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5 August 2013

जिंदगी {आपसे कुछ कह रहीं हैं ....}



मैं जिंदगी हूँ ,मेरा वजूद बहुत हसींन और सौम्य हैं | ताजे खूबसूरत खिलते गुलाब सी खूबसूरत या मुस्कुराते/खिलखिलाते बच्चे सा खूबसूरत मेरा अस्तित्व हैं |वैसे तो मैं दुनिया के हर जीव  में हूँ ,पर मैं खुद को इस पृथ्वी के सबसे बेहतरीन एवं उन्नत निर्माण  ....इंसान के माध्यम से खुद को यहाँ व्यक्त कर रही हूँ |
  इंसानों के विषय में मैं कहूँ तो ज्यादातर इंसान मुझे ऑटोपायलट मोड पर रखते हैं ,उनकी जिन्दंगी में अगली क्या चीज होंगी इसका फैसला परिस्थितियां या लोग करते हैं ,कुछेक मुझे खुद आपरेट करते हैं ,जिनके साथ मैं बहुत खुशी और सुखी रहती हूँ |मेरा जीवन काल तो असीम और अनंत हैं पर तुम मनुष्य लोग इसे औसतन ९६० महीने या २९००० दिन जैसा छोटा जीवन काल की मान्यता रखते हों ,और जानते हों जिसकी जैसी मान्यता उसको वैसा ही फल,इस बात को प्राचीन ऋषि मुनि समझते थे|इस छोटे ग्रह पर ,इस अल्प जीवन काल में भी कुछ लोग अपना जीवन ऐसे जीते हैं जैसे उन्हें यहाँ हमेशा रहना हैं ..किन्तु मेरी {जिंदगी}मंजिल ही मौत हैं ,इस बात पर ध्यान नही देते ,आप तो जानते ही हों किसी  के रहने न रहने से कोई फर्क नही पड़ता ,दुनिया वैसी ही चलती रहेंगी शिवाय इसके की दुनिया को आपकी देंन क्या हैं ?आप क्या छोड़ के जा रहे हैं ?आपका योगदान {contribution}क्या हैं ?
मैं आपकी जिन्दंगी हमेशा आपके भीतर के नेता को बिना किसी उपाधि के बेस्ट कार्य करने को प्रेरित करती हूँ,बेस्ट कार्य करने के लिए कोई टोपी पहनने की जरूरत नही हैं,बल्कि सजगता और लगन की जरूरत हैं  |मैं  हमेशा आपसे ,आपके मौन,बेहद शांत ,स्थिर अवस्था में आपसे  बोलती हूँ ,पर आपके पास मुझे सुनने का वक्त ही नही होता,दिन भर आप क्लायिन्ट्स,मरीजो,मशीनों,फेसबुक,ट्विटर पर व्यस्त रहते हों,खुद से मिलने की सभी लाईने व्यस्त हैं |सुनों ! मौन की  अवस्था में आप इस ब्रम्हांड की फ्रीक्वेंसी से जुड़ने लगते हों,वही फ्रीक्वेंसी मेरी भी हैं ,क्यूंकि इसी ब्रम्हांड के कणों तत्वों से मैं भी बनी हूँ,जिनसे यह ब्रम्हांड बना हैं |नार्मन कजिम्स ने कहा भी हैं जिंदगी की त्रासदी मौत में नही,बल्कि जीते जी अंतर्मन को मारने में हैंमैं तुम्हारी जिन्दंगी कोई ट्रायल बाल नही हूँ ,बल्कि ऐसी गेम हूँ जिसे खेलने का सिर्फ एक मौका मिला हैं और परफार्मेंस भी उम्दा दर्जे की करनी हैं ,क्यूंकि दाँव पर आने वाली कई पीढियाँ होती हैं|
 वैज्ञानिकों के अनुसार एक दिन में लगभग ६० हज़ार विचार हमारे मन में आते हैं |जिसमे ज्यादातर घिसे-पिटे ,नकारात्मक चिंतन और फ़ालतू के विचार होते हैं ,जो लगातार चलते हैं |लगातार चलते हुए विचार आपको सृजन कि अवस्था में ले जाते हैं,मन को परिपक्व बनाओ  ,हर घटना को उसकी सही कीमत दो|आप वैसे बिना किसी कार्य के  किसी को दस रूपये तो देने से पहले दस बार सोचते हों,पर यदि उसने आपको गाली दी तो आप कम से कम दस दिन तक उसे मजा चिखाने का मौका ढूढते रहते हों,क्यों भई ! वों तो आपको गाली देकर आपके आत्मसंयम को परख रहा हैं|देखो तुम्हारे विचार शक्तिशाली जीवित बस्तुये हैं |जितना तुम अच्छा एहसास रखोंगे ,उतनी ही ज्यादा खूबसूरत मुझे देख पाओंगे |
मैं जिन्दंगी हूँ !मैंने देखा हैं की कुछ लोग हमेशा भय में ही जीते हैं प्रशंसा या स्वीकृति की जरूरत ,चीजों को नियंत्रित करने की जरूरत ...से सब भी भय से ही आते हैं |भय तुम्हारी खुद की निर्मित वस्तु हैं ,जैसे तुम किसी भी निर्मित वस्तु को नष्ट करते हों ,वैसे इसे भी नष्ट कर दो |जैसे ही भयमुक्त जीवन जीने लगोंगे...मैं और खूबसूरत दिखने लगूंगी ,मेरा सौंदर्य ,मेरी नाजुकता निखर के आ जाएँगी |
मैं जिन्दंगी हूँ | तुम्हे लोगों स्थितियो और घटनाओं को उसी रूप में स्वीकार करने का हुनर आना चाहिए जिस रूप में हैं ,क्यूंकि यह परफेक्ट क्षण हैं |इस क्षण को बनाने में ब्रम्हाड  की पूरी भूमिका हैं |इस क्षण को पूरी तरह जी लों ,निचोड़ लो,ताकि अगर यमराज भी आये तो,साथ चलने को कहें तो,साथ हँसते हुए निकल सको |
 मैं जिन्दंगी हूँ ,मैं असीम हूँ पर तुम तथाकथित बुद्धिमानी का भ्रम रखने वाले ,अहंकारी  मानव मुझे सीमाओं में बांधकर,मेरे लिए बाउंड्री-वाल  बनाकर अपने ही पैरों पर कुल्हारी मारते रहते हों........कि तुम ये नही कर सकते,.   वों नही कर सकते.........,हमेशा कमी का रोना रोते हों|तुम जान लो की तुम अपनी सीमाओं से उपर कभी नही उठ सकते |जितनी ज्यादा तुम चादर फैलाओगे,उतनी ज्यादा ही ज्यादा यह फैलती जायेंगी |समाधी की अवस्था में हवा में उड़ने वाले महर्षि योगी या ऐसे अनेक ऐसे लोगों को तुम जानते हों जिन्होंने हर सीमाओं को तोडा,यकींन मानो हर सीमा तुम्हारी खुद की निर्मित वस्तु हैं..............!खुद को वह देखने दो जो तुम्हारा दिल महसूस करता हैं,न की वह जो तुम्हे दुनिया दिखाती हैं | तुम्हारे मस्तिष्क की हर झूठी सीमा भय आधारित हैं बस ,और भय चेतना की नकारात्मक धारा के अतिरिक्त कुछ भी नही हैं | भौरा एक छोटा कीट ,वायुगतिकी के सिद्धांत के अनुसार उसके पंख इतने छोटे होते हैं की उसके शरीर के भार को वहन नही कर सकते ..किन्तु भौरे को यह बात पता नही हैं ..उसे भौतिकी नही आती ....वह उड़ता रहता हैं |तुम जो हाड़-मांस दीखते हों उससे कही अधिक हों ,सारे संसार की शक्ति तुममे समाहित हैं !समझे तुम |हर एक बीज में जंगल बनने कि प्रत्याशा समायी हुयी होती हैं |
   जब तुमसे जुदा होने का वक्त आता हैं,जिसे तुम एक उत्सव यानि -मौत कहते हों ,तब तुमको अक्सर याद आता हैं की, तुमने अभी तो मुझे {जिन्दंगी कों}ठीक से पहचाना ही नही |आखिरी समय में तुम्हे लगता हैं की कोई जीवनराग अभी अधूरा ही रह गया जो तुम गा ही नही सके |आखिरी समय में तुम पाते हों की हर आपदा को जीत में और शीशे को सोने में बदलने का हुनर तुमने सीखा ही नही |अब आखिरी वक्त में तुम्हे इस बात पर पक्का यकींन  हों गया की वर्तमान का कार्य ,वर्तमान में ही किया जा सकता हैं{पर इस समय तुम्हारे पास वर्तमान का ज्यादा वक्त ही नही हैं } अतीत और भविष्य का जन्म तो कल्पना से होता हैं ,अतीत को तुम केवल याद कर सकते हों और भविष्य की सिर्फ कल्पना कर सकते हों |
कुछ ऐसे लोग हैं जिनके साथ रहने में हर क्षण हर पल मेरा मान ,मेरी खूबसूरती केवल बढती हैं ,दुनिया के लोग,इन लोगों को सम्मान में अपना सिर झुकाते हैं ,ये लोग मुझे गेम की तरह खेलते हैं ,इनका गेम खेलना सचमुच मुझे रोमांचित कर जाता हैं ,ये लोग अपनी पूरी प्रतिभा ,संसाधन ,युक्ति एवं उपाय तथा अपनी सर्वोत्कृष्ट क्षमता महान कार्यों में लगाते हैं ,हर कार्य को श्रेष्ठता और निर्दोष मानकों के अनुसार करते हैं ,हमेशा हर परिस्थिति में आशावादी बने रहते हैं,मैं खूबसूरत जिन्दंगी ! इन लोगों की स्वामिनी नही.... दासी हूँ |

