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25 March 2017

क्या करें सर ....पढ़ने का मूड नही हैं.....

आप एक घने जंगल से होकर गुजर रहे है,अचानक शेर की दहाड़ सुनाई देती है .....आप यह कहने का साहस जुटा सकते हो कि आज मूड नहीं है इसलिए नहीं दौडूगा.....आपको तैरना नहीं आता और आप पानी में डूब रहे हैं,तो आप यह कहने का साहस कर सकते है कि" बचाओ बचाओ " चिल्लाने का मूड नहीं है.........क्या आप civil line या नये यमुना पुल पर घूमने के लिए मूड की इजाज़त लेते हो ??

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क्या आप शुक्रवार को हिट मूवी का first show देखने के लिए मूड का सहारा लेते हो??.......क्या आप अपनी गर्ल फ्रेंड से बात करने के लिए मूड का सहारा लेते हो......नहीं ना....तो फिर पढ़ाई में हर बार मूड की हेल्प क्यों....??आप कोशिश कर देख लीजिए जब भी आप अपने मूड से पूछेंगे,तो कम से कम आधे दिन आपका मन कहेंगा ....पढ़ने का मन नहीं है,जो असफलता की नींव तैयार करने में मदद करेगा,इसलिए कभी जरूरी काम के लिए मूड की तबीयत ना पूछें.

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मैंने कई छात्रों से सुना है,मैं डाक्टर बनना तो चाहता हूँ,पर पढ़ने में मन नहीं लगता क्या करूँ....अगर आपने डाक्टर बनने का संकल्प किया है तो इसका मतलब तो यह हुआ ना आपने सबसे कठिन कामों को ,सर्जरियो को,करने का फैसला किया है..........दोस्तों जैसे मन्दिर में पूजा -पाठ करने के लिए पुजारी कभी मूड का सहारा नहीं लेता,शीत ऋतु में बर्फ जैसे ठंडे पानी में सूर्योदय से पहले नहाकर बैठ जाता है,वह यह काम साल के 365 दिन बिना मूड का सहारा लिए हर रोज़ करता है,उसी तरह आपको बिना बहाना बनाएँ अपने काम को लगन से हर रोज़ करना ही करना है .

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इसलिए मित्रों जो काम जरूरी है,उसके लिए मूड का सवाल भी पैदा नहीं होता.....मूड के आज से ही दास नहीं मालिक बन जाईये......फिर देखिए आपकी AIIMS/KGMC/BHU/AFMC/IITs/NITs की राह कितनी सुगम तथा आसान हो जाती हैं ...

7 February 2016

सपने में सफर

               मेरा पूरा ध्यान मेरे साँसों पर हैं |मैं इस वक्त एक बस में बैठकर एक शहर से दूसरे शहर की और जा रहा हूँ |उबड़-खाबड़ ,आड़ा-टेड़ा रास्ता होने के कारण मेरी तरह सब यात्री अपनी अपनी सीटो पर उछल रहें हैं |पूरी बस खड़खड़ा रहीं हैं |आकाश में इतने अधिक बादल छा गयें हैं की चारो तरफ बस अँधेरा ही अँधेरा छा गया हैं |वातावरण में उम्ताहत हैं |पिछले कई दिनों से ऐसा ही वातावरण हैं |धीमी गति से यह बस ऐसे ही आंगे बढ़ रही हैं |
       आकाश में घिरे काले बादल अब बिखरने लगे हैं |छटने लगें हैं |आकाश खुलनें लगा हैं |और ये उबड़-खाबड़ रास्ता अब समाप्त हों गया हैं |अब पक्के और बहुत ही सीधे रास्ते पर बस दौड़ने लगी हैं |
आकाश अधिक साफ़ हो गया हैं ,उजाला बढ़ता ही जा रहा हैं |
खिड़की से ठंडी हवा के झोके आ रहें हैं , अचानक सें बस रूकती हैं,हम अपने सीटो से उतरते हैं ,सामने बड़ा ही खुबसुरत दृश्य हैं ,लाल ,पीले नीले सफ़ेद रंग के फूलो की सुंदर का क्या कहना ?ठंडी ठंडी हवा शरीर को छूते हुए निकल रहीं हैं,कोयल की कू-कू ,मोर के पियू-पियू से मन विल्कुल ही शांत और एकाग्र हैं ,सूरज की गुन गुनी धूप लेते हुए हम ,एक छोटे रास्ते पर,जिस पर नर्म नर्म घास हैं ,आगे बढ़ते ही जा रहें हैं,
         आगे विशाल नीला समुद्र हैं अंतहीन समुद्र ..समुद्र की लहरों की आवाज निरंतर मुझे ध्यान में खीच रहीं हैं ,मैं और रिलैक्स रिलैक्स और रिलैक्स होता ही जा रहा हूँ |
 

