24 September 2012

"power of your subconcious mind" अवचेतन मन की शक्तियाँ


हमारा अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली हैं |यह हमारे मन का ९०% भाग हैं किन्तु यह उस गाड़ी की भाति कार्य करता हैं जिसका ड्राईवर चेतन मन [१०%]हैं |आईये आज हम अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में बात करतें हैं |

१]Riflex Action:-

मित्रों !अवचेतन मन की यह शक्ति हमे आपातकालीन स्थितियों से हमे बचाती हैं ,जैसे अग्नि पर पैर पड़ते ही अचानक हटा लेते हैं ,सांप को देखकर उलटे ही भाग खड़े होतें हैं |सीडी से गिरते गिरते संभल जातें हैं |पहले हम साईकिल सीखते हैं तो धीरे धीरे किन्तु जब हम पूरी तरह सीख जातें हैं तो लोगों से बात करते हुए भी सयिक्लिंग करते हैं |

२]टेलीपैथी :-

 ईश्वर ने हमारे मन मस्तिष्क में एक TRANSMITTER और एक RECIEVER फिट कर रखा हैं जों इतना शक्तिशाली हैं की पूरे ब्रम्हाण्ड में इतनी शक्तिशाली मशीन किसी इंसान ने नही बनायीं हैं |चूँकि हम इस मशीन को चलाना नही जानते इसलिए इसकी शक्तियों से अनजान हैं |

३]अंतरात्मा की आवाज़ [रडार –CONSCIENCENESS]:-

दोस्तों जब भी हम कोई गलत कार्य करतें हैं तो अंदर से आवाज़ आती हैं “ये गलत हैं”…भगवान ने इंसान को गलत कार्य से रोकने के लिए उसके भीतर यह रडार सेट कर रखा हैं जों अवचेतन मन के नियंत्रण में हैं |

४]यादशक्ति :-MEMORY के ३ स्टेप होते हैं :-

१]Ragister 2]Storage 3]Recalling
दोस्तों Ragister और Recalling चेतन मन की विषय वस्तु हैं |जबकि Storage अवचेतन मन से जुड़ा होता हैं |किन्तु यदि Storage सही से हुवा हैं तो रिकाल्लिंग आसान हों जाती हैं |

५]भावना का गुणांक [EMOTIONAL Quotient]:- दोस्तों भावना २ प्रकार की होती हैं –

१]सकारात्मक भावना :-प्रेम,दया ,क्षमा ,कृतज्ञता ,प्रफुल्लता ,Faith,Tolerance,करुणा |
२]नकारात्मक भावना :-डर,क्रोध,घृणा ,ईर्ष्या ,sadism,चिंता,निर्दयता आदि |
                                                
उच्च IQ ही सफलता का मानक नही हैं बल्कि EQव्यक्ति को सफल बनाता हैं |उच्च शिक्षित व्यक्ति कभी कभार कम EQ के कारण हमारे ORGANISATION को बड़ी हानि पहुंचाता हैं |मर्लिन मुनरो ,अभिनेत्री दिव्या भारती ,हिटलर ,गुरुदत्त सब बहुत उच्च IQ के थे पर इनमे EQ उच्च नही था |इन सबने आत्महत्या की थी|EQ बढ़ाने के लिए सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाना होंगा |

6]Treasure of Knowledge[त्रिकाल ज्ञान]:-

हमारे अवचेतन मन से बहुत ,भविष्य ,वर्तमान कुछ भी नही छुपा हैं |यह त्रिकालदर्शी हैं ,यह भविष्य की घटनाओं को भांप लेता हैं और कभी कभार हमे चेताता भी हैं |संजय ने महाभारत की भविष्यवाणी इसी आधार पर की |इसी के आधार पर NOSTRADOMUS इतना प्रसिद्द हुआ |

७]प्रज्ञा/समझदारी /WISDOM:-

सही समय पर सही निर्णय लेना ही अवचेतन मन की विशेषता हैं |जब भी आप किसी गफलत में पढ़ने वाले हों निर्णय आप अवचेतन मन पर छोड़ दें यह आपके विश्वासों के अनुरूप सबसे उत्तम रिजल्ट लाएंगा|

८]आयोजन कर [PLANNING]:-

ज्यादातर प्लानिंग हम चेतन मन से करते हैं ..इसको ह्यूमन प्लानिंग कहते हैं ,जिसमे हम अक्सर फेल हों जाते हैं तब हम कहते हैं “man proposes but god disproposes”.भगवान का तो कुछ बिगाड़ नही सकते ,बिगाड़ सकते हैं तो सिर्फ अपना हीं|
किन्तु जब हम अर्धजग्रित मन से प्लानिंग करते हैं तो यह devine planning
होती हैं जों हर हाल में पूरा होती ही हैं |अक्सर मेरे लक्ष्य अर्धजग्रित मन द्वारा planned होते हैं |

