23 April 2012

चलते ही रहना

     चलते रहना

जिंदगी की दौड़ में ............
तेज या शक्तिशाली नही जीतता ........
जीतता वो हैं ..जो ...........
तब तक चलता हैं ...........
जब तक की ............
मंजिल नही मिल जाती..........
कड़ी मेहनत पर्याप्त नही ......
विजेता का दिल होना चाहियें...
चाहे जो कुछ हों जाएँ......
मैदान ना छोड़ना..अजय
कई बार गिरना..........
उठ कर खड़े होना ........
चलते रहना.............
बस चलते रहना ...........अजय

2 April 2012

प्रेम

अक्सर मै सोचता हूँ की…..
उस लड़की को क्यों चाहता हूँ ,
मेरी तरह हांड मांस की वो भी बनी हैं ,
उसमे भी उतनी ही हड्डियाँ हैं ,
सारे शरीर की जैव रसायनी सामान हैं ,
फिर मै उस मोड पर क्यों पलट के देखता हूँ .
इस चाह में की वो लड़की दिख जाये ,
रोमांटिक गाने सुनते वक्त वो याद क्यूँ आती हैं ,
दुनिया बनाते वक्त शायद भगवान ने
इंसान की व्यस्तता और …
व्यस्तता व्युत्पन्न इंसानी परायेपन को
भाप-लिया था इसीलिए…………
उन्होंने सृष्टि की रचना में
प्यार का नया खेल रचाया |
विश्वास ,समर्पण ,त्याग जैसे ,
कुछ पायदान बनाया ,

गर्म-गोस्त

गोस्त –की-दूकान {कवि-अजय]
गली के उस चौराहें पर ,
गोस्त की दुकान हैं,
पापा का हाथ बटाने,
अक्सर सलीम आ जाती हैं |
सलीमा कमसिन कुंवारी हैं,
उघरता बदन भरपूर जवानी हैं
आशिको और व्यभिचारियो की,
घूरती निगाहें ,
क्या यही हर जवानी की कहानी हैं,?
गोस्त खरीदने वाले लोग अक्सर ,
गोस्त की ताजगी तसव्वुर से,
जान जाते हैं,
ताज़े गोस्त को देखते हैं ,
सलीमा को देखते हैं,
अर्थपूर्ण मुस्कान से मुस्कराते हैं|
सलीमा अक्सर खड़ी-खड़ी ,
नशेड़ी –शबाबी आँखों की चुभन ,
महसूस करती हैं |
कभी-कभी उसका मन कहता हैं ,
की चाकू से खुद के अंगों को,काटकर
तराजू पर रख दें |
मिमियाती बकरी सा कट जाएँ ,
उसका भी गोस्त बिकें ,
ताकि घूरती आँखों की चुभन से ,
उसका संवेदी वजूद बच जाएँ

18 October 2011

riste[रिश्ते]---प्रेम

       प्रेम उस समय आता है जब हमे उसकी उम्मीद नही होती ,
                 जब हम उसकी तलाश में नहीं होते ,
प्रेम के पीछे पड़ने से कभी सही साथी नहीं मिलता,
यह कवल  चाह और असंतोष उत्पन्न करता  है ,
प्रेम कभी हमारे बाहर नहीं होता ,यह हमारे भीतर होता है ,
इस बात पर  जोड़ ना दे की प्रेम तत्काल आ जाये|
शायद आप पर्याप्त तैयार नहीं हैं ,
या आप अपने प्यार को आकृष्ट करने के लिए पर्याप्त विकसित नही हो पायें है ,
"किसी को पाना है "सिर्फ इसीलिए रिश्ते ना बनायें,समझौता ना करे ,
अपने मानदंड स्थापित करें |
आप किस प्रकार का प्रेम चाहते हैं,?
अपने गुणों की सुंची बनाएँ,
और आप ऐसे व्यक्ति को आकर्षित करेंगे ,

जिनमे वे गुण होंगे ,|
आप इस बात की जाच करे की कौन से बात प्रेम को दूर रख रही है ,
क्या वह आलोचना हो सकती है ,?
या अयोग्य होने की भावनाएं ?
अनुपयुक्त मानदंड?
अंतरंगता  का भय ?
ऐसी धारणा की आप प्रेम के योग्य नहीं है ?


जब प्रेम आये तो उसके लिए तैयार रहें,
आधार तैयार करें,
औरप्रेम को पोषित करें,
खुद को प्रेम करे और आपको प्रेम मिलेंगा |
प्रेम के प्रति मन खुला रखें और उसका स्वागत करे,

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