        रोम रोम पुलकित हों रहा हैं ,मेरे साथ और लोग भी मुक्ति का आनन्द लें रहे हैं , उल्लास और जश्न ही जश्न हैं ,न कोई टेंशन ,न कोई बाधा ..पूरा शरीर हल्का हो गया हैं |ख़ुशी बढ़ रही हैं |मैं इस वक्त बहुत ही खुश हूँ ,प्रत्येक सांस के साथ एक प्रकार का हल्कापन एक प्रकार की ताजगी मेरे भीतर प्रवेश कर रही हैं |शरीर के सभी अंग अधिक से अधिक सहजता के साथ काम कर  रहें हैं |
मेरी सांस बिलकुल ही स्वाभाविक ढंग से चल रहीं हैं |मेरा ध्यान आंतरिक अवयवो पर स्थिर हो गया हैं ,मेरा ध्यान अब मेरे सिर के उपरी हिस्से में हैं ,जहाँ पर आकाश में से एक स्वर्णिम प्रकाश वाली रौशनी धीरे धीरे नीचे मेरे सिर में उतर रही हैं |यह प्रकाश अनंत चेतना का प्रकाश हैं ,कितना अदभुत हैं ?इस प्रकाश के स्पर्श करते ही मेरे पूरे शरीर से नई चेतना फैलने लगी हैं ,ये दैवीय रौशनी की किरने मष्तिष्क ,कान,नाक,मुह के अंदर तक फ़ैल चुकी हैं |इन अंगो में आनंद दायक स्पंदन हो रहें हैं |ये अंग अब और अच्छी तरह काम कर रहें हैं |जगमगाता हुआ यह प्रकाश मेरे गले से होता हुआ मेरी छाती,पेट पीठ और आंतरिक अवयवो alimentry canal,lungs ,heart,pancreas,intestine आदि अंगो तक पहुँच गया हैं | ये आंतरिक अंग और ज्यादा स्वस्थ और बेहतर तरीके से काम करने लगें हैं ,पूरे शरीर में मेटाबोलिज्म अच्छा होता जा रहा हैं |पाँव के तलवे तक विल्कुल स्वस्थ और Vibrating health से सराबोर हैं ,जिन्दगी कलरफुल हो गयी हैं |
  "थैंक्स प्रभु; इतनी खूबसूरत जिंदगी के लियें"
     तभी मुझे लगा की कोई मुझे जगा रहा हैं ,आँखे खुली सामने माँ ,मुस्कुरा रहीं थी ...एक जन्नत से लौटा था ,सामने माँ के चरणों में झुक गया |

13 September 2013

हर संडे डॉ सिन्हा के संग -३




{डॉ सिन्हा के उदारपूर्ण व्यक्तित्व और अपनेपंन की भावना से हम सब अभिभूत थे |अनुभव और ज्ञान के चलते फिरते विश्वविद्यालय ,बुजुर्ग और Animal Spirits वाली नवजवानों की पीढ़ी के बीच ज्ञान,आध्यात्म और दर्शन का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण का विहंगम दृश्य लेकर मैं अजय एक बार फिर से हाजिर हूँ}