9]अवसर खड़े करना [creats opportunity]:-

हमारा अर्द्ध जागृत मन हमारे लिए अवसर क्रियेट करता हैं |इलाहाबाद में मैं पढ़ा लिखा ,उस दौरान एक ऐसा समय आया था , जब मेरे पास पाकेट मनी तक नही थी,बाहर ना घूमने वा अंतर्मुखी स्वभाव के होने के कारण लोगों से पहचान तक नही थी |मैंने यह समस्या अवचेतन मन को सौंप दी |मुझे एक दिन प्रेरणा प्राप्त हुयी की मैं एक पुस्तक लिखूं ,पढ़ाई तकनीकों पर |मैंने लिखा परिणाम ये हुवा की वह पुस्तक हांथो हाथ बिकी |कालेजो से लेक्चर के लिए रिक्वेस्ट आने लगी |सैकड़ों छात्र मेरी क्लासेज में पढ़ने के लिए इस तरह से उतावले होते की जैसे मैं कोई बड़ी सेलेब्रटी{फिल्मस्टार} हूँ |मैंने अपनी खुद की कोचिंग बनायीं और खुद को इतना मजबूत बना लिया आर्थिक रूप से की आज मैं अपनी मेडिकल की फ़ीस खुद भर सकता हूँ |

१०]mental clock:-

दोस्तों हमारे अवचेतन मन के पास एक नैशर्गिक घड़ी हैं |जों हमे एक सही समय पर उठा देती हैं |मैं कभी अलार्म घड़ी सेट नही करता बल्कि अपने मन को कमांड दे देता हूँ की मुझे अमुक समय पर उठाना हैं मन विना देरी किये उठा देता हैं |

११]मानसिक कैलेंडर :-

मित्रों आपको जीवन में जों भी पाना हैं उसकी एक निर्धारित समय सीमा का उल्लेख जरुर किजीयें |तभी अवचेतन मन उस पर सही से कार्य कर पाएंगा |आपको कोई गोल किस वर्ष प्राप्त करना हैं ?कौन सी गाड़ी कब खरीदनी हैं ?सबका लिखित लेखा जोखा होना चाहिये ,यदि आप दुनिया की सबसे शक्तिशाली शक्ति को [अवचेतन मन ] को काम पर लगा रहें हों |…

१२]इच्छा-मृत्यु [control over death]:-

डॉ दीपक चोपड़ा ने एक पुस्तक लिखी हैं :”Ageless Body,Timeless Mind”जिसका सारंश यह हैं की अपनी मृत्यु हम खुद चुन सकतें हैं की कहाँ मरना हैं?कब मरना हैं ?किस स्थिति में मरना हैं ?..PLACE,MODE AND TIME….
दोस्तों ऐसे केस शायद आपने देखे होंगे जब डॉ ने रोगी को मरणासन्न स्थिति में घर भेज दिया हों और रोगी बच गया हों या डॉ ने कह दिया हों की अब तू मरने वाला हैं पर रोगी बच गया हों |डॉ भगवान नही हैं |ना ही हमारे अवचेतन मन से उसका मुकाबला हैं,kyunki ज्यादातर डॉ चेतन मन से इलाज करते हैं  |

१३]HEALING POWER:-

मैंने एक ऐसा व्यक्ति देखा हैं जों लगातार सोच सोच कर अपने शरीर में कंसर उत्पन्न कर लिया था और कैंसर भी इतना भयानक की टाटा हास्पिटल मुम्बई के डाक्टरों ने जवाब दे दिया था |बाद में उसको लुईस हे की “YOU CAN HEAL YOUR LIFE” बुक मिली ,पढ़कर वह पूरी प्रोसेज समझ गया और अपने एहसास और भावनाओं को बदला ,फिर दो महीने बाद कैंसर जड़ से खत्म ही हों गया ,डॉ तो हैरान ही रह गयें |दुनिया की सबसे शक्तिशाली हीलिंग पावर हमारे अवचेतन मन के पास हैं यह कोई बीमारी उत्पन्न भी कर सकता हैं तथा प्रोसेज को रिवर्स कर ठीक भी कर सकता हैं |

१४]स्वास्थ्य :-

जब भी आप से कोई पूछता हैं -:कैसे हों”?आप क्या कहते हों “FINE”..यह कहने का तात्पर्य हैं आप अपने अवचेतन मन को कह रहें हैं की सब ठीक हैं कुछ करने की जरूरत नही हैं |अवचेतन मन हमारे AUTONOMOUS NERVOUS SYSTEM पर पूरा कंट्रोल रखता हैं ,जों की हमारे शरीर में पाचन ,श्रावण,हारमोन पैदा कर, नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होता हैं जब भी हम चेतन मन के माध्यम से कोई भी निगेटिव कमांड अवचेतन मन को देते हैं तो बीमारी पैदा होतीं हैं |
आप कहिये जवाब में “BETTER AND BETTER”…यानी कल जितना अच्छा था आज उससे भी और ज्यादा अच्छा हूँ |