लेखन अजय यादव

@मौलिक एवं अप्रकाशित


3 February 2013

उर्जा का अथाह सागर ....अवचेतन मन |

             दोस्तों इस टेप का प्रयोग आप अपनी उर्जा शक्ति व क्षमता बढ़ाने में कर सकते हैं |पर इससे पहले

हर सपना होंगा सच - बैज्ञानिक ढंग से तैयार विजुलायिजेसन की आडियो 

का  पहला टेप सुनना न भूले |

हमारा  अवचेतन मन उर्जा का अथाह सागर हैं ,आपको जितनी भी उर्जा व शक्ति चाहिए सब देता हैं |

साथ ही आपसे अनुरोध हैं कि निम्न लेख भी जरूर पढ़िए -

"aapke avchetan-man ki shkatiyan" 






http://www.divshare.com/download/23661731-901

31 January 2013

जीवन की गुणवत्ता में सुधार के सात तरीके -आडियो [अजय यादव ]

मानव जाति के पूरे इतिहास में आप जैसा व्यक्ति न कभी हुआ था ना कभी होंगा |आपके लक्षणों /गुणों के अनूठे तालमेल वाला दूसरा व्यक्ति होने की सम्भावना ५० बिलियन में से एक हैं |आपमें अपने जिंदगी में कुछ खास ,कुछ असाधारण करने की क्षमता हैं |ऐसी अनू
ठी चीज ,जिसे कोई दूसरा नही कर सकता |आपको तो सिर्फ इस असली सवाल का जवाब देना हैं …आप क्या करेंगे |
यह हकीकत हैं की कुछ लोगों में जन्मजात असाधारण प्रतिभा होती हैं ,लेकिन हममे से ज्यादातर लोग तो कमोबेश औसत गुणों और योग्यताओं के साथ ही अपनी जिंदगी शुरू करते हैं |किसी भी क्षेत्र में महान सफलता हांसिल करने वाले स्त्री-पुरुषों ने वो सफलता कैसे पायी ??उन्होंने अपनी रूचि के किसी खास क्षेत्र में अपने नैसर्गिक गुणों और योग्यताओं को बहुत ज्यादा बढ़ा लिया ,जिसके परिणाम स्वरुप वे सफल हुए |आपके भीतर क्षमता तो मौजूद हैं ,लेकिन उसे बाहर निकालने के लिए आपको उसे पहचानना और विकसित करना होंगा |
aayiye  इसी संदर्भ में कुछ बातें करते हैं -



"visualization" secrets in hindi.


प्राचीन भारतीय ऋषि मुनि ध्यान द्वारा परमात्मा से साक्षात्कार करते थे ,इसके लिए वे मस्तिष्क कि अनंत शक्तियों का उपयोग करते थे |

आधुनिक शोधो से मानव मन के दोप्रकार ज्ञात हुए हैं –चेतन वा अवचेतन |चेतन या जागृत मन जिसका हम केवल एक से पन्द्रह प्रतिशत उपयोग करते हैं |इन्द्रिय नियंत्रण ,शरीर कि हलचल ,विचार एवं तर्कशक्ति ,बुध्हिमत्ता ,सही अवसर कि पहचान एवं उसका सही फायदा उठाना ,अच्छे-बुरे कि पहचान ,इच्छा कि उत्पत्ति आदि सब जागृत मन कि शक्तिया हैं ,


ये सब मानवीय शक्तियां हैं जो केवल १५% हैं बाकी कि ८५%शक्ति अवचेतन मन के पास हैं ,जिसे हम दैवीय शक्ति,ईश्वरीय शक्ति या अलौकिक शक्ति भी कहते हैं |इन्द्रियो पर चेतन वा अवचेतन दोनों मनो का नियंत्रण होता हैं |टेलीपैथी यादशक्ति ,भावनाएं ,ज्ञान,प्रज्ञा ,सही अवसर खड़े करने कि क्षमता ऐसी कई शक्तियां अवचेतन मन के पास हैं ,इस मन के पास एक नैसर्गिक घडी वा कलेंडर भी हैं |इसके आलावा शरीर के स्वसंचालित तंत्र पर काबू .घाव भरना ,इच्छा-मृत्यु ,मनोबल आदि एवं आध्यात्मिक शक्तियां अवचेतन मन के पास होती हैं |
जागृत अवस्था में मस्तिष्क में १४-३५ तरंगे प्रति सेकंड होती हैं जिसे बीटा