     हमारी आज की कक्षा फूलों के बगीचे में घने बरगद के वृक्ष के नीचे एक पक्के चबूतरे पर आयोजित हैं |लाल ,गुलाबी, हरे, सफ़ेद, बैगनी और अन्य सैकड़ों इन्द्रधनुषी रंग के फूल चारो ओर खिलकर अपनी मधुर सुगंध विखेर रहें हैं |ऊँचे ऊँचे वृक्षों पर पंक्षी कलरव कर रहें हैं ,कोयल की कुं-कुं ,पपीहे की प्युं-प्युं ध्वनि कानो कों बड़ा सुकून दें रहीं हैं | सामने छोटे जलाशय में सफ़ेद सफ़ेद बत्तखें एवं कुछ हंसो का जोड़ा हरे-हरे नरम घास पर विचरण कर  रहा हैं,ठंडी हवाएं हमारे तन-मन कों शीतलता प्रदान कर रहीं हैं,स्फूर्ति ,नवजीवन और अदभुत एहसास से हम बड़ा ही अलौकिक महसूस कर रहें हैं ,ऐसा लग रहा हैं की भीतर से कुछ मजबूत हों रहा हैं ,जिसे आप इरादा कह सकतें हैं ,कमिटमेंट कह सकतें हैं ,जिजीविषा या जीवन शक्ति भी कह सकतें हैं |
     मंच पर अचानक सभी शांत हों गए हैं,क्यूंकि गुरुदेव आ चुके हैं |सफ़ेद सौम्य कपड़ो में डॉ सिन्हा देवदूत सरीखे लग रहें हैं ,आज उनके साथ मिसेज सिन्हा भी हैं|बेहद खूबसूरत कपल....|
   दोस्तों !हर उम्र का एक सौंदर्य होता हैं ,एक बच्चे ,एक युवा ,एक बुजुर्ग हर एक में अलग अलग उम्रो की विशिष्ट नैसर्गिक आभा होती हैं |आप भी मेरी इस बात से सहमत होंगे |
  हल्के योगासनों और ध्यान के बाद डॉ सिन्हा ने हम सबको संबोधित किया ..
    "जब हम विषम से विषम परिस्थितियो में भी अपने सर्वोच्च जीवनमूल्यों और विश्वासों के अनुसार जीते हैं तो हम  मानसिक शांति का आनंद लेते हैं ,अन्यथा हम जिंदगी भर इसकी तलाश में भटकतें रहते हैं जबकि यह हमारी नैसर्गिक अवस्था हैं'|
  अब सभी लोग अपनी आँखे बंद कर लें |गहरी सांसे खींचे ,सांसो कों आता जाता देखें,महसूस करें साँसों पर ध्यान रखें|दो मिनट तक यह अभ्यास जारी रखें.....
रिलैक्स ..........रिलैक्स ..........रिलैक्स
१ मिनट....
२ मिनट....