१५]CONTROL OVER PAIN :-

दोस्तों आपने विपशयना केन्द्र के बारे में सुना ही होंगा |इसके जों हेड हैं गोयनका जी ,उनको माईग्रेन की बीमारी थी |विपश्ना करने के बाद उनकी बीमारी पूरी तरह ठीक ही हों गयी |और फिर उन्होंने अपना उद्योग धंधा छोड़कर अपना पूरा जीवन इसी को दे दिया |विपश्यना यानि “मन की रिप्रोग्रम्मिंग” |

१६]क्रिएटिव थिंकिंग [CREATIVE THINKING]:-

Ordinary thinking:-चेतन मन से |
creative thinking:-अवचेतन मन से |
दोस्तों वाल्ट डिज्नी ,पंडित रविशंकर,लिनार्दो दा विन्ची आदि सभी ने क्रिएटिव थिंकिंग कर दुनिया को अनमोल रत्न दिया |लिनार्दो दा विन्ची को Wisest man of world  कहा जाता हैं |

१७]Control over every part of body:-

महान महर्षि योगी जिन्होंने श्री श्री रविशंकर और डॉ दीपक चोपड़ा को tm meditation सिखाया, जब खुद ध्यान में होतें थे तो हवा में उपर उठ जातें थे |इसको yogic flying कहतें हैं |हमारा अवचेतन मन परम शक्तिशाली हैं |इसका हमारे शरीर के हर भाग पर काबू होता हैं |

१८]सारे विश्व के उपर असर [influence over universe]

मित्र जब तानसेन ने दीपक राग’ गया तो आग भड़क उठी ,ताना रे रे ने राग मल्हार गाया तो बारिश होने लगी |सीता मईया के एक कमांड से धरती फट गयी और् सिर्फ राम नाम लिखने से पत्थर तैरने लगे !कौन सा विज्ञान यह सब की व्याख्या करता हैं |यह सब अवचेतन मन की शक्तिया हैं |
मेरे गुरू श्री श्री रविशंकर जब बंगलौर में अंतर्राष्ट्रीय आश्रम में होते हैं तब उनकी  ध्यान-साधना बादल आते हैं ,बरसते हैं |आप कभी भी आश्राम में आकर यह देख सकते हों |वहाँ के साप,विछुओ,हिंसक जानवरों तक में से हिंसा खत्म हों गयी हैं |वहाँ हमेशा हरियाली रहती हैं यह मेरे गुरू की अवचेतन मन की शक्तियों का एक छोटा नमूना मात्र हैं |

१९]अपार सर्जन शक्ति :-दोस्तों ताजमहल ,एफिल टावर ,रिलायंस ,आदि अपर सृजन शक्ति के उदाहरण हैं |हम सभी अवचेतन मन का इस्तेमाल कर अपनी मन पसंद श्रृष्टि निर्मित कर सकतें हैं |

२०]निजी भगवान :-

दोस्तों हर धर्म में भगवान से हम क्या चाहतें हैं –प्रेरणा,उर्जा ,मार्गदर्शन |यह सब अवचेतन मन हमे देता हैं इसलिए इसे मैं हरेक व्यक्ति का निजी भगवान कहता हूँ |

21]SQ[आध्यात्मिकता का अंक]:-

दोस्तों आपके अनुसार आध्यात्मिकता क्या हैं ?कमेन्ट के माध्यम से जरूर बतायियेंगा !
मेरे अनुसार मन ,वचन ,कर्म की एकरूपता ,जों औरो को खुश करें वही आध्यात्मिकता हैं |
मेरे हिसाब से आध्यात्मिकता क्या हैं ??
१]To do job with honesty
2]To repay a loan in time
3]to keep a promise
4]to maintain a value in business
SQ>EQ>IQ

२२]चुम्बकीय शक्ति [मैग्नेटिक पावर]:-

दोस्तों हम सभी एक चुम्बक हैं और अपने जीवन में हर उस चीज को खीच सकते हैं जों हमे पसंद हों |किन्तु इस मैग्नेट को हमे हमेशा चार्ज करते रहना होंगा |इसके लिए “शबरी तकनीक” अपनाना पड़ेगा |जैसे राम ..राम हमेशा शबरी करती गयी और राम को जाना ही पड़ा वैसे ही आपको जों चाहिये बस उसी के बारे मे सोचे ,करें |पैसा चाहिये तो पैसा पैसा पैसा …..पावर चाहिये तो पावर पावर …..अनथक अविरत करते रहे ..यह हर हाल में आपकी दुनिया में प्रकट होंगा |यह हर हाल में होंगा हीं|

