27 August 2013

a "motivational" speech लीजिए !कलम आपके हाथ में हैं..!



हम सब का एक कुदरती दायरा होता हैं,जिसकी परिधि में रहने के लिए प्रकृति हमे तैयार करती हैं |जीवन संघर्ष के दौरान Survival Instinct के लिए हम सब लोग अक्सर जाने-अनजाने इस दायरे से बाहर निकल कर नए नए कीर्तिमान स्थापित करतें हैं|एक और दायरा होता हैं जिसे ‘आरामदेह का दायरा’ {Comfort Zone} कहतें हैं,जिसका मैं खुद काफी लंबे समय तक शिकार रहा हूँ,मेरे जीवन में क्रान्ति जोसेफ मर्फी की पुस्तक “आपके अवचेतन मन की शक्तियाँ”पढ़के आई... |एम्स से वर्षों पहले MBBS पूरा कर एक निजी कम्पनी में कार्यरत मेरी एक सीनियर दोस्त ने गपशप के दौरान मुझे जो बताया ,उसे सुनकर मेरे कान खड़ें हों गए  “हम छोटी छोटी चीजों में ही इतने रम जातें हैं की बड़ी बड़ी बातों/चीजों/सफलताओं  के विषय में सोचने लिए समय ही नही बचता”|

    दोस्तों !जीवन में बहुत अच्छी तरह से सफल होने के लिए,और इस तरह सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत भी न करनी पड़े तो अपने दिल की सुनिए..!मैं कहूँगा की “आपने शौक कों ही हम प्रोफेसन बना लें”,उदाहरण के लिए श्री सचिन तेंदुलकर का शौक हैं क्रिकेट खेलना ...आज क्रिकेट के देवता कहें जाते हैं,सुश्री लता मंगेशकर का शौक था..गायन उन्होंने भारतीय संगीत गायन  कों हीं नई दिशा दी|इसी तरह से कुछ ब्लोग्गर मित्र ब्लॉग्गिंग के शौक के चलते हिंदी-ब्लागिंग कों  नई पहचान दिए हैं | माइकल जोर्डन अमेरिका के प्रसिद्ध बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं ,जिनके बारे में,अमेरिका में एक आम राय हैं की वे “हवा में उड़ते हैं”|प्रारम्भिक संघर्ष के दिनों में अपने स्कूल के लिए खेलें ,बाद में वे ‘नार्थ-कैलायिना यूनिवर्सिटी’ तथा ‘शिकागो बुल्स’ के लिए खेलते रहे और आज विश्व भर में एक फेमस बास्केटबाल हस्ती हैं|जोर्डन की एक प्रसिद्ध पुस्तक हैं “Driven From Within” ,जिसमे उन्होंने लिखा हैं की “बड़ी कम्पनियां,बड़े संस्थान और बड़े खिलाडी तब भी बड़ी कड़ी मेहनत करते हैं ,जब उनका प्रदर्शन कोई नहीं देखता ,और जब वे अपना प्रदर्शन सार्वजनिक रूप से करते हैं तो उनको हर कोई देखता हैं”{“अर्थात वे बहुत उम्दा प्रदर्शन करतें हैं”}| जोर्डन ने अपने पहले घर में एक बास्केट-बाल का कोर्ट बनवाया था,जिसमे वे लगातार प्रैक्टिस करते रहते हैं ,उनका कथन हैं की-

“I Enjoy practicing more than Performance.Performance is the punctuation session during my Practice Session”.

दोस्तों  !जापानी भाषा के शब्द कैजेन का अर्थ हैं “लगातार और नियमित विकास”..जिसे हर अत्यन्त सफल व्यक्ति कों फालो करते पाता हूँ |

    दोस्तों !हमारे मस्तिष्क में इमोशनल व्यवहार कों नियंत्रित करने वाला ‘लिम्बिकसिस्टम’ होता हैं |  जिसमे मुख्य रूप से हिप्पोकैम्पस,एमिग्डेला,हाईपोथैलमस होते हैं |    दोस्तों ! पाश्चात्य वैज्ञानिको ने पहचान की हैं की “एमिग्डेला ही हमे कम्फर्ट जोन में रखने का कार्य करता हैं” |  यदि एमिग्डेला कों हम नियंत्रण रखें तो हम इस ‘कम्फर्ट-ज़ोन’ कों आसानी से पार कर सकते हैं | एमिग्डेला ही हमे ‘हमारी सीमाओं और कमियों पर फोकस कराता हैं’| आपने देखा होंगा की हम अक्सर कमिटमेंट करते हैं,न्यू ईयर रिजोल्यूशन्स भी लेते हैं,पर वे शायद ही पूरे होतें हों,क्यूंकि उन पर कायम नही रह पातें,तब तक ..जब तक..हम अपने रूटीन कों इम्प्रूव नही करते   |
हम सबको यह पता हैं की इस चीज {चीजों कों सही वक्त पर न करने की आदत से निपटना}के लिए हममे बर्निंग डिजायर होनी चाहिए |मैंने इस चीज से निपटने के लिए साप्ताहिक सेल्फ-इवुल्युशन का निर्णय किया और हर सप्ताह खुद से पूछता हूँ “मैंने इस हफ्ते exceptional क्या किया ?”जो उत्तर आता हैं ,उसी से अपनी प्रगति जांच लेता हूँ |
   दोस्तों!भविष्य में जो भी योजनाएं बनाएँ हम उनको अगर अवचेतन मन से प्रोग्राम्ड करें ,तो वह हर हाल में पूरी होती ही हैं,विजुलायिजेसन {भविष्य-दृष्टि}  के संदर्भ में इस ब्लॉग पर अनेक आर्टिकल/टेप्स/लिंक्स पहले से  हैं|यमन के एक पेट्रोल पम्प से पेट्रोल भरते भरते रिलायंस जैसी बड़ी कम्पनी स्थापित करने वाले स्वर्गीय श्री धीरूभाई अम्बानी का विजन/विजुलायिजेसन {भविष्य-दृष्टि} आज हजारों लोगों का चूल्हा जलाता हैं|उनके जीवन संघर्ष पर एक फिल्म “गुरु” भी बनी हैं|

    दोस्तों!जो घटता हैं ,और उस पर हमारी जो प्रतिक्रिया होती हैं,उसी से हमारा Output तय होता हैं... 

