)      उग्रवाद आतंकवाद धार्मिक कट्टरता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करने के बावजूद bavjud Bhi Koi दीर्घकालिक रणनीति नहीं दिखती, कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति जिनके बिना इन समस्याओं पर काबू पाना दुष्कर है
3)      सुरक्षा मामले में नित नई नई चुनौतियां आती है जिन पर तात्कालिक कार्य विधियों की आवश्यकता होती है नई चुनौतियों के लिए सुरक्षा प्रबंधन में बदलाव करना होगा परंतु इतनी जटिलता के बावजूद नहीं बदलाव किए गए और ना ही उसे सार्वजनिक  आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से लड़ने के लिए निम्न प्रयास किए गए
1)      उग्रवाद से लड़ने हेतु समाधान  की कार्य  योजना जिसमें राजनीति, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी ,वित्तपोषण मानकीकरण ,नेतृत्व, प्रोत्साहन ,राजनीति, जैसे 8 प्रमुख बिंदु है
2)      कुछ राज्य पुलिस को आधुनिक हथियार एवं शिक्षण तकनीक से लैस कर रहे हैं
3)      लोगों की पुलिस तथा कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में गरीबी और बेरोजगारी इन चुनौतियों के मूल मेंहैं , राजनीतिक दलों से जुड़े अवसरवादी लोगों से प्रेरित  उन्मादी भीड़ पुलिस प्रशासन पर हमले कर देती हैकई बार कट्टर लोग हिंसक हो जाते  हैं पंजाब के पटियाला में निहंग सिखो  द्वारा किया गया ताज़ातरीन उदाहरण हैंभारत सरकार को एक समग्र सुरक्षा योजना एक आवश्यकता है इसमें पुलिस का आधुनिकीकरण सशक्त साइबर सुरक्षा सेल सोशल मीडिया को नियंत्रित व निगरानी की जरूरत है संगठित अपराधों के लिए नियंत्रण व निवारण के लिए स्पष्ट कार्य  योजना हो  यूपीकोका ओम मकोका की तर्ज पर कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है

Dr. Ajay Yadav

13 April 2020

जलियांवाला बाग हत्याकांड के 101 वर्ष पूरे


आज से ठीक 101 साल पहले 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन, वैशाखी [एव खालसा पंथ की स्थापना उत्सव (creation of Khalsa (1699)]मनाने के लिए अमृतसर के लोग जलियांवाला बाग में एकत्रित हुए | स्थानीय नेताओं ने इसी स्थान पर एक विरोध सभा का आयोजन किया, त्योहार के आयोजन के बीच विरोध प्रदर्शन बैठक देश शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी जिसमें दो प्रस्ताव रौलेट अधिनियम की समाप्ति और 10 अप्रैल की गोलाबारी की निंदा प्रस्ताव पारित किए गए, कारण यह था की 10 अप्रैल 1919  को राष्ट्रवादी नेताओं सैफुद्दीन किचलू और डॉक्टर सत्यपाल को ब्रिटिश अधिकारियों ने रौलट एक्ट का विरोध करने के कारण गिरफ्तार कर लिया था |

इसी को शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी रेजीनाल्ड डायर(Brigadier-General Reginald Edward Harry Dyer) को सौंपी गई , डायर ने इस सभा के आयोजन को सरकारी आदेश की अवहेलना समझा  और सभा स्थल को चारो ओर से  घेर लिया डायर ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के सभा पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया ,लोगों पर तब तक गोलियां बरसाई गई ,जब तक सैनिकों की गोलियां समाप्त नहीं हो गई, सभा स्थल के सभी निकास मार्गों के सैनिकों द्वारा गिरे होने के कारण सभा में सम्मिलित निहत्थे लोग भाग नही पाये ... चारों ओर से गोलियों से छलनी होते रहे|
इस घटना में लगभग 1000 लोग मारे गए जिसमें युवा, महिलाएं, बूढ़े बच्चे सभी शामिल थे जलियांवाला बाग हत्याकांड से पूरा देश स्तब्ध रह गया | वहशी क्रूरता ने पूरे देश को मौन  कर दिया |
रविंद्र नाथ टैगोर ने विरोध शुरू अपनी नाइटहुड की उपाधि त्याग दी और शंकर राम नागर ने वायसराय की कार्यकारिणी से त्यागपत्र दे दिया| अनेक स्थानों पर सत्याग्राहियों ने  अहिंसा का मार्ग त्याग कर हिंसा का मार्ग अपनाया |
18 अप्रैल को गांधी जी ने अपना सत्याग्रह समाप्त कर दिया क्योंकि उनके सत्याग्रह में हिंसा का कोई स्थान नहीं था
 1919 की घटना ने PANJAB की प्रतिरोध या विरोध प्रदर्शन की राजनीति को आकार प्रदान किया |
भगत सिंह की भारत नौजवान सभा ने इस जनसंहार को ऐसे कृत्य के रूप में देखा जो असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद उत्पन्न संताप  से उबरने में मदद करेगा |
इस घटना के समय वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड था |
इस घटना की जांच के लिए तात्कालिक भारत सचिव एडविन मोंटेग्यू ने 14 oct 1919 को हंटर कमीशन का गठन किया |
उधम सिंह जिन्होंने अपना नाम राम मोहम्मद सिंह आजाद रखा ने  लेफ्टिनेंटगवर्नर..माइकल-ओ-डायर (सर माइकल फ्रांसिस  ड्वायर (Michael O'Dwyer ; 28 अप्रैल 1864 - 13 मार्च 1940), 1912 से 1919 तक भारत में पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे।  डायर ने अमृतसर नरसंहार के संबंध में कर्नल रेजिनाल डायर की कार्रवाई का समर्थन किया और इसे "सही" ठहराया था। ) की हत्या कर दी जिसके लिए उन्हें 1940 में फांसी की सजा दी गई 
...वर्ष 1974 में उनकी अस्थियों को भारत लाया गया |




                                       
                                          -Dr Ajay Yadav 

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