11 July 2012

मन और जीवन {डॉ अजय की कलम से }

मन ही ईश्वर , 
मन ही देवता
मन से बड़ा ना कोय |
मन उजियारा जग जग फैले
जग उजियारा होय |
मेरे दोस्तों मैं अजय यादव  आपके सामने एक बार फिर मन के रहस्यों लेकर हाजिर हूँ |दोस्तों जिस तरह से ,गुरुत्वाकर्षण का नियम हैं ,कूलाम्ब का नियम हैं ,गति के नियम हैं ठीक उसी तरह मन के नियम भी सर्वव्यापी और सत्य हैं ,यह आप इसे ऐसे समझ सकते हैं की चाहे आप अच्छे व्यक्ति हों या बुरे यदि आपको २० मंजिली ईमारत से धकेल दिया जाय  ,आप नीचे ही गिरेंगे......... ये बात सर्वकालिक  सत्य हैं |वैसे ही मन के नियम भी सर्वथा सत्य हैं |

विश्व के सबसे बड़े सबसे शक्तिशाली ,क्षमतावान कम्प्यूटर के मालिक आप हैं |यह कम्प्यूटर इतना शक्तिशाली हैं की हम अपने सम्पूर्ण जीवन काल में इसकी क्षमता का ८ से १० % ही इस्तेमाल कर पातें हैं ,जानकारी के आभाव में इससे ज्यादा इस्तेमाल करना हम नही जानतें हैं |सवाल ये हैं की इसका पूरा इस्तेमाल कैसे किया जा सकता हैं –
हमारा मन २ प्रकार का हैं –
१]चेतन
२]अवचेतन

चेतन मन केवल जाग्रति अवस्था में कार्य करता हैं जबकि अवचेतन मन सदैव सक्रिय रहता हैं |हमारे शरीर की पांचो इन्द्रियों पर ,हलन-चलन [movement],और हमारे विचारों पर जागृत मन का नियंत्रण रहता हैं |हमारी तर्कशक्ति ,पृथक्करण शक्ति [analyitical power],अनुमान ,और अर्थ-घटन शक्ति भी हमारे जागृत मन से नियंत्रित हैं |हममे जो बुद्धि-प्रतिभा हैं ,अवसर को पहचानने की क्षमता हैं ,सही –झूठ को पहचानने की क्षमता हैं ,निर्णय लेने की जो क्षमता हैं और निर्णय पर अमल करने की जो क्षमता हैं.... वह चेतन मन के पास हैं  .सुबह से लेकर शाम तक हम जो इच्छाएं पैदा करते हैं वह जागृत मन से करतें हैं
 
चेतन मन तो हम हमेशा इस्तेमाल करते हैं आईये अवचेतन मन के बारे में,उसकी शक्तियों के सन्दर्भ में बातें करें...........|
हमारा अवचेतन मन सर्वशक्तिमान हैं ,उसका वजूद ही हमारे भलाई के लिए हैं |अर्धजग्रित मन चौबीसों घंटें ,आठो पहर ,हमारे लियें कार्य करता हैं |हमारे साथ यह जन्म से सक्रिय हैं  |यह हमारे जन्म से ही हमारे साथ हैं ,इसी ने हमारे समस्त शरीर का निर्माण भी किया हैं [बाईबिल के अनुसार....]अवचेतन मन की कार्य-प्रद्धति कम्प्यूटर जैसी हैं |जैसे कम्प्यूटर को चलने के लिए प्रोग्राम की जरूरत होती हैं उसी तरह से हमारे अवचेतन मन को चलने के लिए प्रोग्राम की अवश्यकता होती हैं |प्रोग्राम यानि हमारा नजरिया ,धारणाये ,मान्यताएं
इत्यादी |हमारा अवचेतन मन माता-पिता ,शिक्षक ,मित्र ,समाज  की धारणाओं के अनुसार कार्य कर रहा हैं ,क्यूंकि उसे हमने अपनी खुद की धारणाओं के अनुसार अभी ढालना नही सीखा हैं |इसके लिए हमे लगातार हमारे लिए सकारात्मक,उर्जात्मक विचारों का एक नियमित आत्म सुझाव देना हैं |इन आत्म्सुझावो को हमारा मस्तिष्क ग्रहण कर लेता हैं और उनके अनुसार कार्य करता हैं ..........हमारे अवचेतन मन के पास अपनी कोई च्वाईस नही होती हैं जो भी बोला जाय ,चाहे आप बोले या आपके आस-पास वह इसे ग्रहण कर लेता हैं और इस पर प्रतिक्रिया देना शुरू के देता हैं ..............
ज्यादातर प्राथमिक स्तर पर  हमारे शिक्षक लोग.....या हमारे अभिभावक गण बच्चों के अच्छे प्रदर्शन ना कर सकने पर या उनके मन मुताबिक कार्य न करने पर उन्हें नकारात्मक ,बातों से संबोधित करते हैं जैसे –
तुम बुद्धू हों.................................................................................... |
तुम जीवन में कुछ नही कर सकते ...................................................|
वेवकूफ................................................................. |
इस तरह की नकारत्मक बातें कोमल ग्रहणशील ,मस्तिष्क वाले ,बच्चों के मस्तिष्क में भर जाती हैं |जिससे उनका प्रदर्शन लगातर गिरता जाता हैं |
भारत जैसे विशाल देश में सही मायनों में शिक्षकों की नितांत कमी हैं ,लोग कुछ और ना कर पाने पर शिक्षक बनते हैं ....बिना मन[गहरी सोच] के गैर जिम्मेदार उत्पाद [विद्यार्थी] निर्मित करते हैं ....विश्वविद्यालयो में लगातार बढ़ती हिंसा और छात्रों का लगातार अनैतिक कार्यों एवं गैर कानूनी कार्यों में लिप्त होना ..........प्राथमिक स्तर पर बच्चों के मन की सकारात्मक कंडीशनिंग ना हों पाने के कारण होती हैं ...जो की देश का दुर्भाग्य हैं |एक कहावत हैं”there should be no wall between school and society”,पर देखा जाय तो समाज और स्कूल के बीच काफी गैप नज़र आता हैं |ज्यादातर लोगों का कोई लक्ष्य ही नही होता !जो भी बन गये ,या जहा भी पहुँच गए उसी को लक्ष्य मान/बना लेते हैं |
कुछ लोगों को काटने[बुरा बोलने] की आदत होती हैं...................हमेशा आप को काट लेंगे |ऐसे लोगों के  काटे से बचने लिए मैंने एक टीका विकसित किया हैं –
लोगों को काटने[बुरा बोलने] के दुष्प्रभावो से खुद को कैसे बचाएं ?
जब भी आपको कोई काटें तो आप खुद से कम से कम २ बार कहिएं –
day by day in every way i am getting         better and better.
                                                              या
मेरी दुनिया में सबकुछ श्रेष्ठ एवं  .....                               
   कल्याणकारी हैं,