वेव या मन की बीटा अवस्था कहते हैं ,और अर्द्ध-जागृत अवस्था में ७-१४ तरंगे प्रति सेकण्ड होती हैं जिन्हें अल्फ़ा वेव या मन कि अल्फ़ा अवस्था कहते हैं |
अल्फ़ा अवस्था में कल्पनाशक्ति के माध्यम से जो भी सृजन या आदेश चेतन[जागृत]मन से अवचेतन मन को देते हैं वह बिना तर्क के स्वीकार कर लेता हैं और हमारे जीवन में ठीक वैसा ही अवसर खड़ा करता हैं |रोज सोने सेपहले अर्धनिद्रा कि अवस्था में ,अल्फ़ा अवस्था में,हम प्राकृतिक रूप से होते हैं [इसके आलावा RELAXATION वा MEDITATION से इच्छा अनुसार अल्फ़ा अवस्था में जाया जा सकता हैं ]हमे रोज अपने सकारात्मक विचारों वाले आत्मसुझाव [जैसा हम बनना चाहते हों ,जो करना चाहते हों }सोने से पहले दुहराना चाहियें |आत्म् सुझावों में न ,नही या वास्तविकता से परें कुछ भी नही होना चाहियें |सुनिए विसुलायिजेसन कैसे करना हैं-


उदाहरण के लिए –मैं बहुत फुर्तीला हूँ ,मैं सफल रहूँगा .तो आपका मन सफलता कि उम्मीद के लिए तैयार करता हैं |यदि आप सोंचे कि मैं असफल रहूँगा तो आपका मस्तिष्क आपके शरीर को कहता हैं कि ‘कोशिश भी मत करो क्यूंकि सफलता कि कोई आशा नही हैं’|






सोचने का मतलब मस्तिष्क में रासायनिक क्रियाएँ करना हैं ,जिससे शरीर सीधा जुड़ा होता हैं ,इसलिए हर वक्त सकारात्मक वा उच्च विचार रखें |सही विचार अपने दिमाग को लगातार देते रहना चाहिये नही तो गलत विचार अपने आप खाली दिमाग को भर लेंगे |एक विद्यार्थी कामयाब लोगों कि जीवनियो को पढ़ता हैं ,जिन्होंने कठिनाईयों के वावजूद सफलता हासिल किया हैं और अपनी कमियों को खूबियों में बदला हैं |

अपनी मनचाही वातु,व्यक्ति या घटना कअपने मस्तिष्क में देखना ही रचनात्मक कल्पना हैं |यह एक क्रिया हैं जिसमे मनुष्य सृजन ,दृष्टी,कल्पना ,अनुभव  द्वारा अपने मानस पटल पर हम प्राप्ति का,अपने पसंद के नए व्यक्तित्व का चित्रांकन करतें हैं |अपने लक्ष्य की कल्पना कीजिये और उसका मानसिक पर्दे पर इस प्रकार चित्रांकन किजीयें जैसे आपने उसे पा लिया हों |पूरे मनचाहे परिणाम को देखना हैं ,उसे इन्द्रियों द्वारा महसूस करना हैं |गंध महसूस किजीयें |,रंग देखिये |ताप महसूस कीजिये ,सफलता खुशी का अनुभव किजीयें | एक आराम देह कुर्सी पर बैठ जाईये ,दोनों हाथो कि उंगलियों को आपस में मिला लीजिए |और ऐसी जगह बैठिये जहाँ आपको कोई डिस्टर्ब न करे

एक बहुत ही प्रेरक बुक लोड कीजिये
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27 October 2012

रहस्य:व्यक्तिगत कायाकल्प का भाग –२

रहस्य:व्यक्तिगत कायाकल्प का भाग –२


बुल्गारिया के मनोवैज्ञानिक लोजनोव दुनिया भर से मिलने वाले super learning के उदाहरणों से हैरान थे,उन्होंने देखा की मुस्लिम विश्वविद्यालायो में प्रवेश से पहले मुस्लिम छात्रों को पूरा कुरान याद हों जाता था ,भारतीय गुरुकुलो के छात्रों को पूरी गीता और रामायण याद हों जाती थी |
भारत के कई धर्मों/पंथो में लिखित धर्मग्रन्थ या सामग्री नही हैं |इन पंथो के गुरू और अनुनायी अपना ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से पहुचाते रहें हैं ,
लोजनोव ने शोध किया की २ मस्तिष्क होते हैं दायां और बायां |
दांया मस्तिष्क तार्किक ,रेखीय ,व्यावहारिक हैं यह तर्कशक्ति ,विश्लेषण और गणनाकरता हैं ,यह तस्वीरों और कहानियो के संदर्भ में सोचता हैं |यह सम्पूर्णतावादी हैं और किसी विचार या स्थिति के सभी पहलुओ से एक साथ संपर्क रखता हैं |बांया मस्तिष्क तार्किक जानकारी से प्रेरित होता हैं |दांया मस्तिष्क शिथिल अवस्था में जानकारियों को ज्यादा अच्छी तरह से प्रोसेस करता हैं |लोजानोव ने पाया की जब दोनों मस्तिष्क साथ कार्य करतें हैं तो सीखने की गती तेज हों जाती हैं | लोजानोव ने ब्रेन वेव के विभिन्न स्तरों पर शोध किया ,उन्होंने जागृत अवस्था की बीटा वेव्स स्तर {१४ वेव /सेकंड से ज्यादा ],एल्फा अवस्था [८-१३वेव्स/सेकंड]और थीटा अवस्था [५से ७वेव्स/सेकंड ]पर शोध किया |उन्होंने पाया की अल्फ़ा अवस्था सीखने के लिए सबसे ज्यादा आदर्श अवस्था हैं |उन्होंने अपनी खोजो को मिलाकर एक ऐसी तकनीक इजाद की जिससे किसी भी प्रकार की जानकारी सीखी और संगृहीत की जा सकतीथी |इसे आज accelerated learning कहा जाता हैं |