       'अब आप अपने आदर्श जीवन की कल्पना करें ,की तत्वों का कौन सा क्म्पोजिसन आपको पूरी तरह आनंदित बनाएंगा ,खुश रखेंगा |इस पल आपको यह चिंता नही करना हैं की आपके लिए क्या संभव हैं क्या नही हैं |अपने मस्तिष्क कों सीमाओं से मुक्त कर दें |और स्पष्टता से अपनी भौंहों के ऊपर बंद आँखे ले जा कर कल्पना किजीयें की मानसिक शांति के लिए आपको क्या क्या चाहिए ?
आप क्या करेंगे ?
आप कहाँ रहेंगे ?
आपके साथ कौन रहेंगा ?
आप अपना समय {रात/दिन }कैसे बिताएंगे ?
आपका काम हर तरह से उत्कृष्ट होने पर कैसा दिखेंगा ?
आपके प्रियजन पूर्ण शांति और सुख की अवस्था में रहें तो आपका पारिवारिक जीवन कैसा होंगा ?.........
    खास बात यह हैं की आप उस लक्ष्य पर निशाना नही लगा सकते,जो आपकी नजरो में न हों ,इसलिए अगर किसी चीज कों आप स्पष्टता से विजुलायिज कर सकतें हैं ,तो उसे आप पा भी सकते हैं |
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       हमारा शरीर अदभुत हैं ,इसके साथ अगर हम कुछ निश्चित चीजे करना बंद कर दें तो यह अक्सर अपने आप ठीक हों जाता हैं ,किन्तु हम तम्बाकू,निकोटीन ,अल्कोहल... अनावश्यक ड्रग्स द्वारा इसके साथ दुर्व्यवहार करते रहतें हैं,फिर भी ईश्वर निर्मित इस अदभुत यांत्रिकी में दुबारा स्वस्थ्य व उर्जावान होने की प्रत्याशा समायी हैं |
आदर्श सेहत हैं ,आपकी ऐसी कल्पना कीजिये |आदर्श फिटनेस पाकर आप कैसे दिखेंगे ?किसा महसूस करेंगे ?आपका वजन कितना होंगा ?आप कैसा भोजन और व्यायाम करेंगे ,एरोबिक्स करेंगे या भारी कसरत |
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    हम सब सामाजिक जीव हैं ,हमारे सम्बन्ध इंसान के रूप में हमारी सफलता के पैमानें हैं |कोई परिवार कितना खुश रहता हैं ,कितना आपस में लोग हंसते हैं ,इसी से सम्बन्धों का हाल चाल पता चल सकता हैं |जीवन में आप सबका लक्ष्य एक ऐसा मानवीय परिवेश बनाने का होना चाहिए जिसमे आप खुश ,संतुष्ट और सुखी रहें |
     आपका आदर्श सम्बन्ध किसके साथ होंगा ,कैसा दिखेंगा?अगर आप अपने महत्वपूर्ण संबंधो की कल्पना पुरे डिटेल के साथ कर सकें ,तो संबंधो में क्या ज्यादा चाहेंगे क्या कम ?आप अपने जीवन में उन परिस्थितियों के निर्माण के लिए क्या क्या करेंगे ? स्पष्टता से विजुलायिज करें |
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   बच्चों !मैं आपसे कहूँगा की आप अपनी योग्यताओं और गुणों कों इतना ज्यादा बढा लें ,ताकि तसल्ली रहें की आप पर्याप्त पैसा कमा सकतें हैं ,इससे आप सब में आर्थिक स्वतंत्रता का एहसास पनपेंगा जो की किसी भी लक्ष्य कों हांसिल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं” |
    आप सब इमैजिन कीजिये ,की आपके पास अलादीन का चिराग या जादुई छड़ी  हैं ,जिसे हिलाते ही  जितना धन चाहेंगे प्राप्त हों जायेंगा |अब आप अपने सारे आर्थिक लक्ष्य हांसिल कर लें तो आपकी जिंदगी कैसी दिखेंगी ,आज से कुछ वर्षों बाद आप कितना धन कमाना चाहेंगे ?आप किस तरह के घर में रहेंगे ?कैसी गाडी से चलाना पसंद करेंगे,रिटायरमेंट के समय अपनी कुल कितनी संपत्ति चाहते हैं ?सब स्पष्टता से देखें |
     यह अभ्यास आपको रोजाना करना हैं ,आप सभी घर जाकर इन सब प्रश्नों का उत्तर अपनी डायरी में लिखेंगे |जहाँ तक आप सोंच सकें ,कोई लिमिट नही क्यूंकि इस केस में आप जितना पाँव फैलायेंगे उतनी ज्यादा चादर फैलती जायेंगी |इस अभ्यास से आप ठीक ठीक जान जायेंगे की आप जीवन में क्या चाहते हैं ?और किस तरह उन सब चीजों कों पाना हैं ,इससे लक्ष्य निर्धारण आसान हों जायेंगा जिसकी चर्चा अगली कक्षा में होंगी |
     आप कों अपनी कल्पना की कुंची से जीवन के कैनवास पर मास्टरपीस बनाना हैं |आप कों जहाँ पहुंचना हैं वहाँ पहुँचने की प्रक्रिया की चिंता न करें ,यह खुद ब खुद होंगा ,जैसे बीज बोने पर पौधा  खुद ब खुद  निकलता हैं ,आप बीच में ,बीज जमाई हुयी मिटटी कों कुरेदते भी नही हैं ,इसी तरह से एक बार बीज बो देने के बाद आपको फसल का इन्तेजार करना चाहिए |
 {यह सारी कथा काल्पनिक हैं ,किसी जीवित या मृत पात्र से कोई सम्बन्ध नही हैं }
                                                                                 -अजय यादव