     अपने विचारों [सोच एवं धारणाओं] से अपनी दुनिया ह्म खुद बनातें  हैं ,कुछ लोग हमेशा नकारत्मक  ही सोचतें हैं जैसे –
गर्मी बहुत हैं.....[अरे गर्मी का मौसम हैं तो गर्मी ही होंगी]
मेरी दुनिया में सबकुछ बुरा होता हैं ...........[यक़ीनन बुरा ही होंगा क्यूंकि जो बोलेंगे /सोचेंगे वही होंगा जिन्दंगी  में...............]
जैसे हम लोगों के पास डायरी होती हैं ,वैसे भगवान के पास के पास भी एक डायरी हैं जिसमे एक ही शब्द हैं –
             तथास्तु
यदि हम सोंचे की हमारा जीवन उत्तम हैं |
तो भगवान ऊपरसे कहतें हैं
      तथास्तु

  यदि हम कहें की हमारे जीवन में कष्ट हैं तो भगवान उप्पर से कहतें हैं –
                      तथास्तु
सोचिये हमे तथास्तु कहा चाहिये  |हमे लगातार सकारात्मक सोचने की आदत डालनी होंगी |क्यूंकि हमारे विचारों के अनुसार त्वरित फल भगवान भी देतें हैं |
     इसलिए विचारों के सन्दर्भ में तो हमे सदैव सतर्क रहना होंगा |

आधुनिक शिक्षा का परिवेश

 
          