लोजानोव की accelerated learning तकनीक :-

लोजानोव ने पाया की अगर आप किसी व्यक्ति को शिथिलता की गहरी अवस्था यानि अल्फ़ा अवस्था में रखकर नई जानकारी देतें हैं और पृष्ठभूमि में धीमा शास्त्रीय संगीत बज रहां हों ,तो दाया और बांया मस्तिष्क सामंजस्य में आ जातें हैं और सीखने की गति तेज हों जाती हैं |
उन्होंने अपने प्रयोंगो के दौरान व्ययस्को को क्लासो में गहरी शिथिलता में बैठाया ,जिनकी आँखे बंद थी और कमरे में मंद मंद संगीत बज रहा था उसके बाद विदेशी भाषाओ की सूचियां पढ़ी और उन्हें अलग अलग तरीको से दुहराया गया |फिर विद्यार्थियो को जागृत अवस्था में लाकर उनकी स्मृति की जाँच की गयी ,विद्यार्थियो को सीखी गयी ९७% बातें याद थी |लोजानोव ने शिथिलता के उन्नत तरीको का इस्तेमाल कर १९६९ में एक दिन में १००० शब्द छात्रों को याद कराएँ ,१९७४ में विद्यार्थियो की एक खास कक्षा में लोजानोव ने एक दिन में १८०० शब्द याद कराए |बाद में १९७९ में ३००० शब्द एक दिन में याद कराने में वे सफल रहें |उन्होंने सिद्धह किया की तीव्र गती से तथ्य ,जानकारी नये व्यवहार ,नयी मानसिक आदतें सीखना संभव हैं |दोस्तों भारत में भी कुछ ऐसे गुरू हैं जिनको मैं जानता हूँ जों की ऐसे शांत एल्फा मूजिक को बेचते हैं [विदेशो की तुलना में बहुत अल्प दरों पर]जिनसे हम लोजनोव के प्रयोग से भी ज्यादा लाभ ले सकतें हैं ,मैंने भी यह खुद करके देखा हैं |

हेटरोजेनिक कंडीशनिंग :-

यह आपके बजाय किसी दूसरे द्वारा की गयी प्रोग्राम्मिंग या कंडिशनिंग हैं |ये वे चीजे हैं ,जों माता-पिता ,रिश्तेदारों,टीचर्स और कैन अन्य सम्मानित लोगों ने आपको बतायीं हैं |
जब भी आप दूसरों की कोई बात सुनते हैं ,खासकर उस व्यक्ति से जिसे आप पसंद करते हों …तो यह आपके अवचेतन मन को प्रभावित करता हैं |इसलिए आपको कभी भी किसी को ऐसी बात कहने की इजाजत नही देनी चाहिये ,जिसे आप सचमुच ना देखना चाहते हों|मान लीजिए कोईकह भी दिया तो आप खुद को कम से कम २ – सकारात्मक आत्म सुझाव दीजिए |आप मेरे[अजय यादव]के ब्लॉग को तब तक पढ़ चुके होंगे | आप एक बहुत ही सशक्त सिद्धांत के साथ काम कर रहें हैं और आपको इसका इस्तेमाल सकारात्मक तथा सृजनात्मक तरीके से करना चाहिये |
टेप के म्यूजिकल संकल्प :-

१] सब्लिमिनल टेप्स सुनना :-बाजार में ऐसे बहुत सारें सब्लिमिनल टेप्स हैं ..पर ज्यादातर बकवास हैं |भारत में माईंड पावर रिसर्च इंस्टिट्यूट और डॉ जितेन्द्र अधिया का एल्फा मूजिक का टेप्स हैं |माईंड पावर रिसर्च इंस्टिट्यूट के टेप्स मैंने अब तक सबसे उम्दा लाजवाब पाया हैं |
२]रिलेक्सेशन टेप्स :-संगीतमय संकल्प वाले टेप्स प्रयास हिन् और आसान हैं |अगर आप दिन भर में दो बार यानि सुबह शाम इनका अभ्यास करतें हैं तो आप ज्यादा सकारात्मक ,ज्यादा शांत ज्यादा रचनात्मक होंगे और अपनी भावनाओं पर ज्यादा नियंत्रण भी रख पायेंगे |आपकी कई छुटपुट बिमारियां भी खत्म होंगी |मैंने ऐसे भी लोंगो को देखा हैं ,जिन्होंने इन तकनीकों के इस्तेमाल से बड़ी बीमारियो को भी ठीक किया हैं |एक २० मिनट का रिलेक्सेशन टेप ४ घंटे की नींद के बराबर आराम देता हैं |भारत में ऐसे टेप्स आज उपलब्ध हैं हिन्दी भाषा में ट्रेनर हिमानी { http://www.clickabooks.com/index.php/relaxation-hindi-audio-cd-700.html} या डॉ जितेन्द्र अधिया के टेप्स उपलब्ध हैं { http://www.clickabooks.com/index.php/all-time-gujarai-cds-vcds-dvds/relaxation-hindi-audio-cd.html} डॉ अधिया के टेप्स शक्तिशाली हैं |इसी प्रकार का टेप माईंड पावर इंस्टिट्यूट द्वरा निर्मित जीनियस सीडी हैं |ये वास्तव में परम शक्तिशाली हैं |दोस्तों इन सबके अलावा सर्वोत्तम यह होंगा की अपना टेप हम खुद तैयार करें |उसमे अपना लक्ष्य खुद रिकार्ड करे जबकि पृष्ठभूमि में दूसरे टेप में आप अपने संकल्प को रिकार्ड कर लें जबकि पृष्ठभूमि में शांत संगीत बज रहा हों |घर पर बना कैसेट भी आपके लक्ष्यों को हांसिल करने की प्रोग्रम्मिंग में बहुत असरदार हों सकता हैं |

फटाफट संकल्प तकनीक :-

इस तकनीक का इस्तेमाल किसी महत्वपूर्ण घटना से पहले कर सकते हैं जैसे सेल्स काल या बॉस के साथ मीटिंग या मेडिकल सेमिनार्स |मानसिक प्रोग्रम्मिंग की इस विधि का इस्तेमाल प्रोफेशनल वक्ता ,अभिनेता,कलाकार और बड़े बिजिनेस मैंन करते हैं |इससे वे आने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए खुद को तैयार कर लेते हैं ,जब उनके सर्वश्रेष्ठ रूप में रहना उनके लिए महत्वपूर्ण होता हैं |
फटाफट संकल्प तकनीक में मानसिक तैयारी के पहले बताये गए कदमो की टेलिस्कोपिंग शामिल हैं |यह एक तरह से मानसिक वार्मअप हैं |आप इसे ३० सेकंड से भी कम समय में कर सकतें हैं |आप अपनी कार ,लिफ्ट या वाशरूम में भी इस तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं |
इस तकनीक का इस्तेमाल काफी आसान हैं आप अकेले होतें हैं ,अपनी आंखे बन करते हैं ,आदर्श परिणाम का संकल्प करते हैं ,उसकी मानसिक तस्वीर देखते हैं ,उसमे भावना भरते हैं और उसे मुक्त कर देते हैं |देखे और महसूस करें की वह घटना सफलता पूर्वक हों गया हैं |फिर उस मीटिंग या कार्यक्रम में शांतिपूर्वक और आत्मविश्वास के साथ जाईये |
अगर आपको कुछ दिनों में कोई महत्वपूर्ण प्रस्तुति देनी हों या इंटरव्यू देना हों तो उस बारे में सोचते समय आपको हर बार इस तकनीक का प्रयोग करना चाहिये |जब आप घटना वाले दिन और समय के ज्यादा करीब पहुँचते हैं तो आपको अपना आत्मविश्वास बढ़ता हुआ प्रतीत होंगा |और वास्तविक घटना के समय आप सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मानसिक रूप से तैयार हों चुन्केंगे |