7 August 2013

Mind की पावर Boost करने के लिए Diet



          Mind की पावर Boost करने के लिए Diet

MIND हमारे शरीर के अंगों से सीधा जुड़ा होता हैं |यह HEART से BLOOD ग्रहण करता हैं ,तथा blood से nutrients तथा आक्सीजन |मस्तिष्क के लिए सबसे ज्यादा शक्तिशाली खुद कों सकारात्मक आत्मसुझाव  देना हैं ,अर्थात अपनी कार्यक्षमता ,शक्ति और खुद से जुड़ी अच्छी बातों के लिए जिससे हम प्रेम करतेहैं , खुद को बार बार याद दिलाते रहना हैं |दूसरी खास बात हैं ,खुद कों selective बने रहने  का प्रशिक्षण देना |दुनिया में अच्छाई {प्रेम,करुना,दया,समृद्धि..इत्यादि },बुराई {नफरत,क्रोध ..इत्यादि .}दोनों हैं |हमे अपने हार्ड डिस्क कों अच्छाईयों से भरना हैं |अच्छाईयों के लिए सेलेक्टिव होना हैं,बुराईयां खुद ब खुद चली जायेंगी जैसे अँधेरे के नाश के लिए दिया जलाते हैं उसी तरह से   |अक्सर लोग brain power कों  boost करने के लिए भोजन के संदर्भ में  मुझसे सलाह मांगते हैं |लिहाजा यह पोस्ट मैं लिख रहा हूँ |

 फलो व सब्जियों में antioxidants एवं minerals होते हैं ,इनमे पर्याप्त मात्रा में fibres एवं  vitamins होते हैं |vitamin C अत्यन्त प्रबल antioxidants हैं |मस्तिष्क में इसकी ज्यादा मात्र होती हैं,और यह  neurotransmitter खासकर  dopamine के निर्माण में भाग लेता हैं |vitamin E कों mother of all antioxidants कहा जाता हैं ,यह mineral selenium के साथ खाने पर  stress कम करता हैं |fibers आन्त्रो कों साफ़ कर  उन्हें constipation से मुक्त रखता हैं जिससे vital energy बढती हैं ,और mind power boost होती हैं |

 brain का food केवल glucose हैं |जो खासकर अंगूर,गुड़,चुकन्दर dry fruits आदि में होता हैं | जब blood sugar level कम हों जाता हैं ,तब brain के functions बहुत slow हों जाते हैं |blood sugar के normal होने पर clarity of thought {विचारों की स्पष्टता }बढ़  जाती हैं |भोजन में यदि आप fat{चर्बी ,घी ,तेल ...}की मात्रा कम लेते हैं,तो ज्यादा बेहतर रहता हैं क्यूंकि जिस blood में fat की मात्रा ज्यादा होती हैं ,वो बेहतर circulate  नही कर पाता और blood circulation का बेहतर  level, hypothalmus,pituitary के function कों improve करता हैं ,हालाँकि गाय का घी इसका अपवाद हैं ,मेरी दादी स्वर्गीय श्रीमती रामदेई जिनके विचारों का स्पष्ट प्रभाव आप मेरे ब्लोगिंग पर पायेंगे ,वे मुझसे अक्सर कहती थी “गाय का घी मानसिक असंतुलन ..अर्थात उर्जा असंतुलन ,यादशक्ति कमजोर होने पर ,और शक्ति स्थायित्व की कमी में रामबाण हैं”आधुनिक विज्ञान भी  इस बात  का समर्थन करता हैं,डेयरी के उत्पादों में सबसे अच्छा दही हैं ,जो pro-biotic तकनीक से तैयार होता हैं  |जब आप starvation diet पर होते हैं तो आपका  brain भी .. ,आपके भूखे रहने के कारण कष्ट पाता हैं,जीरो फिगर के लिए डायटिंग कर भूखा मरने से बचे...मस्तिष्क आपको दुवाये देंगा|