Event+Response=Output.

प्रोफेसर सिन्हा केन्द्रीय विश्वविद्यालय के विश्व-प्रसिद्ध शिक्षक हैं ,उनकी पत्नी भी एक दक्ष सर्जन हैं|उनके एक इकलौता पुत्र रजनीश था ,जो की मैनेजमेंट की डिग्री के बाद एक अच्छी जगह सेट था और आगे पढ़ने के लिए विदेश की एक यूनिवर्सिटी में एप्लाई किया हुआ था,जहां से उसे छात्रवृति भी  स्वीकृत हों गयी थी| उसकी जॉब के दौरान ही उसकी मुलाकात सुनयना से हुयी ,वह बहुत ही नेकदिल और खुशमिजाज लड़की हैं| रजनीश और सुनयना की दोस्ती ,प्यार से होते हुए शादी तक पहुंची और उनकी शादी भी हों गयी,शादी के बाद वे मसूरी हनीमून गए,जहाँ रजनीश कों भयानक फ़ूड पॉयजनिंग हों गयी और उसकी मृत्यु हों गयी | मिस्टर और मिसेज सिन्हा ने उस यूनिवर्सिटी से बात किया और पुत्र की जगह पुत्रवधू कों वहाँ पढ़ने के लिए कन्विंस कर लिया |एक दिन  जब सिन्हा दम्पत्ति के साथ मैं शाम की ग्रीन चाय की चुस्कियां ले रहा था,उसी दौरान उनका फोन बजा,वार्तालाप के दौरान मिस्टर सिन्हा और मिसेज सिन्हा के चेहरे पर आई रौनक  से यह बात बयाँ हों गयी की सुनयना ने उनके सन्तान की कमी कों पूरी कर दी हैं |
     दोस्तों रजनीश की मृत्यु एक इवेंट थी,पर सिन्हा के रिस्पोंस का आउटपुट यह हुआ की उनको बेटे की कमी उनकी पुत्रवधू महसूस नही होने देती ,अब सुनयना उनकी बेटी बन चुकी हैं |
 आज दोपहार लंच करके बैठा ही था की रीना का फोन आ गया|वों बोली “ डॉ.साहेब मेरी जिंदगी बेकार हैं...!”मैंने उसे तुरंत रोका |और तुरंत उसकी बीसियो खूबियां गिनाई |जीवन में हम जो भी पेशे में हों,जो भी कार्य कर रहें हों |हमेशा कुछ शक्तिशाली विचार अपने पास सजीव रखने होंगे,जो हमेशा हमारे साथ बने रहें ,चलते रहे ,हमे पोषित करते रहें |जो हमे विषम से विषम परिस्थितियों में सकारात्मकता की तरफ बढ़ने का हौंसला दें|

Anchor Your Mind with Powerful Thought.

मेरे एक सुपर-सक्सेज दोस्त अपनी सुबह के शुरुवात में खुद से कहते हैं-
“आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन हैं ,यह न तो कभी आया था,न कभी आयेंगा,आज मैं अपना सबसे बेस्ट दूँगा”|
हर सफल व्यक्ति का कोई न कोई anchor thought होता ही हैं |मैंने कही सुना था की भारती एयरटेल के मालिक मित्तल साहब का anchor thought हैं -

If not ME....then WHO?


If not NOW...then WHEN?

एक प्रसिद्ध उद्योगपति का anchor thought मैंने एक इंग्लिश डेली न्यूजपेपर में पढ़ा

“SUCCESS is about creating,EXTRAORDINARY THINGS,with ordinary peoples.

मेरा anchor thaought हैं –“do it now”.
और आपका ?



दोस्तों ,मान्यता {belief} क्या हैं ?
“जब किसी बात कों सत्य मानकर हम स्वीकार कर लेते हैं,और उस पर कायम रहते हैं तो वह हमारी मान्यता बन जाती हैं”

उदाहरण-
श्याम और राम नामक दो व्यक्ति हैं ,राम का मानना हैं की बिल्ली रास्ता काटे तो अशुभ होंगा ,जबकि श्याम मानता हैं की ऐसा कुछ नही होंगा |

कौन गलत हैं ?कौन सही ?

दोनों सही हैं ...और जो मानते हैं ,कम से कम उनके खुद के अलग अलग व्यक्तित्व के लिए सत्य हैं |

राम अच्छा स्कोलर रहा हैं ,जॉब इंटरव्यू के लिए निकला बिल्ली ने रास्ता काटा..अपशकुन की आशंका से घर वापस लौट आया ,जबकि श्याम हमेशा उससे कम अंक लाता था ,उसका उसी पोस्ट के लिए चयन हों गया |

   इसलिए जरूरत हैं की हम ऐसी इम्पवारिंग बिलीफ डेवलप करें जो हमारे समग्र हित में हों,विकास में हों ..क्यूँ न ऐसी मान्यताएँ पाला जाएँ, जो जीना सिखाएं,प्रेम सिखाएं... और यह मानना अभी से क्यूँ न शुरू कर दें की हमारा जन्म ही सफलता,समृधि,खुशी ,आनंद,आध्यात्मिकता कों चरम पर ले जाने हेतु हुआ हैं|

दकियानूसी ज्योतिषियों ,पुराने विकास-अवरोधक ख्यालात,जो दिस-इम्पवारिंग बिलीफ कों बढ़ाये,कों अपने जीवन से बिलकुल ही खत्म कर देना हैं |

पहचान –पहचान कर.....,एक एक .....खराब मान्यताओं कों ,
देर क्यूँ ,लीजिए....! कलम आपके हाथ में हैं?आपको आपकी कहानी लिखने से कोई नही रोक सकता|

विस्टन चर्चिल ने एक बड़ी खूबसूरत बात कहीं हैं- 
"कभी भी हौंसला नही छोड़ना ..कभी भी नही,कभी भी नही ..कभी भी नहीं ...कभी भी नही ..न महान रूप में,न साधारण रूप में ,न मोटे रूप में ,न छोटे रूप में ,सिर्फ सम्मान और अच्छी चीजों की सोंच में खुद कों झोक दीजिए ......!”
-समस्त पाठकों और ब्लागर मित्रों कों सादर प्रणाम ........


