16 April 2020

कोरोना बॉण्ड ||यूरोपीय संघ द्वारा घोषित किये गए आर्थिक उपाय ||

स आर्टिकल को पढ़के आप बता सकेंगे -
कोरोना बॉण्ड ,
यूरोपीय संघ द्वारा घोषित किये गए आर्थिक उपाय के प्रमुख प्रावधान ,
कोरोना बॉण्डस यूरोपीय संघ को किस प्रकार प्रभावित करेंगे
Bonds  ऐसे ऋण प्रपत्र होते हैं ,जिन्हें किसी देश की सरकार या कारपोरेट कंपनी बाजार (या निवेशकों को )मे बेचकर  मुद्रा ने इकट्ठा करती हैं |विश्व के देशों में लाकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप्प हैं, इससे अर्थव्यवस्था पर संकट है| लोगों के समक्ष खाद्य एवं रोजगार का संकट है, यूरोपीय देश अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए विभिन्न वैकल्पिक साधन अपना रहे हैं जिसमें कोरोना बॉण्ड  प्रमुख है ,यह यूरोपीय संघ के देशों का सामूहिक निर्णय प्रपत्र है, जिससे यूनियन के 9 देश सहमत हैं जबकि फ्रूगल फोर 4 देश जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड ,आस्ट्रिया असहमत है| 

 कोरोना वायरस  की चुनौतियों से निपटने के लिए यूरोपीय संघ ने 540 बिलियन यूरो का आर्थिक पैकेज घोषित करने के साथ-साथ आपातकालीन क्रेडिटलाइन खोलने,यूरोपीय निवेश बैंक की उधार क्षमता बढ़ाने और यूरोपीय आयोग की 100 बिलियन यूरो की बेरोजगारी बीमा योजना लागू करने का निर्णय लिया है ,साथ ही यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने अगले 9 महीने में 750 बिलियन यूरो की राशि के साथ परिसंपत्तिया  खरीद कार्यक्रम का विस्तार करने का निर्णय लिया है|
 कोरोना बोण्ड्स  यूरोपीय देशों को आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त करने की सुविधा के साथ-साथ अत्यधिक प्रभावित देशों को बिना राष्ट्रीय ऋण का विस्तार  किए आर्थिक सहायता भी प्रदान करेंगे इस एकता के द्वारा यूरोप के सभी देशों के मध्य संकट से निकलने का विश्वास मजबूत होगा|
 कोरोना बोण्ड्स  का नुकसान यह है कि सदस्य राष्ट्रों की आवश्यक रूप से  ऋण वहनीयता की शक्ति में बृद्धि नहीं करेगा ,साथ ही सामूहिक ऋण  प्रपत्र के कार्यान्वयन में बहुत समय लगना भी तत्कालिक आर्थिक सहायता की जरूरत वाले देशों के लिए उचित नहीं है, फ्रूगल फोर देशों का विरोध संघ के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह है ,कहीं यूके की भांति यह भी संघ  से अलग होने का निर्णय न ले ले|

कोरोना बोण्ड्स  को लेकर उत्पन्न विवाद अधिकार व कर्तव्य के मध्य संघर्षों का परिणाम है|जहां  इटली जैसे राष्ट्र जो महामारी से अधिक संकटग्रस्त हैं तथा मदद हेतु आगे आ रहे हैं, वही कम प्रभावित जर्मनी जैसे अन्य देश देशों की आर्थिक सहायता हेतु आगे नहीं आना चाहते पूर्व में इस तरह की सामूहिक ऋण प्रक्रिया ब्रेक्ज़िट जैसे संकट को जन्म दे चुकी है| आवश्यक है कि इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी रखी जाए|

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