ऑटोजेनिक कंडीशनिंग विधि या रिलेक्सेशन और विजुलायिजेसन :-

{विजुलायिजेसन के लिए एक मार्गदर्शक आडियो पेश हैं -

http://www.ziddu.com/download/20636671/11.mp3.html}

इस अभ्यास में आप संकल्प लेने ,मानसिक तस्वीर देखने ,भावना भरने और तस्वीर को मुक्त करने से पहले अपने पूरे शरीर को रिलेक्स करते हैं |
आरामदेह कुर्सी पर या विस्तर पर लेट जाईये ,अपने पूरे शरीर को रिलेक्स कीजिये …आँखे बंद कीजिये अपने शरीर के भागो से बातचीत किजीयें ..सब अंगों को रिलेक्स किजीयें
या
कोई शांत जगह पसंद कर लें जहां आपको १५-२० मिनट तक कोई विक्षेप ना हों |बिलकुल आरामदेय स्थिति में बैठें |
चेहरा सीधा करके ,अपनी नजरो को दूर के किसी काल्पनिक विन्दु पर स्थिर करें और विना पलक झपकाएं उस विन्दु को देखतें रहें |
पलके भारी होते ही आँखे बंद कर लें और अपना ध्यान साँसों पर रखें |सांस को देखिये की कैसे अंदर आती हैं ..बाहर निकलती हैं ,साँसों का निरीक्षण कीजिये |फिर १० से एक तक की गिनती करते जाईये |आपका शरीर धीरे धीरे शिथिल और शांत होता जायेंगा |१ गिनती के समय आप एल्फा अवस्था में होंगे …[ब्रेन वेव्स-७से १३]आपकी ब्रेन वेव्स चेतन और अवचेतन मस्तिष्क को समान स्तर पर रखती हैं इस समय आप खुद को जों भी सुझाव देंगे वह हर हाल में आपकी दुनिया में प्रकट होंगा ही |आपको जों चीज पाना हैं …उसकी आप मानसिक मूवी देखिये –मानसिक मूवी मात्र देखने के लिए नही हैं इसमें आपकी भागीदारी भी होनी चाहिये ,गतिमान चित्र होने चाहिये ,घटनाये वर्तमान काल की हों ,रंग /आकार की पहचान होनी चाहिये |इसमें स्थान [घर /आफिस /क्लिनिक]का उलेख कीजिये,समय का उल्लेख कीजिये[सुबह /शाम ],कौन कौन से पात्र हों ,सभी पात्र खुश दिखने चाहिये |लोगों की आवाजे ,वस्तुओ की आवाजे ,ट्रैफिक की आवाजे …गंध ,स्वाद का अनुभव …स्पर्श का अनुभव सब आपकी मानसिक मूवी की स्क्रिप्ट में शामिल होना चाहिये |बेहतर होंगा की आप अपनी मानसिक मूवी की स्क्रिप्ट पहले ही लिख लीजिए |
इस तकनीक का इस्तेमाल आप अपने संबंधो ,कार्यस्थल ,वित्तीय जीवन,सेहतअन्य गतिविधियों में डरो से उबरने में और आत्मविश्वास बढ़ाने में कर सकते हैं |यह किसी घटना का मानसिक रिहर्शल हैं |ओलम्पिक के स्वर्ण विजेता हों या मेरे जैसे छात्र लगभग सभी जागरूक लोग इस तकniक का इस्तेमाल कर अपने जीवन में क्रांति ला चूंके हैं |
http://www.divshare.com/download/23661574-0d6
[विस्तर पर लेट जाईये ,जहां कोई अआप्को डिस्टर्ब ना करे फिर इस आडियो को सुनिए ,या किसी आराम कुर्सी पर बैठकर ,जहां रीढ़ कि हड्डी सीधी रहे ….खुद को रिलैक्स कर सकते हैं,आप सदैव प्रसन्न रहे ,शुभकामनाओं सहित ……!जब भी दिक्कत महसूस कीजिये आडियो तुरन्त निकाल दीजिए ,मत सुनिए और हाँ हेडफोन से और अच्छा महसूस करेंगे }–drakyadav@rediffmail.com

