7 February 2016

सपने में सफर

               मेरा पूरा ध्यान मेरे साँसों पर हैं |मैं इस वक्त एक बस में बैठकर एक शहर से दूसरे शहर की और जा रहा हूँ |उबड़-खाबड़ ,आड़ा-टेड़ा रास्ता होने के कारण मेरी तरह सब यात्री अपनी अपनी सीटो पर उछल रहें हैं |पूरी बस खड़खड़ा रहीं हैं |आकाश में इतने अधिक बादल छा गयें हैं की चारो तरफ बस अँधेरा ही अँधेरा छा गया हैं |वातावरण में उम्ताहत हैं |पिछले कई दिनों से ऐसा ही वातावरण हैं |धीमी गति से यह बस ऐसे ही आंगे बढ़ रही हैं |
       आकाश में घिरे काले बादल अब बिखरने लगे हैं |छटने लगें हैं |आकाश खुलनें लगा हैं |और ये उबड़-खाबड़ रास्ता अब समाप्त हों गया हैं |अब पक्के और बहुत ही सीधे रास्ते पर बस दौड़ने लगी हैं |
आकाश अधिक साफ़ हो गया हैं ,उजाला बढ़ता ही जा रहा हैं |
खिड़की से ठंडी हवा के झोके आ रहें हैं , अचानक सें बस रूकती हैं,हम अपने सीटो से उतरते हैं ,सामने बड़ा ही खुबसुरत दृश्य हैं ,लाल ,पीले नीले सफ़ेद रंग के फूलो की सुंदर का क्या कहना ?ठंडी ठंडी हवा शरीर को छूते हुए निकल रहीं हैं,कोयल की कू-कू ,मोर के पियू-पियू से मन विल्कुल ही शांत और एकाग्र हैं ,सूरज की गुन गुनी धूप लेते हुए हम ,एक छोटे रास्ते पर,जिस पर नर्म नर्म घास हैं ,आगे बढ़ते ही जा रहें हैं,
         आगे विशाल नीला समुद्र हैं अंतहीन समुद्र ..समुद्र की लहरों की आवाज निरंतर मुझे ध्यान में खीच रहीं हैं ,मैं और रिलैक्स रिलैक्स और रिलैक्स होता ही जा रहा हूँ |
 

        रोम रोम पुलकित हों रहा हैं ,मेरे साथ और लोग भी मुक्ति का आनन्द लें रहे हैं , उल्लास और जश्न ही जश्न हैं ,न कोई टेंशन ,न कोई बाधा ..पूरा शरीर हल्का हो गया हैं |ख़ुशी बढ़ रही हैं |मैं इस वक्त बहुत ही खुश हूँ ,प्रत्येक सांस के साथ एक प्रकार का हल्कापन एक प्रकार की ताजगी मेरे भीतर प्रवेश कर रही हैं |शरीर के सभी अंग अधिक से अधिक सहजता के साथ काम कर  रहें हैं |
मेरी सांस बिलकुल ही स्वाभाविक ढंग से चल रहीं हैं |मेरा ध्यान आंतरिक अवयवो पर स्थिर हो गया हैं ,मेरा ध्यान अब मेरे सिर के उपरी हिस्से में हैं ,जहाँ पर आकाश में से एक स्वर्णिम प्रकाश वाली रौशनी धीरे धीरे नीचे मेरे सिर में उतर रही हैं |यह प्रकाश अनंत चेतना का प्रकाश हैं ,कितना अदभुत हैं ?इस प्रकाश के स्पर्श करते ही मेरे पूरे शरीर से नई चेतना फैलने लगी हैं ,ये दैवीय रौशनी की किरने मष्तिष्क ,कान,नाक,मुह के अंदर तक फ़ैल चुकी हैं |इन अंगो में आनंद दायक स्पंदन हो रहें हैं |ये अंग अब और अच्छी तरह काम कर रहें हैं |जगमगाता हुआ यह प्रकाश मेरे गले से होता हुआ मेरी छाती,पेट पीठ और आंतरिक अवयवो alimentry canal,lungs ,heart,pancreas,intestine आदि अंगो तक पहुँच गया हैं | ये आंतरिक अंग और ज्यादा स्वस्थ और बेहतर तरीके से काम करने लगें हैं ,पूरे शरीर में मेटाबोलिज्म अच्छा होता जा रहा हैं |पाँव के तलवे तक विल्कुल स्वस्थ और Vibrating health से सराबोर हैं ,जिन्दगी कलरफुल हो गयी हैं |
  "थैंक्स प्रभु; इतनी खूबसूरत जिंदगी के लियें"
     तभी मुझे लगा की कोई मुझे जगा रहा हैं ,आँखे खुली सामने माँ ,मुस्कुरा रहीं थी ...एक जन्नत से लौटा था ,सामने माँ के चरणों में झुक गया |

2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " बेवक़्त अगर जाऊँगा " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. हृदय से आभार |
    बहुत बहुत आभार |
    -डॉ अजय

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