जुलाई का महीना हैं |दुकाने और प्राइवेट स्कूल कालेज फिर से सजने लगे हैं |मेरे एक हितैषी मित्र अपने बच्चे का एक स्कूल में एडमिशन कराने जा पहुंचे ,प्रधानाचार्य जी परिचित थे |,पहले ही पूछ बैठे“अमाँ  यार !बच्चे का कितना परसेंट चाहते हों ? 
अब मित्र की चौकने की बारी थी ..बोले “यार !एडमिशन से पहले ही तुम बोर्ड परीक्षा का परसेंटेज निर्धारित कर देते हों क्या?अरे नही पर तुम्हारी ख्वाहिश जानना चाहता हूँ “इस  बार बारहवी में शिखा ने ८९.२%पाया हैं ,अरे हिन्दी वाले आचार्य लम्बू पांडे  की लड़की हैं !अरे उसने तो परीक्षा  भी नही दी थी............ अब चौकने की बारी मित्र की थी |
मार्च का महीना आते ही बोर्ड परिक्षाओ की गहमा-गहमी शुरू हों जाती हैं |हमारे कौशाम्बी में तो नए –नए स्कूल भी खुल जाते हैं ,जहां बकायदा सेंटर तक आता हैं,लोगों को भी उसी समय पता चलता हैं की यहाँ स्कूल भी हैं ,पहले तबेला समझते थे क्यूंकि हौदें करीने से लगे रहते हैं  |परीक्षा के वक्त गुरू जी साफ़ सुथरे कुरता –पैजामा पहन कर मुख में पान चबाते मुस्कुराते नजर आते हैं | गुरू-घंटाल इस माह को आमदनी एवं इज्जत के हिसाब से सर्वाधिक उत्तम मानते हैं |            
   साल भर नैतिकता और ईमानदारी का पाठ पढाने वाले पाने जी हों या महान विदूषक शर्मा जी या तेवारी जी ,ये सब परीक्षा केन्द्र पर डयूटी लगवाने को व्याकुल रहते हैं |डयूटी लगते ही बच्चों से शुरू हों जातें हैं ‘काल ५०० रूपिया लेत आया !ई स्कूल क नियम हौं ,न लिअईबा ता परीक्षा न देई पौउबा |नैनी में नकल का रेट निर्धारित हैं |२०१२ के नकल रेट के अनुसार “६०० रूपये में चिट ,१००० में ब्लैकबोर्ड सुविधा ,३००० में लिखी कापी ,१०००० में मार्कशीट अवलेबल हैं” जान-पहिचान होने पर विशेष छूट का भी प्रावधान हैं |
बाल मंदिर के प्रधानाचार्य जो की खुद भी नकल सी ग्रेजुएशन पास हैं ,अपनी नकल तकनीकों का हमेशा बखान करते हैं ,वे और उनके सहयोगी पांडे ,वर्मा जी ,तेवारी साहब .....ये सब परीक्षा से पहले ऐसा वातावरण बनाते हैं की छात्र को लगता हैं की परीक्षाफल के निर्धारक यही लोग हैं |
किलर इंस्टिक्ट का तात्पर्य हैं की आप सफलता हेतु १००% ही नही बल्कि २००% ज्यादा मेहनत  और कोशिश करें |किन्तु पांडे सर के अनुसार “एक बार एक सार ईमानदार कक्ष –निरीक्षक पड़ गवा रहां !नकल ना करई देई ,हम और के.एम. सर ओका खोब लतियायें |भाग गवा सार नाही ता ,जिव् लेई  लेयित |
         २५० चनेल देखने वाली वक्त से पहले जवान होने वाली,अपरिपक्वता वा एनिमल-स्पिरिट से भरी इस पीढ़ी के छात्र जब इन सब बातों को सुनते हैं तो उन्हें लगता हैं की गुरू जी से बढकर उनका कोई हितैषी नही |
   कक्षा में यदि कोई सुधि छात्र नकल की प्रोग्रामिंग के बजाय पढाने को कहें तो ये कहते हैं की ‘नकल के बारें में !नक़ल के तौर –तरीको के विषय में कोई किताब छपी हैं कभी !सुकरात ने प्लेटो को शिक्षा दी,प्लेटो ने अरस्तू को पढ़ाया ,अरस्तू सिकन्दर महान के शिक्षक बने |ज्ञान अगर एक से दूसरे को  ना हसिल  हुवा होता तो मर चुका होता’ |
   नैनी में मान्यता प्राप्त /गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयो की भरमार हैं |यहाँ अध्यापक होने  के लिए आपकी शिक्षा नही स्किल देखी जाती हैं |यहाँ शिक्षको की योग्यता के नए मापदंड हैं ,आप चाहे हाईस्कूल ही पास हों ,पर यदि इंटर के छात्रो को ४० मिनट बंधे रख सकते हैं ,तो माना जाता हैं की आपमें इन्टर तक पढाने की योग्यता हैं |
छात्र –छात्राए भी कम नही हैं ,हमारे बाल-भारती के प्रधानाचार्य का हिन्दी की शिक्षिका के साथ जो चलता हैं ......आदर्श-स्वरुप बच्चे  वो भी अपनाने से पिछे नही हटते ,परिणाम स्वरुप आस-पास  कई केबिनयुक्त साईबर कैफे खुल गए हैं जहां बच्चे प्रक्टिकल तक करते हैं,दवा की दुकानों पर कंडोम ऐसे विज्ञापित होते हैं जैसे पावरफुल च्वनप्राश |आस-पास कई नर्शिंग होम भी हैं |
|क्लास में बोरियत भरे क्षणों में छोटी इन्टरनेट फिल्मे मनोरंजन करती हैं |नए नए बने तथाकथित शिक्षक गण भी इन सब में रूचि लेते हैं |तेवारी जी अक्सर  कक्षा १२ की छात्राओं को घर पर बुलाते हैं |सबकी फीस तय हैं ,महीने १० से लेकर ५०० तक में इंटर की फिजिक्स पढाते हैं |वर्मा जी तो श्रींगार रस के महान ज्ञाता हैं ,कथनी-करनी में भेद नही करते क्रम-योगी हैं ,बिहारी के दोहे का अर्थ समझते समझाते ना जाने कब उनके हाथ छात्राओ के गाल पर पहुँच जाते हैं खुद उनको भी नही पता चलता |विरोध  किया तो घरेलू परीक्षा एवं बोर्ड परीक्षा में खैर नही |
यहाँ स्कूलों में नकल या अनैतिक कार्यों में लिप्त लोगों को पकडे जाने पर गलती का नही ....बल्कि पकडे जाने का दुःख होता हैं |यहाँ आप अक्सर इस बात को महसूस करेंगे और आप देख सकते हैं की पूनम की जगह पूजा और रवि की जगह शनि परिक्षा  देता हैं |इस बात से किसी को कोई फर्क नही पढ़ता,सबको उसका हिस्सा मिला हुवा हैं |