रहस्य :व्यक्तिगत कायाकल्प का {भाग -१}

रहस्य :व्यक्तिगत कायाकल्प का {भाग -१}
मित्रों !मैंने पढ़ा हैं की सन १८५९मे जेनेवा के डॉ .एमिल कुए के क्लिनिक में सवास्थ्य लाभ की दर अन्य अस्पतालों या क्लीनिको की तुलना में पांच गुनी अधिक पायी गयी थी |वे हर मरीज को यह कहना सिखाते थे “हर दिन हर तरीके से मैं बेहतर और बेहतर महसूस कर रहां हूँ “|
उनके क्लिनिक में डॉ और नर्स हर मरीज का यह कहकर अभिवादन करतें थे “हर दिन हर तरीके से आप बेहतर और बेहतर दिख रहें हैं”
बाद में जर्मन डॉ शुल्ज ने ,जों की एक मनोचिकित्सक भी थे उन्होंने देखा की व्यक्ति खुद से बात करते समय जितनी शान्ति से कहता था की “हर दिन हर तरीके से मैं बेहतर और बेहतर महसूस कर रहा हूँ”उतनी ही जल्द वह स्वास्थ्य प्राप्त कर रहा हैं |डॉ शुल्ज एक मनोचिकित्सक थे और वे डिप्रेसन ,न्युरासिस ,तनाव उन्मूलन पर कार्य कर रहें थे |
डॉ शुल्ज ने अंततः आटोजेनिक कंडीशनिंग की परक्रिया विकसित की ..जिसे आप आगामी लेखो में पढेंगे …. विश्व भर के अनेक सेमिनारों में शामिल होकर मैंने भी कुछ चीजे सीखी हैं …और इन पर शोध जारी हैं …….इन चीजों को ही प्रश्नोत्तर के रूप में पेश कर रहा हूँ :-
प्रश्न १]
अपने अवचेतन मन का प्रयोग कैसे करें ?
उत्तर-
यहाँ ५ कदमो की एक प्रक्रिया हैं .जिसका इस्तेमाल आप मनचाहे मानसिक,शारीरिक,भावनात्मक परिणाम पाने के लिए कर सकतें हैं |
१]अपने मनचाहे परिणाम को [जिसे आप पाना चाहते हैं ]को शब्दों में व्यक्त कीजिये और उसे पाने का संकल्प कीजिये |
आपका कथन इच्छित परिणाम या अंतिम अवस्था का स्पष्ट वर्णन होना चाहियें |विवरण में ही ना उलझें रहें |
२]आप उस स्थिति में जों परिणाम चाहतें हैं ,उसकी मानसिक तस्वीर बनाएँ और उसे स्पष्ट रूप से देखें |खुद को और हर शामिल व्यक्ति को परिणाम के साथ खुश देखना जरूरी हैं |
३]अपने संकल्प और मानसिक तस्वीर को भावनात्मक बनाएँ |वह “भावना”पैदा किजीयें जों आप सुखद परिणाम पाने पर सचमुच महसूस करेंगे|
कल्पना कीजिये की आप सफल हों गयें हैं और लक्ष्य प्राप्त हों गया हैं |
४]स्थिति को पूरी तरह से मुक्त कर दीजिए …इसे इस स्थिति में छोड़ दें ,जैसे किसी विश्वशनीय व्यक्ति ने आपको ये आश्वासन दे दिया हों की वह इसे संभल लेंगा और आपको इसके बारे में दोबारा सोचने की जरूरत नही हैं |
५]प्राप्ति ,लक्ष्य का मिलना |
                                  अपने लक्ष्यों को,सपनो को जल्दी कैसे साकार करे ?
                                                                मानसिक तकनीकें
प्रश्न २]क्या अपने लक्ष्यों को लिखकर,संकल्प करके उन्हें और जल्दी प्राप्त कर सकतें हैं ?
उत्तर :-
           जी हाँ |
वर्तमान काल में अपने मुख्य लक्ष्यों को ,उद्देश्यों को स्पष्ट वर्णन के साथ लिखिये |ठीक वैसा ही जैसा आप उसे हकीकत में देखना चाहतें हैं |आप इस वर्णन को जितना भी लंबा या छोटा रखना चाहते हों रख सकते हैं |यह संक्षिप्त भी हों सकता हैं विस्तृत भी |
अपने लक्ष्य लिखने के बाद पेन नीचे रख दीजिए |अपनी आँखे बंद कर दीजिए ,गहरी सांस लीजिए और अपने लक्ष्य की मानसिक तस्वीर इस तरह बनाईये की जैसे यह हांसिल हों चुका हों या दिन भर की घटनाओं के संतुष्टि से सुलझने की मानसिक तस्वीर देखें |मानसिक तस्वीर देखते वक्त वह भावना पैदा कीजिये,जों सफलता के बाद मिलतीं हैं |लक्ष्यों की उपलब्धि पर मिलन वाली खुशी का मुस्कुराते हुए आनंद लीजिए |फिर इसे पूरी तरह से मुक्त कर दीजिए छोड़ दीजिए …..असीमित सत्ता के लिए |अपनी आँखे खोल लीजिए और अपना दिन शुरू कीजिये |
लिखना अपने अवचेतन मन पर अपने अक्ष्यो की छाप छोड़ने का सबसे सशक्त तरीका हैं |आप अपने लक्ष्यों को जितनी बार लिखते हैं ,वे उतनी ही ज्यादा तेजी से हांसिल होते हैं |
लक्ष्यों को कैसे लिखें?एक स्पायिरल नोटबुक लें .,उसमे हर दिन अपने लक्ष्य लिखियें |इसमें सिर्फ कुछ मिनट का समय लगता हैं किन्तु इससे आपकी प्रोग्रम्मिंग कई घंटो आगे की हों जाती हैं |अपने लक्ष्यों को बार बार लिखने से आपको पहले से ज्यादा विश्वास होने लगता हैं |की उन्हें हांसिल किया जा सकता हैं |जब आपका विश्वास गहरा होता जाता हैं और आत्मविश्वास बढ़ता हैं तो आप लक्ष्यों को पाने के अवसरों को बढ़ा देतें हैं और law of attraction को सक्रिय कर देतें हैं |इसके बाद लक्ष्य आपको प्राप्त होने लगतें हैं |
प्रश्न ३]standard affirmation technique क्या हैं ?
उत्तर :-इसमें आप तीन से पांच इंच के इंडेक्स कार्ड पर अपने लक्ष्यों को बड़े बड़े अक्षरों में लिख लेते हैं …………..वर्तमान काल में और स्पष्ट शब्दों में |
इस विधि का उपयोग सुबह और रात्रि को कीजिये …कोई इसी जगह बैठिये जहां आपको कुछ मिनटों तक कोई डिस्टर्ब ना करें |शरीर को शीथील कीजिये और मस्तिष्क को तैयार करने के लिए गहरी गहरी साँसे लीजिए ..और छोडिये ….
अपना पहला लक्ष्य[कार्ड]पढ़िए,आँखे बंद करके इसे ५ बार दुह्रारायियें,लक्ष्य की मानसिक तस्वीर इस तरह से देखिये जैसे यह हांसिल हों चुका हों |कल्पना करें की वह लक्ष्य इस समय हांसिल हों चुका होता तो आप कैसे चलते ,बात करते और काम करतें |लक्ष्य की अपनी इस तस्वीर में भावना ,खुशी व् वह सुख भारियें जों आपको लक्ष्य प्राप्त होने पर मिलेंगी |
फिर एक और गहरी सांस लीजिए …और छोडिये और लक्ष्य को आत्मविश्वास से मुक्त किजीयें |अपने हर लक्ष्य के साथ ही ऐसा ही कीजिये |आपका अवचेतन मन इस तरीके से एक बार में बीसों लक्ष्यों पर सफलता पूर्वक कार्य कर सकता हैं |
प्रश्न ४] standard affirmation technique का इस्तेमाल सुबह शाम दो बार करने की कोई विशेष वजह ?
उत्तर ;-जी हाँ |वैसे आप चाहे तो केवल सुबह या शाम भी ,इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकतें हैं |
सुबह बाहर निकलने या अपने काम पर जाने से पहले आप अवचेतन मन को प्रबल संकेत भेजते हैं |परिणाम स्वरूप आपका अवचेतन मन आकर्षण का नियम सक्रिय कर देता हैं और दिन भर के लिए आपकी जागरूकता बढ़ा देता हैं |ताकि आप अपने आस पास हों रही घटनाओं को देखकर एक या अधिक लक्ष्य पूरा करने के अवसर को ताड़ लें |
इसी तरह से रात को सोने से पहले आप अपने अवचेतन मन को रात में लक्ष्यों पर काम करने का निर्देश दे देतें हैं ,अक्सर सुबह जागने पर आपका अवचेतन मन आपको सही विचार और समाधान सुझा देता हैं | क्रमशः………………….
-अजय यादव {ajayyadav@myself.com]

24 September 2012

"power of your subconcious mind" अवचेतन मन की शक्तियाँ


हमारा अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली हैं |यह हमारे मन का ९०% भाग हैं किन्तु यह उस गाड़ी की भाति कार्य करता हैं जिसका ड्राईवर चेतन मन [१०%]हैं |आईये आज हम अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में बात करतें हैं |