drakyadav@rediffmail.com
लेखन ,सूक्ति संग्रह कुछ चित्र भी -डॉ  अजय यादव |शेष चित्र गूगल से |
नोट-मौलिक एवं अप्रकाशित  रचना  |





23 August 2013

जीवन हैं अनमोल रतन ! "change-change" & "win-win" {a motivational speech}

जीवन में हमेशा परिवर्तन होता ही रहता हैं |कभी हम उच्चतर शिखर पर होते हैं तो कभी विफलता के बिलकुल समीप |हमे अपने स्वप्नों की जिंदगी वाली सोंच कों हमेशा खुद पर हावी रखना हैं |हम अक्सर परिस्थितिजन्य सोंच एवं उनके दृश्यांकन में उलझे रहते हैं ,हमे बुरी दशाओं में भी अच्छी चीजों की कल्पना करने का साहस करना होंगा ,क्यूंकि हम मनुष्य हैं और अपनी खुद की दुनिया के निर्माता भी हैं |दस वर्ष की उम्र से ही हम अपने विचारों और कर्मो की वजह से भविष्य का निर्माण करने लगते हैं | 

     

               गाय दूध नही देती ,हमे उसके थन से दूध कों जिस तरह से निकलना पड़ता हैं ,उसी तरह से जीवन में से सुख,आनंद,प्रसन्नता सफलता कों निकालना पड़ता हैं | 

    "एक बार जंगल में कछुआ और खरगोश के बीच रेस तय हुयी |खरगोश ने साफ़ सुथरा ‘थल मार्ग’ चुना और कछुए कों सुझाव दिया |जिसे कछुए ने मान लिया ,दोनों दौड़े ..खरगोश जीत गया |कछुआ अपनी कमजोरी तो जानता था परन्तु वह अपनी मजबूती पर फोकस करते हुए उसने खरगोश कों दूसरी रेस के लिए आमंत्रित किया| दूसरी रेस के लिए उसने जो मार्ग चुना उसमे जंगल-दरिया –जंगल-दरिया –जंगल का क्रम था ,उससे खरगोश भी सहमत हुआ,क्यूंकि पहली रेस में कछुआ भी विना किसी आपति के सहमती दिया था |इस बार कछुआ जीत गया ,अब जंगल के सारे जानवर खरगोश कों चिढ़ाने लग पड़े ...अब खरगोश का जब जीना मुश्किल होने लगा तो वह दुबारा कछुए के पास आया बोला मित्र चलो एक रेस और हों जाए रेसिंग ट्रैक तो वही रहेंगा{ जंगल-दरिया –जंगल-दरिया –जंगल}..किन्तु स्ट्रेटेजी अलग आपकी बार स्थल पर तुम मेरे पीठ पर और जल में मैं तुम्हारे पीठ पर इस प्रकार से दोनों दौड़े दोनों विजेता रहे ,और जंगल के बाकी जानवरो ने दोनों के सम्मान में भोज का आयोजन किये |दोस्तों यह competetion विथ cooperation का जमाना हैं |मिलजुल कर बढ़ने का वक्त हैं |वों जमाना गया जब केवल कछुआ ही हारता था ,अब खरगोश कों कछुए से मिलजुल कर कार्य करना पड़ता हैं"|


         हमारी समस्त समस्याए अल्पकालिक हैं |वे हमारे विकास के लिए हैं |दर्द एक गुरु हैं |नाकामयाबी सफलता की एक चौड़ी सड़क |हमारे चरित्र का निर्माण हमारे जीवन के कठिन अनुभवों से होता हैं | 

     "एक ग्वाला था ,घूम घूम कर मोहल्ले-मोहल्ले दूध बेचता था |एक घर में दूध देने गया हुआ था ,तभी शरारती बच्चों ने हैप्पी सिंह और ट्रेजेडी किंग नामक दो मेढको कों उसके दूध के डब्बों में दाल दिया |हप्पी सिंह तो अवसर की तलाश में लग गया की कब ढक्कन खुले और वह बाहर छलांग लगाये, उसने सुंदर हरि घास पर टिड्डे खाने और मेढकी के साथ अपने रोमांस के सपने देखे जबकि ट्रेजेडी किंग तो सोच लिए की अब उनका अंतिम दिन आ गया हैं,उन्होंने यमराज का विजुलायिजेसन किया और उन्होंने प्रयास भी  नही किया बचने का..दूध में डूबते - उतराते भगवान कों प्यारे हों गए |दूधिया आया , पहला ढक्कन खोला,हैप्पी पहले से तैयार था कूद गया बाहर ,जब उसने दूसरा ढक्कन खोला तो उसमे उसे ट्रेजेडी किंग मरा हुआ मिला ,दूधिये ने उन्को निकाल फेका और दूध बेच दिया |दोस्तों दोनों के लिए एक सामान अवसर और परिस्थितयां थी ,पर सोच और नजरिया अलग अलग था |दोस्तों हैप्पी सिंह बनिये |हर विषम परिस्थिति एक शिक्षक हैं"| 

      मैंने देखा हैं की मेरे अस्पताल में कुछ लोग हमेशा रिएक्ट करते हैं ,सीनियर्स हैं इसलिए उनसे कह नही पाता की “बॉस ! रिएक्ट नही रिस्पोंड कीजिये” | मानव इतिहास में ईर्ष्या,क्रोध ,बदला लेने की भावना मानव के प्रबल शत्रु रहे हैं ,रामायण कों देखें  तो कैकेयी ईर्ष्या का प्रतीक,लक्ष्मण क्रोध के एवं रावण रिवेंज के प्रतीक हैं |सारा मामला क्रोध से शुरू हुआ ,जो हजारों जीवित जीवो कों काल के गाल में ले गया |सबसे बड़ी जिम्मेदारी और टाईम मैनेजमेंट वाले गुणों के कारण हनुमान आदर के सबसे बड़े पात्र रहे ,उन्होंने कर्मठता और बहादुरी से हर बात कों निश्चित समय पर पूरा किया व् जिम्मेदारी ली |रावण ने उनकी पूछ जलाई उन्होंने उसकी लंका |कारपोरेट जगत की भाषा में “ले पंगा ..दे पंगा”|