                         किसी समाज में अनैतिकता और नाइंसाफी से निराशा जन्म लेती हैं |अनैतिक आनंद की तलाश में रहने वाले लालची और अविवेकी लोगों पर दृढ़ नैतिक चरित्र वाले लोगों द्वारा अंकुश लगाना जरुरी हैं |शिक्षा माफिया लगातार मजबूत होता जा रहा हैं ,और सरकारी शिक्षा बिभाग नकेल कसने में असफल हैं |
 मेरा अगला लेख जरुर पढ़िए |यह विद्यार्थी और उनकी दिनचर्या और नजरिया से सम्बंधित हैं और १० जुलाई तक प्रकाशित होंगा |इस लेख को भाषण के रूप में जब मैंने दिया था ,तो पूरे देश से अभिभावकों के पत्र ,इमेल वा फोन प्राप्त हुवे थे |

26 June 2012

VICHAR

                                ********विचार वा भावनाएं *********
प्रेम जीवन की सकारात्मक शक्ति हैं |प्रेम ही हर सकारात्मक और अच्छी चीज की बुनियादी वजह हैं |जीवन में एक ही सकारात्मक शक्ति हैं -प्रेम |
गुरुत्वाकर्षण एवं विद्युत-चुम्बकत्व जैसी प्राकृतिक शक्तियों की भांति  प्रेम की शक्ति भी हमे नही दिखाई पढ़ती |प्रेम की शक्ति गुरुत्वाकर्षण या विद्युतचुम्बकत्व या किसी भी प्राकृतिक शक्ति से ज्यादा शक्तिशाली हैं |
मानव हृदय केप्रेम की बदौलत ही हर खोज,अविष्कार और सृजन का होना संभव हुवा हैं |अपने चारो ओर  नजर डालें ,आपको जो भी मानव निर्मित चीज दिखती हैं उसका आस्तित्व प्रेम के अभाव में संभव ही नही था |
समानता से समानता आकर्षित होती हैं ,जीवन में हम जो देते हैं हमे वही वापस मिलता हैं |हमने आज तक अपने जीवन में जो भी  दिया हैं हमे वही वापस मिल रह हैं |


सकारात्मकता देंगे तो सकारात्मकता वा अच्छी चीजों से भरा जीवन मिलेंगा ,नकारात्मकता देंगे तो बदले  में नकारात्मक चीजे मिलती हैं ,
सवाल यह हैं की हम सकारात्मक या नकारात्मक चीजे देते कैसे हैं ?
*****अपने विचारों वा भावनाओं द्वारा *******

हर पल सकारात्मकता देना हैं -
विचारों और भावनाओं द्वारा ..........
क्यूंकि जीवन में जो लोग,परिस्थितियाँ या भावनाएं आती हैं ,वे विचारों या भावनाओं द्वारा ही हमारे ओर आकर्षित होती हैं |
उदाहरण:
१]यदि हम किसी व्यक्ति की मदद करते हैं तो हम देखतें हैं की हमे भी चारो ओर से मदद मिलने लगी हैं |
२]यदि परिवार में किसी सदस्य पर क्रोधित होतें हैं तो तो वह क्रोध जीवन की नकारात्मक परिस्थितियों के रूप में लौटता हैं |
हम विचारों वा भावनाओं से विचारों का सृजन कर रहें हैं ,हम जो भी सोचते और करते हैं ,उसी से हमारे जीवन की हर घटना,हर परिस्थिति वा हर अनुभव का निर्माण होता हैं |
उदाहरण :
१] अगर मैं यह सोचू और महसूस करूं की मेरा जीवन बेहतरीन हैं ,तो मैं ऐसे लोगों ,परिस्थितियों और घटनाओं को आकर्षित करूँगा ,जो मेरे जीवन को सचमुच बेहतरीन बना देंगे
हम एक चुम्बक हैं
हम जैसे विचार और भावनाओं को देंगे वैसे ही को आकर्षित करेंगे |
उदाहरण:
१]यदि मैं धन -दौलत के बारें में सकारात्मक विचार और भावनाओं तो मैं चुम्बक की भांति उन सकारात्मक परिस्थितियो ,लोगों और घटनाओं को आकर्षित करूँगा,जिनकी बदौलत जीवन में ज्यादा धन आयेंगा |
आकर्षण का नियम सदैव कार्य करता ही रहता हैं |इस बात से कोई फर्क नही पढ़ता हैं की मेरी भावनाएं अच्छी हैं या बुरी|वे उतनी ही सटीकता से मेरी ओर वापस आएँगी जैसी फोटो कापी मशीन ,कागज की फोटोकापी करता हैं |