१]Riflex Action:-

मित्रों !अवचेतन मन की यह शक्ति हमे आपातकालीन स्थितियों से हमे बचाती हैं ,जैसे अग्नि पर पैर पड़ते ही अचानक हटा लेते हैं ,सांप को देखकर उलटे ही भाग खड़े होतें हैं |सीडी से गिरते गिरते संभल जातें हैं |पहले हम साईकिल सीखते हैं तो धीरे धीरे किन्तु जब हम पूरी तरह सीख जातें हैं तो लोगों से बात करते हुए भी सयिक्लिंग करते हैं |

२]टेलीपैथी :-

 ईश्वर ने हमारे मन मस्तिष्क में एक TRANSMITTER और एक RECIEVER फिट कर रखा हैं जों इतना शक्तिशाली हैं की पूरे ब्रम्हाण्ड में इतनी शक्तिशाली मशीन किसी इंसान ने नही बनायीं हैं |चूँकि हम इस मशीन को चलाना नही जानते इसलिए इसकी शक्तियों से अनजान हैं |

३]अंतरात्मा की आवाज़ [रडार –CONSCIENCENESS]:-

दोस्तों जब भी हम कोई गलत कार्य करतें हैं तो अंदर से आवाज़ आती हैं “ये गलत हैं”…भगवान ने इंसान को गलत कार्य से रोकने के लिए उसके भीतर यह रडार सेट कर रखा हैं जों अवचेतन मन के नियंत्रण में हैं |

४]यादशक्ति :-MEMORY के ३ स्टेप होते हैं :-

१]Ragister 2]Storage 3]Recalling
दोस्तों Ragister और Recalling चेतन मन की विषय वस्तु हैं |जबकि Storage अवचेतन मन से जुड़ा होता हैं |किन्तु यदि Storage सही से हुवा हैं तो रिकाल्लिंग आसान हों जाती हैं |

५]भावना का गुणांक [EMOTIONAL Quotient]:- दोस्तों भावना २ प्रकार की होती हैं –

१]सकारात्मक भावना :-प्रेम,दया ,क्षमा ,कृतज्ञता ,प्रफुल्लता ,Faith,Tolerance,करुणा |
२]नकारात्मक भावना :-डर,क्रोध,घृणा ,ईर्ष्या ,sadism,चिंता,निर्दयता आदि |
                                                
उच्च IQ ही सफलता का मानक नही हैं बल्कि EQव्यक्ति को सफल बनाता हैं |उच्च शिक्षित व्यक्ति कभी कभार कम EQ के कारण हमारे ORGANISATION को बड़ी हानि पहुंचाता हैं |मर्लिन मुनरो ,अभिनेत्री दिव्या भारती ,हिटलर ,गुरुदत्त सब बहुत उच्च IQ के थे पर इनमे EQ उच्च नही था |इन सबने आत्महत्या की थी|EQ बढ़ाने के लिए सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाना होंगा |

6]Treasure of Knowledge[त्रिकाल ज्ञान]:-

हमारे अवचेतन मन से बहुत ,भविष्य ,वर्तमान कुछ भी नही छुपा हैं |यह त्रिकालदर्शी हैं ,यह भविष्य की घटनाओं को भांप लेता हैं और कभी कभार हमे चेताता भी हैं |संजय ने महाभारत की भविष्यवाणी इसी आधार पर की |इसी के आधार पर NOSTRADOMUS इतना प्रसिद्द हुआ |

७]प्रज्ञा/समझदारी /WISDOM:-

सही समय पर सही निर्णय लेना ही अवचेतन मन की विशेषता हैं |जब भी आप किसी गफलत में पढ़ने वाले हों निर्णय आप अवचेतन मन पर छोड़ दें यह आपके विश्वासों के अनुरूप सबसे उत्तम रिजल्ट लाएंगा|

८]आयोजन कर [PLANNING]:-

ज्यादातर प्लानिंग हम चेतन मन से करते हैं ..इसको ह्यूमन प्लानिंग कहते हैं ,जिसमे हम अक्सर फेल हों जाते हैं तब हम कहते हैं “man proposes but god disproposes”.भगवान का तो कुछ बिगाड़ नही सकते ,बिगाड़ सकते हैं तो सिर्फ अपना हीं|
किन्तु जब हम अर्धजग्रित मन से प्लानिंग करते हैं तो यह devine planning
होती हैं जों हर हाल में पूरा होती ही हैं |अक्सर मेरे लक्ष्य अर्धजग्रित मन द्वारा planned होते हैं |

9]अवसर खड़े करना [creats opportunity]:-

हमारा अर्द्ध जागृत मन हमारे लिए अवसर क्रियेट करता हैं |इलाहाबाद में मैं पढ़ा लिखा ,उस दौरान एक ऐसा समय आया था , जब मेरे पास पाकेट मनी तक नही थी,बाहर ना घूमने वा अंतर्मुखी स्वभाव के होने के कारण लोगों से पहचान तक नही थी |मैंने यह समस्या अवचेतन मन को सौंप दी |मुझे एक दिन प्रेरणा प्राप्त हुयी की मैं एक पुस्तक लिखूं ,पढ़ाई तकनीकों पर |मैंने लिखा परिणाम ये हुवा की वह पुस्तक हांथो हाथ बिकी |कालेजो से लेक्चर के लिए रिक्वेस्ट आने लगी |सैकड़ों छात्र मेरी क्लासेज में पढ़ने के लिए इस तरह से उतावले होते की जैसे मैं कोई बड़ी सेलेब्रटी{फिल्मस्टार} हूँ |मैंने अपनी खुद की कोचिंग बनायीं और खुद को इतना मजबूत बना लिया आर्थिक रूप से की आज मैं अपनी मेडिकल की फ़ीस खुद भर सकता हूँ |

१०]mental clock:-

दोस्तों हमारे अवचेतन मन के पास एक नैशर्गिक घड़ी हैं |जों हमे एक सही समय पर उठा देती हैं |मैं कभी अलार्म घड़ी सेट नही करता बल्कि अपने मन को कमांड दे देता हूँ की मुझे अमुक समय पर उठाना हैं मन विना देरी किये उठा देता हैं |

११]मानसिक कैलेंडर :-

मित्रों आपको जीवन में जों भी पाना हैं उसकी एक निर्धारित समय सीमा का उल्लेख जरुर किजीयें |तभी अवचेतन मन उस पर सही से कार्य कर पाएंगा |आपको कोई गोल किस वर्ष प्राप्त करना हैं ?कौन सी गाड़ी कब खरीदनी हैं ?सबका लिखित लेखा जोखा होना चाहिये ,यदि आप दुनिया की सबसे शक्तिशाली शक्ति को [अवचेतन मन ] को काम पर लगा रहें हों |…