        अक्सर कुछ लोग बिना वजह इन्सल्ट करते हैं ,ह्युमिलेट करते हैं ,हम पर चिल्लाते हैं |पर दोस्तों हमारी इजाजत के बिना कोई हमारी बेइज्जत नही कर सकता,हम अपने बारे में क्या सोचते हैं, यह ज्यादा महत्वपूर्ण हैं इस बात की तुलना में की  दुनिया के लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं |यह भी महत्वपूर्ण हैं की हम अपनी क्षमताओं की तुलना में क्या कर रहे हैं ,दूसरों से अपनी तुलना हमे कदापि नही करना चाहिए हमारी दूसरी कापी इस दुनिया में हों हीं नही सकती,हम हरेक व्यक्ति का उदेश्य और धरती पर आने का परपज अलग हैं | 

       हमारे देश में PCR{पालिटिक्स,क्रिकेट और रेलिजन} पर सबसे ज्यादा वक्त खर्च किया जाता हैं |हम बाहरी दुनिया में इतना ज्यादा व्यस्त रहते हैं की खुद से ही नही जुड़ पाते ,जिससे हममे आध्यात्मिक खोखलापंन अंकुरित होना प्रारम्भ करने लगा हैं ,अपने मन और जीवन कों पोषित करने के लिए हमे मौन में बैठना होगा,थोडा बहुत योग और ध्यान में लगना होंगा, ध्यान से रक्त में लैक्टेज का स्तर घटता हैं |ज्यादा लैक्टेज से अनिद्रा व् चिंता होती हैं |ध्यान से DEHYDRO-EPI-ANDRO-STERONE का स्तर बढ़ता हैं जो की ब्रेन की VITALITY का सूचक हैं |ध्यान से ब्लड प्रेसर तथा कोलेस्ट्राल का स्तर कम होता हैं |आर्टेरियो-स्केलेरोसिस का खतरा भी कम होता हैं | 

           आपको अपने जीवन में सबसे ज्यादा संतुलित करने का कार्य आपकी जीवन-संगिनी करती हैं |कोई भी  पति/पत्नी 100/100{HUNDRED OUT OF HUNDRED} तब तक नही हों सकता जब तक आप उसकी छोटी छोटी बातों के लिए प्रसंशा करना नही शुरू कर देते,हर अच्छी बात पर उसका मान बढाईये,उनके मन की सुंदरता पर जाकर जरा देखिये |कभी पत्नी जी ने स्वादिष्ट भोजन पकाएं हों और आप उनकी आँखों में आँखे डाल कर उनकी प्रसंशा में चार शब्द कह कर देखा हैं ?नही न ..आज कह कर देखिये ,{हाँ !झूठी बातों के लिए प्रसंशा नही कीजियेगा }..चमत्कार होने लग पडेंगा ,उनसे इतना ज्यादा सहयोग मिलेंगा,की जिंदगी में आप अब ५००० फुट की बजाय १५००० फुट पर कांफिडेंस से उड़ान भर सकेंगे |{हालांकि मेरी शादी नही हुयी हैं ,यह मेरे बड़े भाईयों/शादीशुदा क्लायिन्ट्स का अनुभव हैं ,की मेरा यह फार्मूला उनके लिए सुपर हिट रहा  हैं ..आशा हैं ..आप सब अपने अनुभव मुझसे शेयर करेंगे }

       जिस तरह स्त्री का गहना उनका मान हैं ,उनका सम्मान हैं ,उनकी देवी रूप में पूजा हैं ,उसी तरह से पुरुष का गहना उनका काम {WORK}हैं |मेरे लिए GODका अर्थ {GO ON DUTY}भी वही हैं जो मेरे सर्वोच्च हित में हैं ,दोस्तों याद रखिये हमारे लिए ईश्वर का स्वरुप वैसा होना चाहिए जो हमारे विकास और आध्यात्मिक उन्नति में मदद करे,न की दकियानूसी भावनाए,व दिस-इम्पावरिंग विश्वासों एवं कटुता तथा आतंकवाद कों बढ़ाये | 

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एक अस्पताल में एक बोर्ड लगा था ,जिसपर लिखा था “यहाँ एक व्यक्ति आया था ,जिसे कुत्ते ने काट लिया था ,कुछ इंजेक्सन लगे वों ठीक होकर वापस गया”...यहाँ एक व्यक्ति आया था जिसे साप ने काट लिया था ,उसकी बोडी कों जहर से मुक्त किया ,एक हफ्ते में वापस गया ....यहाँ एक व्यक्ति आया जिसे आदमी ने काट लिया था ..वर्षों से उसका इलाज चल रहा हैं आज तक ठीक नही हुआ" ...

क्या आदमी आदमी कों काट सकता हैं ?

....हा ,बुरा बोलकर ,कटु बोलकर ..शब्दों के जरिये जख्म देकर |

इलाज क्या हैं ?

हम ने इसके लिए टीका खोजा हैं ..

.#१ टीका-करन प्रक्रिया


हर सुबह सोकर उठने के बाद और सोने से पहले कई बार मन में दुहराना हैं – 

“Day by Day in everyway i’m getting Better and Better”.

हर  दिन ,हर तरीके से मैं और बेहतर होता जा रहा हूँ ...   

                   एवं


 

मेरी दुनिया में सबकुछ श्रेष्ठ और कल्याणकारी हैं |


काटने वाली बिमारी का समूल नाश करने के लिए आईये संकल्प लें –

“मैं आज से जाने-अनजाने में किसी कों भी नही काटूँगा”..

मान लीजिए .घर से निकलते ही,कुछ दूर चलते ही ..रस्ते में हैं काटने वाले का घर...................... और आपको काट ही लिया उस कमबख्त ने , तब ....