      एक कहावत हैं ‘eat your protien first,before you touch carbohydrates’.....हर प्रकार की दालें ,जई{oat},oat flour,aot meal,oat milk,dried beans....अखरोट,बादाम कों भोजन में शामिल करना चाहिए |कुछ soya products कम fat वाले होने के साथ साथ उच्च amino acids युक्त होते हैं ,जो neurotransmitters के समुचित संचालन हेतु आवश्यक होते हैं |प्रोटीन के अच्छे विकल्पों में मछली और अलसी का तेल भी हैं ,जिनमे ओमेगा-३  fatty acids भी होते हैं |सेब,संतरा ,गुलाब जल,अदरक,लीची ,मछली ,गाय का दूध ,लहसुन ,जिनसेंग आदि उत्तम आहार हैं |

        जिनसेंग मस्तिष्क की क्रिया कों नोर्मल करता हैं |यह heart beat,b.p.,और blood sugar के स्तर कों सामान्य बनाये रखने में मदद करता हैं साथ ही endocrine activity तथा metabolism क्रिया कों चुस्त-दुरुस्त रखता हैं |यह drugs,alcohal,chemotherapy,एवं अन्य टोक्सिन के प्रति प्रतिरोधी भी हैं|इसका भी  इस्तेमाल ब्रेन के उत्तम स्वास्थ्य के लिए होता हैं |

    Ginkgo Biloba{cognitive inhancer}brain cells में  acetylcholine recepter की संख्या कों बढ़ाने में सहायता प्रदान करता हैं जिससे memory,thinking,विश्लेषण व reasoning,तथा मानसिक सजगता बढती हैं |यह brain में  blood circulation कों बेटर करता हैं |

    आजकल बाजार में प्रोसेस्ड फूड्स की भरमार हैं |इनकी क्वालिटी पर भरोसा नही किया जा सकता ,न ही इनके निर्माताओ के तरफ से तैयार की  गयी विज्ञापनों पर |डिब्बा बंद भोजन ,नुक्सान देह होते हैं इनसे कोलाईटीस का खतरा रहता हैं ,जो की  एक गंभीर  आंत्रीय रोग हैं |

 memory कम या ज्यादा नही होती यह सिर्फ trained या untrained होती हैं ,

    :) अगली बार जब भाभी जी {आपकी धर्मपत्नी }या भैया जी {आपके पति} आपसे कहें की “जब भगवान बुद्धि बाँट रहे थे तो तुम कहा थे/थी ...तो कदापि मत कहियेंगा ,की “तुम्हारे साथ फेरे ले रही थी/रहा था “....| :)
बल्कि  खुद कों अच्छी मेमोरी के लिए ट्रेन करना हैं ,ऐसा संकल्प किजियेंगा ,भाई मैं तो अभी से प्रैक्टिस करने लगा हूँ ..:)

लेखन -डॉ अजय

  