१२]इच्छा-मृत्यु [control over death]:-

डॉ दीपक चोपड़ा ने एक पुस्तक लिखी हैं :”Ageless Body,Timeless Mind”जिसका सारंश यह हैं की अपनी मृत्यु हम खुद चुन सकतें हैं की कहाँ मरना हैं?कब मरना हैं ?किस स्थिति में मरना हैं ?..PLACE,MODE AND TIME….
दोस्तों ऐसे केस शायद आपने देखे होंगे जब डॉ ने रोगी को मरणासन्न स्थिति में घर भेज दिया हों और रोगी बच गया हों या डॉ ने कह दिया हों की अब तू मरने वाला हैं पर रोगी बच गया हों |डॉ भगवान नही हैं |ना ही हमारे अवचेतन मन से उसका मुकाबला हैं,kyunki ज्यादातर डॉ चेतन मन से इलाज करते हैं  |

१३]HEALING POWER:-

मैंने एक ऐसा व्यक्ति देखा हैं जों लगातार सोच सोच कर अपने शरीर में कंसर उत्पन्न कर लिया था और कैंसर भी इतना भयानक की टाटा हास्पिटल मुम्बई के डाक्टरों ने जवाब दे दिया था |बाद में उसको लुईस हे की “YOU CAN HEAL YOUR LIFE” बुक मिली ,पढ़कर वह पूरी प्रोसेज समझ गया और अपने एहसास और भावनाओं को बदला ,फिर दो महीने बाद कैंसर जड़ से खत्म ही हों गया ,डॉ तो हैरान ही रह गयें |दुनिया की सबसे शक्तिशाली हीलिंग पावर हमारे अवचेतन मन के पास हैं यह कोई बीमारी उत्पन्न भी कर सकता हैं तथा प्रोसेज को रिवर्स कर ठीक भी कर सकता हैं |

१४]स्वास्थ्य :-

जब भी आप से कोई पूछता हैं -:कैसे हों”?आप क्या कहते हों “FINE”..यह कहने का तात्पर्य हैं आप अपने अवचेतन मन को कह रहें हैं की सब ठीक हैं कुछ करने की जरूरत नही हैं |अवचेतन मन हमारे AUTONOMOUS NERVOUS SYSTEM पर पूरा कंट्रोल रखता हैं ,जों की हमारे शरीर में पाचन ,श्रावण,हारमोन पैदा कर, नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होता हैं जब भी हम चेतन मन के माध्यम से कोई भी निगेटिव कमांड अवचेतन मन को देते हैं तो बीमारी पैदा होतीं हैं |
आप कहिये जवाब में “BETTER AND BETTER”…यानी कल जितना अच्छा था आज उससे भी और ज्यादा अच्छा हूँ |

१५]CONTROL OVER PAIN :-

दोस्तों आपने विपशयना केन्द्र के बारे में सुना ही होंगा |इसके जों हेड हैं गोयनका जी ,उनको माईग्रेन की बीमारी थी |विपश्ना करने के बाद उनकी बीमारी पूरी तरह ठीक ही हों गयी |और फिर उन्होंने अपना उद्योग धंधा छोड़कर अपना पूरा जीवन इसी को दे दिया |विपश्यना यानि “मन की रिप्रोग्रम्मिंग” |

१६]क्रिएटिव थिंकिंग [CREATIVE THINKING]:-

Ordinary thinking:-चेतन मन से |
creative thinking:-अवचेतन मन से |
दोस्तों वाल्ट डिज्नी ,पंडित रविशंकर,लिनार्दो दा विन्ची आदि सभी ने क्रिएटिव थिंकिंग कर दुनिया को अनमोल रत्न दिया |लिनार्दो दा विन्ची को Wisest man of world  कहा जाता हैं |

१७]Control over every part of body:-

महान महर्षि योगी जिन्होंने श्री श्री रविशंकर और डॉ दीपक चोपड़ा को tm meditation सिखाया, जब खुद ध्यान में होतें थे तो हवा में उपर उठ जातें थे |इसको yogic flying कहतें हैं |हमारा अवचेतन मन परम शक्तिशाली हैं |इसका हमारे शरीर के हर भाग पर काबू होता हैं |

१८]सारे विश्व के उपर असर [influence over universe]

मित्र जब तानसेन ने दीपक राग’ गया तो आग भड़क उठी ,ताना रे रे ने राग मल्हार गाया तो बारिश होने लगी |सीता मईया के एक कमांड से धरती फट गयी और् सिर्फ राम नाम लिखने से पत्थर तैरने लगे !कौन सा विज्ञान यह सब की व्याख्या करता हैं |यह सब अवचेतन मन की शक्तिया हैं |
मेरे गुरू श्री श्री रविशंकर जब बंगलौर में अंतर्राष्ट्रीय आश्रम में होते हैं तब उनकी  ध्यान-साधना बादल आते हैं ,बरसते हैं |आप कभी भी आश्राम में आकर यह देख सकते हों |वहाँ के साप,विछुओ,हिंसक जानवरों तक में से हिंसा खत्म हों गयी हैं |वहाँ हमेशा हरियाली रहती हैं यह मेरे गुरू की अवचेतन मन की शक्तियों का एक छोटा नमूना मात्र हैं |

१९]अपार सर्जन शक्ति :-दोस्तों ताजमहल ,एफिल टावर ,रिलायंस ,आदि अपर सृजन शक्ति के उदाहरण हैं |हम सभी अवचेतन मन का इस्तेमाल कर अपनी मन पसंद श्रृष्टि निर्मित कर सकतें हैं |

२०]निजी भगवान :-

दोस्तों हर धर्म में भगवान से हम क्या चाहतें हैं –प्रेरणा,उर्जा ,मार्गदर्शन |यह सब अवचेतन मन हमे देता हैं इसलिए इसे मैं हरेक व्यक्ति का निजी भगवान कहता हूँ |

21]SQ[आध्यात्मिकता का अंक]:-

दोस्तों आपके अनुसार आध्यात्मिकता क्या हैं ?कमेन्ट के माध्यम से जरूर बतायियेंगा !
मेरे अनुसार मन ,वचन ,कर्म की एकरूपता ,जों औरो को खुश करें वही आध्यात्मिकता हैं |
मेरे हिसाब से आध्यात्मिकता क्या हैं ??
१]To do job with honesty
2]To repay a loan in time
3]to keep a promise
4]to maintain a value in business
SQ>EQ>IQ

२२]चुम्बकीय शक्ति [मैग्नेटिक पावर]:-

दोस्तों हम सभी एक चुम्बक हैं और अपने जीवन में हर उस चीज को खीच सकते हैं जों हमे पसंद हों |किन्तु इस मैग्नेट को हमे हमेशा चार्ज करते रहना होंगा |इसके लिए “शबरी तकनीक” अपनाना पड़ेगा |जैसे राम ..राम हमेशा शबरी करती गयी और राम को जाना ही पड़ा वैसे ही आपको जों चाहिये बस उसी के बारे मे सोचे ,करें |पैसा चाहिये तो पैसा पैसा पैसा …..पावर चाहिये तो पावर पावर …..अनथक अविरत करते रहे ..यह हर हाल में आपकी दुनिया में प्रकट होंगा |यह हर हाल में होंगा हीं|

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