तब आपको रिस्पोंस नही देना हैं ,कोई आर्ग्युमेंट नही करना हैं ,बल्कि खुद के बारे में दो सकारात्मक कमांड मस्तिष्क कों देने हैं |जैसे कोई कहे “डॉ अजय तुम पागल हों “तो मैं कहता हूँ “मैं जानता हूँ की मैं विशिष्ट और सुंदर मस्तिष्क वाला व्यक्ति हूँ ““मैं सकारात्मक चिंतक हूँ ,मेरे विचार हमेशा उच्चतर होते हैं”


.............................................लेखन -डॉ अजय 


16 August 2013

"Attitude of Gratitude" तेरा एहसान हैं बाबा ! "stress management"


तेरा एहसान हैं बाबा !{Attitude of Gratitude}

आईये सोचिये ...पिछली बार आप कब किसी चीज के प्रति आभार व्यक्त किये थे ?क्या आप अपने जीवन की हर चीज ,हर अच्छी चीज के प्रति कृतज्ञ हैं ?अपनी चमचमाती गाडी या साईकिल,अपने शानदार भवन ,अपने सुंदर डेकोरेटेड आफिस,हर महीने आपके अकाउंट में सैलरी के रूप में आने वाले असीमित पैसे ....परिवारजनों का असीमित प्रेम ..आप किस चीज के लिए ,अभी जल्द हीं कृतज्ञता व्यक्त कियें हैं ?अगर आपके जीवन में ये सब अभी अपार मात्रा में नही भी  हैं तो भी आप कृतज्ञता के माध्यम से इन सबको अपने जीवन में आकर्षित कर सकतें हैं |दोस्तों स्ट्रेस मैनेजमेंट की इस तीसरी कड़ी में मैं आपका दोस्त हाज़िर हूँ ,सर्वाधिक शक्तिशाली यूजफुल इमोशन “कृतज्ञता ज्ञापन” कों लेकर ,जो हर हाल से हमारी परिस्थिति कों मनचाही अवस्था में ले जायेंगी |
 हम मनुष्य लोग सामाजिक जीव हैं ,हमारी एक individual पहचान होने के साथ साथ एक सामाजिक पहचान भी हैं |
जब हम किसी चीज के प्रति कृतज्ञ होते हैं ,तो उसे प्रेम देते हैं |हमारा रोम रोम बहुत ही सकारात्मक प्रेम उर्जा से भर जाता हैं ,और दोस्तों हमारे एहसास के अनुसार हमारी फ्रीक्वेंसी बदलती हैं ,और हम उस फ्रीक्वेंसी पर मौजूद अन्य लोगो कों आकर्षित करते हैं |यही कारण हैं की जब हम प्रेम महसूस करते हैं तो हमारे जीवन में हर अच्छी चीज की {वांक्षित} बाढ़ सी आ जाती हैं जबकि जब हम प्रेममय  नही होते तो हमारे जीवन में अवांक्षित चीजे बढ़ने लगती हैं |
 रहोंदा बर्न ‘द पावर’ में  लिखतीं हैं “किसी ऐसी चीज या व्यक्ति के बारें में सोंचे ,जिसके लिए आप कृतज्ञ हों सकते हैं |आप उस व्यक्ति कों चुन सकतें हैं जिसे आप दुनिया में सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं |उस व्यक्ति पर ध्यान केंद्रित किजीयें और उन सभी चीजों के बारे में सोंचे ,जिनकी वजह से आप उससे प्रेम करते हैं और जिनके लिए आप कृतज्ञ हैं |फिर मन ही मन या बोलकर उस व्यक्ति कों उसकी वो सारी विशेषताएं बता दें जिनके लिए उसे प्रेम करते हैं और कृतज्ञ हैं ,वह व्यक्ति वहाँ हों या न हों ,तब भी आप उसे वैसे ही बताएं जैसे वह वहीँ पर हों |और बताते समय आप महसूस किजीयें की कृतज्ञता की भावना हमारे हृदय और शरीर में भर रहीं हैं”|इस सरल अभ्यास से आप जो प्रेम देतें हैं वह निश्चित रूप से उस सम्बन्ध और आपके जीवन में लौटकर आयेंगा |
  मैं अक्सर खुद से कहता रहता हूँ “मेरा मस्तिष्क बहुत  प्रबल सामर्थ्यवान हैं,दुनिया के किसी भी सुपर-कम्प्यूटर में इसकी बराबरी की औकात नही , इसके लिए मैं उसका शुक्रिया अदा करता हूँ ,मेरा इम्यून सिस्टम इतना प्रबल हैं की मुझे याद नही पड़ता की पिछली बार मैं कब बीमार पड़ा था ,मैं अपने प्रतिरक्षा तन्त्र के प्रति एहसानमंद हूँ,जो रोंगो के प्रति अभेद बैरियर हैं |अपने शरीर के हर अंग के प्रति एहसानमंद हूँ जिनकी हीलिंग पावर अदभुत हैं |मैं हर उस चीज के लिए एहसानमंद हूँ जो विभिन्न श्रोतो से मुझतक आ रहीं हैं,मैं उस अपार धन के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ जो विभिन्न श्रोतो से मुझतक आ रहा हैं ,मैं अपने बिलो कों जमा करते वक्त हमेशा उस पैसे कों आशीर्वाद देता हूँ  की “वह पैसा ....भूखो कों भोजन दें,फटेहालों कों कपड़ा दें और कई गुना होकर मुझ तक लौटें “उस पानी के लिए एहसानमंद हूँ जो मैं पीता हूँ ,उस भोजन के प्रति एहसानमंद हूँ जो मैं खाता हूँ |इस सुंदर पृथ्वी पर उपस्थित हर खूबसूरत नियामतों के लिए मैं बहुत एहसानमंद हूँ” |