5 August 2013

जिंदगी {आपसे कुछ कह रहीं हैं ....}



मैं जिंदगी हूँ ,मेरा वजूद बहुत हसींन और सौम्य हैं | ताजे खूबसूरत खिलते गुलाब सी खूबसूरत या मुस्कुराते/खिलखिलाते बच्चे सा खूबसूरत मेरा अस्तित्व हैं |वैसे तो मैं दुनिया के हर जीव  में हूँ ,पर मैं खुद को इस पृथ्वी के सबसे बेहतरीन एवं उन्नत निर्माण  ....इंसान के माध्यम से खुद को यहाँ व्यक्त कर रही हूँ |
  इंसानों के विषय में मैं कहूँ तो ज्यादातर इंसान मुझे ऑटोपायलट मोड पर रखते हैं ,उनकी जिन्दंगी में अगली क्या चीज होंगी इसका फैसला परिस्थितियां या लोग करते हैं ,कुछेक मुझे खुद आपरेट करते हैं ,जिनके साथ मैं बहुत खुशी और सुखी रहती हूँ |मेरा जीवन काल तो असीम और अनंत हैं पर तुम मनुष्य लोग इसे औसतन ९६० महीने या २९००० दिन जैसा छोटा जीवन काल की मान्यता रखते हों ,और जानते हों जिसकी जैसी मान्यता उसको वैसा ही फल,इस बात को प्राचीन ऋषि मुनि समझते थे|इस छोटे ग्रह पर ,इस अल्प जीवन काल में भी कुछ लोग अपना जीवन ऐसे जीते हैं जैसे उन्हें यहाँ हमेशा रहना हैं ..किन्तु मेरी {जिंदगी}मंजिल ही मौत हैं ,इस बात पर ध्यान नही देते ,आप तो जानते ही हों किसी  के रहने न रहने से कोई फर्क नही पड़ता ,दुनिया वैसी ही चलती रहेंगी शिवाय इसके की दुनिया को आपकी देंन क्या हैं ?आप क्या छोड़ के जा रहे हैं ?आपका योगदान {contribution}क्या हैं ?
मैं आपकी जिन्दंगी हमेशा आपके भीतर के नेता को बिना किसी उपाधि के बेस्ट कार्य करने को प्रेरित करती हूँ,बेस्ट कार्य करने के लिए कोई टोपी पहनने की जरूरत नही हैं,बल्कि सजगता और लगन की जरूरत हैं  |मैं  हमेशा आपसे ,आपके मौन,बेहद शांत ,स्थिर अवस्था में आपसे  बोलती हूँ ,पर आपके पास मुझे सुनने का वक्त ही नही होता,दिन भर आप क्लायिन्ट्स,मरीजो,मशीनों,फेसबुक,ट्विटर पर व्यस्त रहते हों,खुद से मिलने की सभी लाईने व्यस्त हैं |सुनों ! मौन की  अवस्था में आप इस ब्रम्हांड की फ्रीक्वेंसी से जुड़ने लगते हों,वही फ्रीक्वेंसी मेरी भी हैं ,क्यूंकि इसी ब्रम्हांड के कणों तत्वों से मैं भी बनी हूँ,जिनसे यह ब्रम्हांड बना हैं |नार्मन कजिम्स ने कहा भी हैं जिंदगी की त्रासदी मौत में नही,बल्कि जीते जी अंतर्मन को मारने में हैंमैं तुम्हारी जिन्दंगी कोई ट्रायल बाल नही हूँ ,बल्कि ऐसी गेम हूँ जिसे खेलने का सिर्फ एक मौका मिला हैं और परफार्मेंस भी उम्दा दर्जे की करनी हैं ,क्यूंकि दाँव पर आने वाली कई पीढियाँ होती हैं|
 वैज्ञानिकों के अनुसार एक दिन में लगभग ६० हज़ार विचार हमारे मन में आते हैं |जिसमे ज्यादातर घिसे-पिटे ,नकारात्मक चिंतन और फ़ालतू के विचार होते हैं ,जो लगातार चलते हैं |लगातार चलते हुए विचार आपको सृजन कि अवस्था में ले जाते हैं,मन को परिपक्व बनाओ  ,हर घटना को उसकी सही कीमत दो|आप वैसे बिना किसी कार्य के  किसी को दस रूपये तो देने से पहले दस बार सोचते हों,पर यदि उसने आपको गाली दी तो आप कम से कम दस दिन तक उसे मजा चिखाने का मौका ढूढते रहते हों,क्यों भई ! वों तो आपको गाली देकर आपके आत्मसंयम को परख रहा हैं|देखो तुम्हारे विचार शक्तिशाली जीवित बस्तुये हैं |जितना तुम अच्छा एहसास रखोंगे ,उतनी ही ज्यादा खूबसूरत मुझे देख पाओंगे |