*********विचार**********
अपनी पूरी विचार-शक्ति उन वस्तुओ पर केंद्रित करना हैं ,जो हमे  प्रिय हैं और जो हमें  चाहियें|हमें  केवल  दिन भर हुयी अच्छी बातों एवं घटनाओं के बारें में ही बात करनी हैं ,बार बार बताना हैं की हमे समय पर पहुचना कितना अच्छा लगाता हैं |पूरी तरह स्वास्थ्य रहना कितना अच्छा हैं |
हम लोग अपने जीवन में जो भी प्रिय चीजे लाना चाहतें हों,केवल उन्ही प्रिय चीजों के बारें में ही बातें करनी चाहियें |
********भावनायें***********
यदि विचार वा शब्द अंतरिक्षयान हैं तो भावनाएं उसकी ईधन|अंतरिक्षयान एक स्थिर वाहन हैं जो ईधन से चलता हैं |विचार एवं शब्द वे वाहण हैंजो भावनाओं के बिना कुछ नही कर सकतें क्यूंकि भावनाओं से ही उन्हें शक्ति मिलती हैं |
**********एहसास ********
एहसास इस बात का सटीक पैमाना और प्रतिबिम्ब हैं की आप उस पल क्या दें रहे हैं |जब आप अच्छा महसूस करतें हैं तो आपको किसी भी चीज की चिंता करने की जरूरत नही हैं क्यूंकि आपके विचार वा शब्द वा कार्य अच्छे होंगे|सिर्फ अच्छा एहसास होने पर ही आप प्रेम दे सकते हैं ,और इस बात की पक्की गारंटी हैं की वह प्रेम आपकी तरफ कई गुणा होके लौटेंगा |
-अजय यादव

23 April 2012

चलते ही रहना

     चलते रहना

जिंदगी की दौड़ में ............
तेज या शक्तिशाली नही जीतता ........
जीतता वो हैं ..जो ...........
तब तक चलता हैं ...........
जब तक की ............
मंजिल नही मिल जाती..........
कड़ी मेहनत पर्याप्त नही ......
विजेता का दिल होना चाहियें...
चाहे जो कुछ हों जाएँ......
मैदान ना छोड़ना..अजय
कई बार गिरना..........
उठ कर खड़े होना ........
चलते रहना.............
बस चलते रहना ...........अजय

2 April 2012

प्रेम

अक्सर मै सोचता हूँ की…..
उस लड़की को क्यों चाहता हूँ ,
मेरी तरह हांड मांस की वो भी बनी हैं ,
उसमे भी उतनी ही हड्डियाँ हैं ,
सारे शरीर की जैव रसायनी सामान हैं ,
फिर मै उस मोड पर क्यों पलट के देखता हूँ .
इस चाह में की वो लड़की दिख जाये ,
रोमांटिक गाने सुनते वक्त वो याद क्यूँ आती हैं ,
दुनिया बनाते वक्त शायद भगवान ने
इंसान की व्यस्तता और …
व्यस्तता व्युत्पन्न इंसानी परायेपन को
भाप-लिया था इसीलिए…………
उन्होंने सृष्टि की रचना में
प्यार का नया खेल रचाया |
विश्वास ,समर्पण ,त्याग जैसे ,
कुछ पायदान बनाया ,

गर्म-गोस्त

गोस्त –की-दूकान {कवि-अजय]
गली के उस चौराहें पर ,
गोस्त की दुकान हैं,
पापा का हाथ बटाने,
अक्सर सलीम आ जाती हैं |
सलीमा कमसिन कुंवारी हैं,
उघरता बदन भरपूर जवानी हैं
आशिको और व्यभिचारियो की,
घूरती निगाहें ,
क्या यही हर जवानी की कहानी हैं,?
गोस्त खरीदने वाले लोग अक्सर ,
गोस्त की ताजगी तसव्वुर से,
जान जाते हैं,
ताज़े गोस्त को देखते हैं ,
सलीमा को देखते हैं,
अर्थपूर्ण मुस्कान से मुस्कराते हैं|
सलीमा अक्सर खड़ी-खड़ी ,
नशेड़ी –शबाबी आँखों की चुभन ,
महसूस करती हैं |
कभी-कभी उसका मन कहता हैं ,
की चाकू से खुद के अंगों को,काटकर
तराजू पर रख दें |
मिमियाती बकरी सा कट जाएँ ,
उसका भी गोस्त बिकें ,
ताकि घूरती आँखों की चुभन से ,
उसका संवेदी वजूद बच जाएँ

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