 राधेश्याम नामक मरीज़ ICU के बेड नॉ २४ में भर्ती हुआ था |उसको ब्रेन ट्यूमर था |डाक्टरों के सर्वाधिक एजुकेटेड न्यूरो-सर्जनो के एक समूह ने मीटिंग के बाद उसके घरवालों से मिलकर तय किया की आपरेशन तो वे करेंगे पर मरीज के बचने की संभावना बिलकुल नही हैं |राधेश्याम एक नौटंकी कंपनी का प्रसिद्ध जोकर था ,अपने अंतिम समय में {जैसा डाक्टरों ने कह दिया था} भी वह हँसता –हंसाता रहता था |एक दिन संयोग से उस तरफ से एक न्यूरो डाक्टर के सह्योंगी के रूप में मेरा उसके बेड पर जाना हुआ ,मैंने महसूस किया की राधे  ऐसा व्यवहार कर रहा हैं जैसे उसे कुछ हुआ ही नही हैं ,तभी मेरे दिमाग में यह कौंधा की ‘यह ठीक हों जायेंगा’ मन में आया की इससे बात करूं ,क्यूंकि मेडिकल साईंस की अपनी एक सीमा हों सकती हैं ,किन्तु मेटाफिजिकल साईंस और क्वांटम फिजिक्स असीम विचार धारा की ओर ले जातें हैं .क्वांटम फिजिक्स तो यहाँ तक कहता हैं की “उस किसी भी चीज की आप कल्पना तक नही कर सकते जिसका अस्तित्व न हों” |मैंने सोचा की अगर मैं यह सोच रहा हूँ की राधे ठीक हों सकता हैं ,तो जरुर इसकी सम्भावना जरुर इस ब्रम्हांड में हैं |मैंने उसके घर वालों से बात की और उनसे कहा की वे राधे कों पूरा विश्वास दिलाएं की वो ठीक हों चुंका हैं ,उसे बार बार उस वक्त की याद दिलाएं जब वो बिलकुल मस्ती में झूमता रहता था ,उसे रोजाना अपने स्वास्थ्य ,अपने सुधरते मस्तिष्क के प्रति एहसान मंद होना हैं,जो भी फल .जल भोजन ,दवाए वो ग्रहण कर रहा हैं सब उसके लिए अत्यन्त यूजफुल हों रहीं हैं ,उन सब के प्रति उसे एहसान मंद होना हैं |दिन में कम से कम दो बार वो ऐसी कल्पना करें की वह विल्कुल ठीक होकर इस अस्पताल से जा रहा हैं |सभी डाक्टर ,जो उसके जिंदादिली के मुरीद हैं ,जिनमे मैं भी हूँ ,बधाईयां दे रहे हैं” |ठीक  ४थें  महीनें हम सभी लोग राधेश्याम के साथ अस्पताल के बाहर वाली दूकान पर काफी पी रहें थे और खिलखिला रहें थे |

अपने अनुभव से मैं ये जानता हूँ की बुरी से बुरी स्थितियों कों लोगो ने कृतज्ञता के माध्यम से बदला हैं |ऐसी बीमारियाँ जिनके ठीक होने की सम्भावना नही थी लोगो ने कृतज्ञता के माध्यम से जाने-अनजाने में ठीक किये हैं |टूटे रिश्ते जुड़े हैं |जिंदगियां संवरी हैं |
कृतज्ञता,स्ट्रेस का समूल नाश करती हैं ,हमारे जीवन में जो कुछ भी नियामतें हैं जब हम उनके प्रति कृतज्ञ होना शुरू कर देतें हैं ,तो हमारी भावनाएं बदल जाती हैं ,हमारी फेक्वेंसी बदल जाती हैं ,हम स्ट्रेस फुल कंडीशन से बाहर आकर सकारात्मक और प्रेममय हों जाते हैं ,विश्व के हर मसीहा ,हर धर्म-स्थल पर,हर आरती में ,हर प्रार्थना में कृतज्ञता कों मुख्य टूल की तरह होना होता हैं ,क्यूंकि कृतज्ञता से शक्तिशाली इमोशंस शायद हीं हों |

हमे जीवन में निम्न ३ प्रकार से कृतज्ञ होना चाहिए –

१]अतीत में जो भी नियामतें मिली हैं ,उनके प्रति एहसानमंद होना और ह्रदय से महसूस करना हैं |
२]वर्तमान की समस्त नियामतों के लिए एहसानमंद और हृदय से आभारी होना हैं |
३] भविष्य में जीवन में हमारी जो भी आपेक्षाएं हैं,उनके प्रति इस तरह से कृतज्ञ होना हैं जैसे वो पूरी हों गयी हों |
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दोस्तों ..हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने एक शोध किया उसने कुछ लोगो कों मदर टेरेसा पर आधारित एक फिल्म दिखाई और लोगो कों उस विषय में कागज पर अपने विचार लिखने कों कहा...
कुछ लोग जिन्होंने फिल्म देखने के बाद पोजिटिव प्रतिक्रिया दी थी उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी हुयी पायी गयी |
कुछ लोग जो उदासीन रहें ,उनकी प्रतिरोधक क्षमता पहले जैसी ही रहीं ..|
कुछ लोग जिन्होंने निगेटिव रिस्पोंस दिए उनकी प्रतिरोधक क्षमता घट गयी थी |
तो आपको अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए कौन सा टोनिक पीना हैं..झंडू या केसरी जीवन.... ,
कोई भी नही.........सब बेकार हैं,उस फार्मेसी के आगे ..जो प्रकृति ने हममे बनायीं हैं  |
बस सकारात्मक रिस्पोंस की आदत डालनी हैं .........
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                  लेखन –डॉ अजय यादव 

14 August 2013

प्रेम ...प्रेम ...प्रेम बस प्रेम रह जाता हैं|

Stress Management  लेख से सम्बंधित अगली कड़ी पेश करते हुए ,मैं अजय आप सब से ...स्वीकार करता हूँ ,की मैं खुद दिन रात भयानक  स्ट्रेस के माहौल में काम करता हूँ लेकिन मैं स्ट्रेस कों खुद पर बिलकुल हावी होने  नही देता |स्ट्रेस और तनाव जीवन के लिए वरदान भी  हैं...वो कहतें हैं न "शांत समुंद्र में नाविक कभी कुशल नही बन सकता" 'रामधारी सिंह' ''दिनकर'' की एक कविता की चंद पंक्तियाँ याद आ रहीं हैं -

मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं

स्वप्न के पर्दे निगाहों से हटती हैं .

हौंसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर !

ठोकरें इंसान कों चलना सिखाती हैं |

स्ट्रेस कों हद से ज्यादा नही बढ़ने देना हैं... नही तो यह भिन्न भिन्न रूपों जैसे क्रोध,अवसाद,चिडचिडापन,माईग्रेन आदि के रूप में हमे सताता हैं |आधुनिक विज्ञान ने यह सिद्ध कर दिया हैं की "हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका हमारे एक-एक विचार के अनुसार ....और उस विचार के एक एक शब्द ...के तदनुसार अपनी प्रतिक्रिया देती हैं |यहीं नही हर विमारी के पीछे कुछ न कुछ मानसिक कारण जरुर होते हैं चाहे वह खुद कों प्यार न करना हों,खुद कों अप्रूव न करना,खुद कीसीमाएं  बाधना हों ,खुद कों किसी न किसी तरह से दोयम दर्जे पर रखना हों ,घृणा हों या हीन भावना हों या गिल्ट हों |गिल्ट तो बिलकुल यूजलेस इमोशन हैं ,यह न तो किसी कों बेटर फील करा सकती  हैं ,न ही सिचुएशन बदलने देती  हैं |
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स्ट्रेस मैनेजमेंट पर हजारो आर्टिकल हैं |स्ट्रेस से निपटने का मेरा अपना तरीका अलग हैं |उन तरीकों में से एक प्रेम पर आईये कुछ बातें करें-
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हम सभी इस असीमित संसार और श्रृष्टि की असीमित हस्ती हैं |इस संसार में लगने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात नियमों में आकर्षण का नियम एक प्रमुख नियम हैं ,जो हमसे कहता हैं की 'इस संसार में लेंन-देंन{आदान-प्रदान } के लिए हमारे सिवा कोई और हैं ही नही'.|
हम इस ब्रम्हांड कों.. जो भी ...हम  देते हैं वह हमे ब्याज सहित लौटा दिया जाता हैं |हम सभी मानव हैं ,हमारा अस्तित्व ही प्रेम के सायें में पलता हैं ,फिर क्यूँ न प्रेम देना शुरू करे ,हमे जीवन से असीम प्रेम करन अभी से शुरू कर देना  हैं ,जब हम जीवन से असीम प्रेम करना शुरू कर देते हैं तो इस दुनिया की हर सीमा गायब हों जाती हैं |धन ,स्वास्थ्य,आनंद और संबंधो में मौजूद खुशी की हर सीमायें अपना अनंत तक विस्तार करतीं हैं |सारे प्रतिरोध खत्म |हम असीमित उर्जा ,रोमांच और जीवन उर्जा के सागर में डूब जातें हैं |

प्रेम ...प्रेम ...प्रेम बस प्रेम रह जाता हैं :-

कैसे हम अपने जीवन की हर पसंदीदा वस्तु से प्रेम करें ?जब हम किसी व्यक्ति के साथ प्रेम में होतें हैं तो सिर्फ प्रेम देखतें हैं,प्रेम सुनते हैं ,प्रेम बोलतें हैं पुरे दिल से सिर्फ प्रेम और प्रेम ही महसूस करते हैं |
हर स्थिति ,परिस्थिति और घटनाओं में हमे अपनी प्रिय चीजों की ही तलाश करनी हैं ,सुंदर सड़के ,सुंदर इमारते ,अच्छी कारें ,अच्छी टेक्नोलाजी जो भी हमे पसंद हों ,हमे हमेशा तलाश करनी चाहियें |मेरी पसंद बुलेट मोटरसाईकिल हैं ,जब भी मैं शहर निकलता हूँ तो उसी पर सवारी करता हूँ ,मुझे अच्छे विचारों वाले लोग प्रिय हैं ,उनसे मिलता जुलता हूँ |अपने प्रिय स्टोर्स कों खोजता हूँ |प्रकृति के सामीप्य में,उसकी रंगत ,पेड़,सुंदर फूल ,सुगंध की तलाश करता हूँ ,न केवल अपनी प्रिय चीजे/लोंगो की तलाश करता हूँ वल्कि उनसे अतिशय प्रेम भी प्रदर्शित करता हूँ |
मेरे मन में हमेशा एक सूची रहती हैं ,उन वस्तुओ ,जगहों ,चीजों की जिनसे मैं बहुत प्रेम करता हूँ ,यह सूची लगातार अपडेट होती रहती हैं |कभी कभार ऐसी परिस्थितियाँ या लोग मिल जाते हैं ,जिनसे मुझे कुछ पल के लिए अच्छा महसूस होना बंद हों जाता हैं तो मैं अपनी सूची पर गौर करता हूँ और फिर से अच्छा महसूस करने लगता हूँ |

   प्रेम भरी इस दुनिया में जीते जीते मैंने महसूस किया हैं की प्रेम में मैं सजग हों गया हूँ ,अब गुलाब के गमले के बगल से यूँ ही.. नही निकल लेता ,अब उसमें खिले ताज़ा लाल पुष्प का सौंदर्य और सुगंध मेरे मन कों प्रेम से भर देता हैं ,अब मैं भोजन कों पुरे स्वाद और कृतज्ञता से ग्रहण करता हूँ ,जिससे भोजन कई गुना ज्यादा शक्तिशाली होकर पोषण देता हैं |अब बारिस में मुझे जुकाम नही होता बल्कि ठंडी-ठंडी फुहारे जीवन उर्जा कों जगाती हैं |मेरा मन मेरे जीवन की हर अच्छी चीज की खोज के प्रति निर्देशित हैं |
अक्सर मेरे मन में एक विचार उठता हैं.... मैं ऐसा क्या देख ,सुन और महसूस कर रहा हूँ जो मुझे रोमांचित कर रहीं हैं ,खुशी ..आनंद उर्जा से सराबोर कर रहीं हैं ,मन तुरंत अपने काम में लग जाता हैं और ऐसी परिस्थितियो ,लोगो कों खोज खोज कर मुझ तक लाता हैं |प्रेम का तो मेरा बहुत ही शानदार अनुभव रहा हैं ,दोस्तों अंत में मैं सिर्फ इतना कहूँगा ..की अगर हम जीवन का नियंत्रण अपने हाथ में नहीं लेंगे तो यह जीवन हमे नियंत्रित करने लगता  हैं ,और हम गुलाम बनने के लिए थोड़े पैदा हुयें हैं |
लेखन  - Dr.Ajay Yadav





13 August 2013

चिंता{stress} चिता सामान हैं ..!