मैं जिन्दंगी हूँ !मैंने देखा हैं की कुछ लोग हमेशा भय में ही जीते हैं प्रशंसा या स्वीकृति की जरूरत ,चीजों को नियंत्रित करने की जरूरत ...से सब भी भय से ही आते हैं |भय तुम्हारी खुद की निर्मित वस्तु हैं ,जैसे तुम किसी भी निर्मित वस्तु को नष्ट करते हों ,वैसे इसे भी नष्ट कर दो |जैसे ही भयमुक्त जीवन जीने लगोंगे...मैं और खूबसूरत दिखने लगूंगी ,मेरा सौंदर्य ,मेरी नाजुकता निखर के आ जाएँगी |
मैं जिन्दंगी हूँ | तुम्हे लोगों स्थितियो और घटनाओं को उसी रूप में स्वीकार करने का हुनर आना चाहिए जिस रूप में हैं ,क्यूंकि यह परफेक्ट क्षण हैं |इस क्षण को बनाने में ब्रम्हाड  की पूरी भूमिका हैं |इस क्षण को पूरी तरह जी लों ,निचोड़ लो,ताकि अगर यमराज भी आये तो,साथ चलने को कहें तो,साथ हँसते हुए निकल सको |
 मैं जिन्दंगी हूँ ,मैं असीम हूँ पर तुम तथाकथित बुद्धिमानी का भ्रम रखने वाले ,अहंकारी  मानव मुझे सीमाओं में बांधकर,मेरे लिए बाउंड्री-वाल  बनाकर अपने ही पैरों पर कुल्हारी मारते रहते हों........कि तुम ये नही कर सकते,.   वों नही कर सकते.........,हमेशा कमी का रोना रोते हों|तुम जान लो की तुम अपनी सीमाओं से उपर कभी नही उठ सकते |जितनी ज्यादा तुम चादर फैलाओगे,उतनी ज्यादा ही ज्यादा यह फैलती जायेंगी |समाधी की अवस्था में हवा में उड़ने वाले महर्षि योगी या ऐसे अनेक ऐसे लोगों को तुम जानते हों जिन्होंने हर सीमाओं को तोडा,यकींन मानो हर सीमा तुम्हारी खुद की निर्मित वस्तु हैं..............!खुद को वह देखने दो जो तुम्हारा दिल महसूस करता हैं,न की वह जो तुम्हे दुनिया दिखाती हैं | तुम्हारे मस्तिष्क की हर झूठी सीमा भय आधारित हैं बस ,और भय चेतना की नकारात्मक धारा के अतिरिक्त कुछ भी नही हैं | भौरा एक छोटा कीट ,वायुगतिकी के सिद्धांत के अनुसार उसके पंख इतने छोटे होते हैं की उसके शरीर के भार को वहन नही कर सकते ..किन्तु भौरे को यह बात पता नही हैं ..उसे भौतिकी नही आती ....वह उड़ता रहता हैं |तुम जो हाड़-मांस दीखते हों उससे कही अधिक हों ,सारे संसार की शक्ति तुममे समाहित हैं !समझे तुम |हर एक बीज में जंगल बनने कि प्रत्याशा समायी हुयी होती हैं |
   जब तुमसे जुदा होने का वक्त आता हैं,जिसे तुम एक उत्सव यानि -मौत कहते हों ,तब तुमको अक्सर याद आता हैं की, तुमने अभी तो मुझे {जिन्दंगी कों}ठीक से पहचाना ही नही |आखिरी समय में तुम्हे लगता हैं की कोई जीवनराग अभी अधूरा ही रह गया जो तुम गा ही नही सके |आखिरी समय में तुम पाते हों की हर आपदा को जीत में और शीशे को सोने में बदलने का हुनर तुमने सीखा ही नही |अब आखिरी वक्त में तुम्हे इस बात पर पक्का यकींन  हों गया की वर्तमान का कार्य ,वर्तमान में ही किया जा सकता हैं{पर इस समय तुम्हारे पास वर्तमान का ज्यादा वक्त ही नही हैं } अतीत और भविष्य का जन्म तो कल्पना से होता हैं ,अतीत को तुम केवल याद कर सकते हों और भविष्य की सिर्फ कल्पना कर सकते हों |
कुछ ऐसे लोग हैं जिनके साथ रहने में हर क्षण हर पल मेरा मान ,मेरी खूबसूरती केवल बढती हैं ,दुनिया के लोग,इन लोगों को सम्मान में अपना सिर झुकाते हैं ,ये लोग मुझे गेम की तरह खेलते हैं ,इनका गेम खेलना सचमुच मुझे रोमांचित कर जाता हैं ,ये लोग अपनी पूरी प्रतिभा ,संसाधन ,युक्ति एवं उपाय तथा अपनी सर्वोत्कृष्ट क्षमता महान कार्यों में लगाते हैं ,हर कार्य को श्रेष्ठता और निर्दोष मानकों के अनुसार करते हैं ,हमेशा हर परिस्थिति में आशावादी बने रहते हैं,मैं खूबसूरत जिन्दंगी ! इन लोगों की स्वामिनी नही.... दासी हूँ |

लेखन अजय यादव

@मौलिक एवं अप्रकाशित


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