अक्सर दुनिया में जब कोई हमारे मन मुताबिक कार्य नही करता तो हमे stress होने लग जाता हैं ,चाहे भीड़ भाड़ में ,ट्रैफिक से stress हों या दोस्तों से बात-चीत के दौरान |आज इस लेख में हम सिर्फ इतना जानेंगे की stressसे नुक्सान क्या क्या हैं ?आज सिर्फ इसी पर हम आपसे चर्चा करेंगे |
 हमारे घरों में बिना वजह के stress क्रियेट करने का मुख्य कार्य टीवी करता हैं |टीवी यानी बुद्धू बक्सा brainकों निष्क्रियता की राह दिखाने के साथ साथ समझने की क्षमता {काग्नीटिव स्किल्स}भी  कम करता हैं ,मेरे निजी विचार से,ऐसे घर में जहां स्कूल या कालेज गोइंग युवा ज्यादा हों ,उस घर में टी वी होना ही नही चाहिए क्यूंकि समाचार चैनेल्स अब निष्पक्ष राय नही देतें |


  जब ज्यादा stressहोता हैं तो नींद कम आती हैं ,जिससे किसी चीज पर concentrate करने की क्षमता कम हों जाती हैं |
Stress जब बढता जाता हैं तो brain सेल्स में Glutamate Receptors बढ़ने लगता हैं ,जो की Brainके कार्यों कों अवरोधित करने के साथ साथ brainसेल्स की मृत्यु के लिए भी जिम्मेदार हैं |
बढते तनाव से “लडो या भागो” हारमोन स्रावित होता हैं |बैज्ञानिको ने पाया हैं की Hydro-corticosone ,मष्तिष्क के हिप्पोकैम्पस कों डैमेज करता हैं |’हिप्पोकैम्पस’ याद शक्ति और सीखने का सेंटर हैं |hydrocorticosone के ज्यादा श्रावण से brain साईज घटने का खतरा रहता हैं |
तनाव में कुछ neurotransmitter जैसे नोरेपिनेफ्रिन या सीरोटोनिन भी  स्रावित हों सकते हैं |जो तीक्ष्ण विचार शक्ति कों बढ़ाते हैं ,परन्तु ज्यादा यूज होने पर इनका भंडारण  खतरे में पड जाता हैं |
 अब बात करें दवाओ की तो जान लीजिए  की एस्पिरिन जो की सभी द्वारा universally accepted सुरक्षित दवा मानी जाती हैं ज्यादा मात्रा में brainके लिए poison का कार्य करती हैं |कुछ potentially toxic या poisonous drugs में BARBITURATES,Bromides,Benzodiazopama,phenothiaz,Haloperidol,lithium आदि मस्तिष्क के लिए जहरीली हों सकती हैं |
नीद लाने के लिए खाने जाने वाली दवाए stress कों रिमूव करने के लिए  alprazolam या trika सरीखी दवाएं रेगुलार लेते रहने से इनकी habbit पड़ने की आशंका रहती हैं |कई परिस्थितियों में ये दवाए रोगी के लिए वरदान भी सिद्ध होती हैं |
मैं तो वही कहूँगा जो गोल्फ के महान खिलाडी “बेन होगांन” ने कहा था...

 “जैसे-जैसे आप जीवन की राह में आगे बढते जायेंगे ,आपको रास्ते के गुलाबों कों जरुर सूंघना 


चाहिए ,क्यूंकि यह बाज़ी सिर्फ एक बार आपके हाथ में आई हैं” |





note:-यह लेख तनाव पर लिखे जाने वाले लेखो की श्रृंखला में एक कड़ी हैं , लेंखो में वर्णित दवाओ  और सलाह हर व्यक्ति के लिए भिन्न भिन्न हों सकती हैं,आप अपने डॉ से संपर्क किजीयें |


10 August 2013

कुछ कहना हैं तुमसे .............

 
 
 
 
 
 
 
मेरी शुभकामनाएँ....
मेरी दुवाये .......
मेरी सदभावनाएँ....
हमेशा तुम्हारें  साथ हैं ,
 तुम कहती हों  ...मैं तुमको इत्ता नही जानता ...
लेकिन मैं हर सच्चे इंसान कों जानता हूँ ,
जिनके मन में खुसबू होती हैं ,
जो जाति/धर्म/लिंग-भेद
की हर सीमा से उपर ...सोचते हैं |
वरना आज किस लड़की कों
इतनी फुर्सत हैं ......
की वह सुदूर बैठे ,एक मित्र कों
अपनी कविता सुना सके ....
अपने जज्बात बता सके |
निश्चल मन से विश्वास कर सकें
तुम कविता लिखती हों  |
तुम अपनी कविता में सारा दर्द उतारो...|
लिखो और नोटबुक बंद कर दो.........
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 हर सुबह,जिंदगी नई हैं .....
उठो ताज़ी,हवा खींचो लग जाओ ...
नई परिभाषाये गढ़ने में ...
नई सफलता गढ़ने में....
तुम्हारा वजूद और तुम ....दोनों .
किसी के विचारों के मोहताज़ नही ,|
किसी बवंडर में हिल नही सकते ..
ऐसी किसी बवंडर की औकात नही ||
किसी के तुच्छ ख्यालात ...
तुम्हारे पैरों की बेडी बन गए ??
तुम्हारे मन में इतनी कमजोरी....
संगदिल पत्थर देवता बन गए ??
उस पल का इन्तेजार हैं ..
जब कायनात ...फिर झूमेंगी ,
तुम्हारी रंगत नई नवेली दुल्हन सी होंगी ...
बादलों में बिजलियाँ चमकेंगी |
मनो में अरमान कौधेंगे ..
करके श्रृंगार धरा ,नव पल्लवन ...
नव सुंदर सृजन करेंगी |
तुम खिल-खिलओंगी हंसोंगी,गाओगी .
सब उन खुशियोँ में खों जायेंगे .......
सुर में सुर मिलायेंगे ......
 

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